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यश भारती की दोबारा उठी मांग तो ख़ड़े हुए सवाल, ‘अर्थिक मदद सिर्फ ज़रूरतमंदों को दे सरकार’

देश के नामी गिरामी संपन्न कलाकारों की उप्र सरकार से पचास हज़ार मुफ़्त पेंशन की मांग को लेकर सीएम योगी को पत्र लिखकर आपत्ति जताई गई है।

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यश भारती की दोबारा उठी मांग तो ख़ड़े हुए सवाल, 'अर्थिक मदद सिर्फ ज़रूरतमंदों को दे सरकार'

लखनऊ. देश के नामी गिरामी संपन्न कलाकारों की उप्र सरकार से पचास हज़ार मुफ़्त पेंशन की मांग को लेकर सीएम योगी को पत्र लिखकर आपत्ति जताई गई है। ग्लोबल टैक्सपेयर्स ट्रस्ट के चेयरमैन मनीष खेमका ने सीएम योगी व वित्तमंत्री राजेश अग्रवाल को एक पत्र लिख करदाताओं की आपत्ति से उन्हें अवगत कराया है। ग़ौरतलब है कि सुप्रसिद्ध गायक अनूप जलोटा के नेत्रत्व में कुछ कलाकारों ने मुख्यमंत्री योगी से मुलाक़ात कर यश भारती की पेंशन व मुफ़्त सुविधाओं को पुन: चालू करने की माँग की थी।

खेमका ने कहा करदाता कलाकारों के सम्मान के हिमायती हैं। देश-प्रदेश की प्रमुख प्रतिभाओं को सरकार सम्मानित करे यह अच्छी बात है। होनी चाहिए। लेकिन सम्मान और सहायता दो अलग बातें हैं। यह कलाकार-सरकार सभी को समझना चाहिए। निजी स्वार्थ के लिए इनका घालमेल नहीं होना चाहिए। भारत जैसे देश में जहां आज भी अधिसंख्य लोग ग़रीबी रेखा के नीचे हैं, भूखे सोते हैं, दयनीय स्थिति में हैं वहां करदाताओं की कमाई को अमिताभ बच्चन, अभिषेक बच्चन, ऐश्वर्या राय और अनूप जलोटा जैसे अमीर और सक्षम लोगों पर खर्च करना क्या सही है? जिसे भी जीवन यापन के लिए सरकार से सहायता चाहिए उसे लाईन में आना चाहिए। जो पहले ही काफ़ी लंबी है। जहां पहले अधिक पात्र को सहायता मिलनी चाहिए।

उन्होंने कहा भारत रत्न, पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्मश्री भारत के चार सबसे बड़े सम्मान हैं। देश के इन सर्वोच्च सम्मानों में भी केंद्र सरकार कोई रक़म या पेंशन नहीं देती। भारत रत्न में आजीवन रेलयात्रा की सुविधा ज़रूर दी जाती है। इस तर्ज़ पर प्रदेश सरकार भी चुनिंदा प्रतिभाओं को मुफ़्त बस यात्रा की सुविधा पर विचार कर सकती है।खेमका ने कहा देश की तरक़्क़ी और ख़ुशहाली चाहिए तो सरकारों को मेहनतकश करदाताओं की रक़म के प्रति जवाबदेह होना पड़ेगा। अदालत के आदेश के बाद बड़ें नेताओं को भी अपने बंगले छोड़ने पड़ रहे हैं।