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सिंपल नहीं डिंपल की डगर, जिस सपा से सांसद बने रघुराज आज उसी के लिए बने चुनौती

शिवपाल के करीबी रघुराज शाक्य को मैनपुरी लोकसभा उप चुनाव में कैंडिडेट बना कर बीजेपी ने बड़ा खेल कर दिया है। इस मूव से बीजेपी ने यह साफ कर दिया है कि कमजोर कैंडिडेट को लड़ा कर वो डिंपल को वाकओवर नहीं देने वाली। आइए पूरी कहानी के डिटेल में उतरते हैं…

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लखनऊ

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Vikash Singh

Nov 16, 2022

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डिंपल पर शिवपाल की चुप्पी ने विरोधी पार्टियों को जुबानी हमला करने का मौका दे दिया है।

यूपी के मैनपुरी लोकसभा उपचुनाव सीट पर बीजेपी ने रघुराज शाक्य को चुनाव लड़ने की घोषणा की है। रघुराज शाक्य का शिवपाल यादव के साथ करीबी रिश्ता है। वो प्रगतिशील समाजवादी पार्टी यानी प्रसपा के साथ जुड़े रहे हैं।

रघुराज का नाम शिवपाल के करीबियों में गिना जाता है। वो पहले प्रसपा के प्रदेश उपाध्यक्ष थे। उन्हें डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने बीजेपी में शामिल कराया था।

तभी से रघुराज के चुनाव लड़ने के कयास लगाए जा रहे थे। आज पार्टी ने मैनपुरी से उनके नाम की घोषणा करके इसपर मुहर भी लगा दी है।

कार्यकर्ता अपने वोट से नेताजी को श्रद्धांजलि दें: अखिलेश यादव

डिंपल यादव ने सोमवार को नामांकन दाखिल किया। इस सबके बीच डिंपल औरअखिलेश
के अलावा सबसे अधिक चर्चा में सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव रहे। अखिलेश यादव वोटरों से नेताजी के नाम पर वोट मांगते दिखे।

अखिलेश ने कहा कि कार्यकर्ता अपने वोट से नेताजी को श्रद्धांजलि दें। बीजेपी के इस दांव से अखिलेश को निपटना आसान नहीं है।

शिवपाल यादव सोमवार को दिन भर लखनऊ कार्यालय में बैठकर भविष्य की रणनीति बनाते दिखे। लेकिन मैनपुरी के चुनावी मैदान में वे दिखेंगे या नहीं ये फ्यूचर में क्लियर हो जाएगा। उनके सहयोगी और साथी रहे रघुराज शाक्य की बीजेपी से लड़ने की खबर ने चुनावी सरगर्मी को बढ़ा दिया है।

यूपी चुनाव 2022 से ठीक पहले प्रसपा छोड़कर रघुराज शाक्य ने बीजेपी का हाथ पकड़ लिया था। रघुराज इटावा सीट से दो बार सांसद रहे हैं। उन्हें केशव प्रसाद मौर्य ने फरवरी महीने में भाजपा की मेंबरशिप दिलाई थी।

53 साल के रघुराज शाक्य प्रसपा के प्रदेश उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं। रघुराज शाक्य साल 1999 और 2004 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर इटावा से सांसद चुने गए। वर्ष 2012 में सपा के टिकट पर इटावा सदर सीट से विधानसभा का चुनाव जीता था।

यूपी चुनाव 2022 में इटावा सदर सीट से उम्मीदवारी कर रहे थे, लेकिन उन्हें चुनावी मैदान में नहीं उतारा गया।

सपा से टिकट नहीं मिला तो हुए नाराज, लेकिन शिवपाल से नाराजगी नहीं

सपा और प्रसपा के गठबंधन के बाद अखिलेश यादव ने केवल शिवपाल यादव को चुनावी मैदान में उतारा था। इसी वजह से उन्होंने अपने रास्ते अलग कर लिए। इस सीट से सपा ने सर्वेश शाक्य को चुनावी मैदान में उतार दिया। वे पूर्व सांसद सर्वेश शाक्य के बेटे हैं। रघुराज शाक्य ने 27 जनवरी 2017 को सपा से इस्तीफा दे दिया।

रघुराज शाक्य ने तब परिवार की लड़ाई में खुद को अपमानित करने का आरोप सीधे सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव पर लगा दिया था।

इसके बाद वे शिवपाल यादव के साथ जुड़ गए। पांच साल उनके साथ रहे। प्रसपा को मजबूत बनाने का प्रयास किया। लेकिन, चुनाव के टाइम उनको इसका फायदा नहीं मिल पाया।

3.25 लाख हैं शाक्य वोटर, यादवों की संख्या इनसे बहुत ज्यादा

डिंपल यादव के खिलाफ जातिगत आंकड़ों को साधने के लिए बीजेपी ने इस सीट पर रघुराज शाक्य को उम्मीदवार बनाया है। मैनपुरी में यादवों के करीब 4.25 लाख वोट हैं, जबकि शाक्य वोटर्स की संख्या करीब 3.25 लाख है।

नेताजी के नजदीकी थे रघुराज, आज उन्ही के विरासत के लिए बने चुनौती
इटावा के ही रहने वाले रघुराज 1999 और 2004 में सपा से दो बार सांसद भी रह चुके हैं। 2012 में सपा ने उनको इटावा सदर से टिकट दिया और जीतकर विधायक बने। शाक्य वोटरों में रघुराज की पकड़ मजबूत है। बीजेपी ने इसी बात को ध्यान में रखते हुए उन्हें अपना कैंडिडेट बनाया है।

मैनपुरी सीट मुलायम परिवार की परंपरागत सीट रही है। ऐसे में सपा की ओर से डिंपल यादव को उम्मीदवार बनाया गया है।

शाक्य वोटर सपा की बढ़ाते रहे हैं टेंशन, दो बार नेताजी को भी किया परेशान

अगर हम आंकड़ों की बात करें तो शाक्य वोट बैंक मुलायम सिंह यादव की चिंता इस सीट पर बढ़ाता रहा है। लोकसभा चुनाव 2019 में नेताजी ने महज 94,389 वोटों के अंतर से जीता हासिल की थी।

उस वक्त मुलायम के खिलाफ प्रेम सिंह शाक्य चुनावी मैदान में उतरे थे। मुलायम सिंह यादव को 5,24,926 वोट मिले थे। जबकि दूसरे नंबर पर रहे भाजपा के प्रेम सिंह शाक्य को 4,30,537 वोट मिले थे।

मुलायम सिंह यादव का यह आखिरी चुनाव माना जा रहा था इसी कारण भाजपा का कोई भी सीनियर नेता मैनपुरी में प्रचार करने नहीं गया। इसके बावजूद शाक्य वोटरों का झुकाव भाजपा कैंडिडेट के तरफ था।

यूपी विधानसभा चुनाव 2022 में भाजपा ने मैनपुरी सीट के अंदर आने वाली 5 सीटों में से मैनपुरी विधानसभा और भोगांव विधानसभा सीट पर बीजेपी ने कब्जा जमाया था।

भाजपा ने पिछले दिनों में सपा के गढ़ में सेंधमारी करने की शुरुआत कर दी है। आजमगढ़ और रामपुर लोकसभा सीट इसका उदाहरण है। सपा ने इसी अनहोनी को रोकने के लिए डिंपल को मैदान उतारा है।

मुकाबला कड़ा होगा मैनपुरी लोकसभा सीट पर प्रचार करने सीएम योगी आदित्यनाथ भी जा सकते हैं।