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मोदी लहर में अपनी पुश्तैनी सीटें भी नहीं बचा पाये यह दिग्गज, भाजपा ने इनके गढ़ में खिलाया कमल

- इन राजनीतिक परिवारों के बड़ा झटका है 2019 लोकसभा चुनाव परिणाम- राहुल गांधी, डिम्पल यादव, अजित सिंह और जयंत चौधरी को अपने ही गढ़ में हार का सामना करना पड़ा

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लखनऊ

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Hariom Dwivedi

May 26, 2019

Lok Sabha Election result 2019

मोदी लहर में अपनी पुश्तैनी सीटें भी नहीं बचा पाये दिग्गज, भाजपा ने इनके गढ़ में खिलाया कमल

लखनऊ. भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश में भले ही पिछला रिकॉर्ड नहीं दोहरा पाई हो, लेकिन 2019 के नतीजों में बीजेपी ने साल 2014 की जीत के आंकड़ों को भी ध्वस्त कर दिया है। इस बार भाजपा अकेले 303 सीटें पर चुनाव जीतने में सफल रही है, जबकि पिछली बार यह आकंड़ा 282 सीटों का था। उत्तर प्रदेश में भाजपा ने 62 सीटें जीती हैं, जो पिछली बार के मुकाबले 09 कम हैं। इस बार उत्तर प्रदेश में मोदी लहर ऐसी चली कि विपक्षी दलों के नेता अपने गढ़ की वह सीटें हार गये, जहां लंबे समय से उनकी पुश्तों ने सियासी हार का सामना नहीं किया है।

अमेठी : कांग्रेस के गढ़ में ही राहुल गांधी की हार
1997 से आस्तित्व में आई अमेठी लोकसभा सीट कांग्रेस का अभेद्य गढ़ मानी जाती थी, लेकिन इस बार भाजपा प्रत्याशी स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी को हराकर बड़ा सियासी उलटफेर कर दिया। स्मृति ने राहुल गांधी को ने 55 हज़ार वोटों से हरा दिया। अमेठी से राजीव गांधी चार बार, राहुल गांधी तीन बार, एक बार सोनिया गांधी और एक बार संजय गांधी चुनाव जीते। अब तक अमेठी से 13 बार कांग्रेस चुनाव जीती है। 2019 से पहले अमेठी से एक बार भारतीय जनता पार्टी और एक बार जनता पार्टी को जीत नसीब हुई है।

कन्नौज : समाजवादियों की पारम्परिक सीट नहीं बचा पाईं डिम्पल
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्नी डिम्पल यादव कन्नौज में पार्टी की पारम्परिक सीट नहीं बचा सकीं। कड़े मुकाबले में भाजपा उम्मीदवार सुब्रत पाठक ने उन्हें 12 हजार से अधिक वोटों से हरा दिया। अभी तक कन्नौज लोकसभा सीट समाजवादियों का गढ़ कहा जाता था। समाजवाद के सबसे फेसम चेहरे के तौर पर प्रख्यात राम मनोहर लोहिया ने 1967 में इस सीट पर जीत दर्ज की थी। 1998 के बाद से 2014 तक इस सीट पर सपा का कब्जा था। 12वीं लोकसभा में सपा के प्रदीप यादव ने भाजपा को हराकर यह सीट जीती थी। अखिलेश यादव कन्नौज से तीन बार, डिम्पल यादव दो बार और मुलायम सिंह यादव एक बार सांसद चुने गये।