21 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Rahul Gandhi: नेहरू आजीवन करते रहे विरोध, राहुल अब उसी को कर रहे हैं समर्थन

राहुल गांधी इन दिनों अमेरिका की छह दिवसीय यात्रा पर हैं। उनकी यात्रा को लेकर बीजेपी हमलावर है। कार्यक्रम के आयोजकों का नाम सार्वजनिक कर राहुल की यात्रा की पोल BJP प्रवक्ताओं ने खोल दिया है।

3 min read
Google source verification
rahul_gandhi.jpg

राहुल गांधी

Rahul Gandhi: राहुल गांधी की अमेरिकी यात्रा पर BJP हमलावर हैं, कारण कि वहां पर मोदी विरोध में राहुल गांधी तरह-तरह का प्रहसन कर रहे हैं। कभी वह अपना फोन निकाल कर मोदी से बात करने लगते हैं और बताते हैं कि मेरा फोन मोदी जी आप टेप कर रहे हैं, तो कभी हिंदुस्तान में लोकतंत्र कमजोर हो गया है बोलने लगते हैं। कभी संवैधानिक संस्थाओं की चिंता करने लगते हैं। इसी सिलसिले में राहुल गांधी ने उस राजनैतिक दल की तारीफ के पुल बांधना शुरू कर दिया, जिसका आजीवन पंडित जवाहर लाल नेहरू विरोध करते रहे।

केरल जिसे लव जेहाद की फैक्ट्री कहा जाता है, वहां पर कांग्रेस की सहयोगी इंडियन मुस्लिम लीग है। राहुल गांधी ने अपने गठबंधन के बचाव में उसे सेकुलर बताते हुए कहा कि मुस्लिम लीग में कोई खराबी नहीं है, जिसे लेकर हंगामा शुरू हो गया है। वास्तव में यह वही मुस्लिम लीग है, जिसके कारण देश विभाजन की त्रासदी भारत को झेलनी पड़ी थी।

टू-नेशन थीयरी के जनक इस पार्टी का आजीवन पंडित जवाहर लाल नेहरू समेत उस समय के कांग्रेस नेता विरोध करते रहे थे। यहां तक कि देश के विभाजन के बाद कांग्रेस नहीं चाहती थी कि मुस्लिम लीग नाम से कोई राजनैतिक दल भारत में रह जाए।

सबसे अधिक सीट UP में मुस्लिम लीग ने जीता
1947 में देश को आजादी मिलने के तुरंत पहले 1946 में होने वाला आम चुनाव का प्रमुख मुद्दा ही देश विभाजन था। इस चुनाव में देश के विभाजन के पक्ष में मुस्लिम लीग लड़ रही थी, जबकि देश के विभाजन के विरोध में कांग्रेस थी।

इस चुनाव में देश भर में सबसे अधिक सीटें मुस्लिम लीग ने उत्तर प्रदेश तत्कालीन संयुक्त प्रांत में जीती थी। हांलाकि इतिहासकार आरोप लगाते हैं कि विभाजन के नक्शें में यूपी नहीं था, फिर भी मुस्लिम लीग को समर्थन देने वाले कौन लोग थे, जिनको यहीं रहना था लेकिन पाकिस्तान से प्रेम था।

बंटवारे के बाद भंग हो गई थी मुस्लिम लीग
देश के विभाजन की मांग करने वाली मुस्लिम लीग और केरल की मुस्लिम लीग एक नहीं है। बताया जाता है कि केरल की मुस्लिम लीग की सक्रियता सिर्फ केरल में है जिसकी स्थापना 1948 में की गई। जबकि विभाजन का आंदोलन चलाने वाली जिन्ना की मुस्लिम लीग की स्थापना 1906 में की गई थी।

लेकिन सवाल है कि देश विभाजन के एक साल के भीतर ही उसी नाम की दूसरी पार्टी बनाने का क्या मकसद रहा होगा। देश के बंटवारे के बाद पाकिस्तान में मुस्लिम लीग बड़ी राजनैतिक ताकत बन गई और शुरुआत में छह पाकिस्तानी प्रधानमंत्री मुस्लिम लीग के ही बने। पाकिस्तान के इतिहास में मुस्लिम लीग कई बार जुड़ी, टूटी और भंग हुई है।

1916 का लखनऊ समझौता
26 से 30 दिसंबर 1916 को चार दिन तक लखनऊ में कांग्रेस का अधिवेशन हुआ था। उदारवादी नेता अंबिका चरण मजमूदार के नेतृत्व में यह अधिवेशन हुआ, जिसमें कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच समझौता किया गया था। साम्प्रदायिक एकता, हिंदू-मुस्लिम एकता और फूट डालो-राज करो की नीति के खिलाफ मुस्लिम लीग और कांग्रेस ने हाथ मिलाया था, जिसे लखनऊ पैक्ट या समझौता कहा जाता है।

लेकिन जिस दल का आधार ही साम्प्रदायिक हो और मजहब के आधार पर देश के विभाजन के लिए पैदा हुआ हो वह इस पैक्ट से कबतक बंधा रहता। अवसरवादी मुस्लिम लीग ने जैसे ही असहयोग और खिलाफत आंदोलन का महौल बनने लगा इस समझौता को तोड़ दिया। इसके 30 साल बाद ही देश विभाजन की उनकी योजना परवान चढ़ने लगी।

राहुल की अमेरिका यात्रा की पोल
भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता मनीष शुक्ला ने राहुल गांधी की विदेश यात्रा की पोल खोल दी है, जिसे लेकर कांग्रेस प्रवक्ताओं को जबाव देते नहीं सूझ रहा है। मनीष शुक्ला ने एनआरआई रजिस्टे्रशन इंटरेक्शन वीद राहुल गांधी इन न्यू यार्क नाम से उस ऑनलाइन रजिस्टे्रशन फार्म को सार्वजनिक किया है, जिसमें राहुल गांधी की विदेश यात्रा के आयोजकों के नाम हैं।

इसमें मस्जिद अल वली वुडब्रीज के तंजीम अंसारी, नियाज खान, जावेद सैयद, हबीब सिदिकी, केंडाल पार्क के मीर कादरी, मोहम्मद असलाम, मिन्हाज खान, मस्जिद सदर सायरेवील ओल्डब्रीज के नजीर सैयद और अकील मोहम्मद शामिल है। ये सभी अमेरिका के विभिन्न स्थानों से मुस्लिम लीग के समर्थक हैं।