
मां-बेटी की तरह होना चाहिये सास-बहू का रिश्ता - योगेश शास्त्री
लखनऊ, देवे पहुनवा का गारी सुरति हमें प्यारी लगे..जब कलेवा का समय आया तो जनकजी ने यहां सुन्दर षटरस भोजन खिलाया गया और महिलाओं ने प्रभु श्रीराम को प्रेमपूर्ण गारी सुनाई । ‘‘बेटी ससुरे में रहिया तू चांद बनके. सेक्टर-’ए’ सीतापुर रोड़ योजना कालोनी में स्थित विश्वनाथ मन्दिर परिसर में चल रहे मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीरामकथा के छठे दिन कथाव्यास आचार्य योगेश शास्त्री ने बताया कि विदाई की सूचना मिलने पर कन्याओं को गोद में उठाकर मातायें उन्हें शिक्षा देती हैं कि ससुराल में सास-ससुर, गुरू और परिवार की भलीभांति सेवा करना व पति की इच्छानुसार कार्य करना ।
माता सीता की जनकपुर से विदाई का प्रसंग सुनाते हुये उन्होंने कहाकि जिस समय माता सीता की विदाई हो रही थी तो समस्त संसार के जीव व्याकुल हो उठे यहां तक पशु-पक्षी भी व्याकुल हो रहे थे । आचार्य योगेश शास्त्री ने कहाकि जनकराज से जब माता सीता मिलती है तो परम् विरागी होने के बाद भी जनकजी के आंखों से अश्रुधारा नहीं रूकती है। जिसके पश्चात् गणेश जी का ध्यान कर व दही का सगुन देख जब बारात विदा होकर अयोध्या की ओर चली तो देवताओं ने पुष्प वर्षा की।
जनकपुर से विदा होकर अयोध्या पहुंची बारात के नगर प्रवेश का वर्णन सुनाते हुये कथा व्यास आचार्य योगेश शास्त्री ने कहाकि जिस समय भगवान श्रीराम अयोध्या में प्रवेश करते हैं तो बारम्बार सीताराम की छवि को देखकर लोग अपने जीवन को धन्य मानते हुये जगत में आनन्दित हो रहे हैं।
उन्होंने बताया कि अयोध्या पहुंचने पर दशरथजी रानियों को उपदेश देते है कि बहु दूसरे घर की बेटी है इसलिये ससुराल में किसी प्रकार का कष्ट न हो। योगेश शास्त्री ने कहाकि यदि वर्तमान में भी सास-बहु का रिश्ता मां-बेटी की तरह हो जाये तो समाज की सारी समस्या दूर हो जायेगी।
Published on:
10 Dec 2019 01:03 pm
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