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Ram Mandir: रामनवमी को सूर्य की किरणें छूएंगी रामलला के ललाट को.. जाने क्या हैं विशेषताएं

Ram Mandir: ऐतिहासिक राम मंदिर निर्माण कार्य अब अपने अंतिम चरण में हैं और इसके उदघाटन की उल्टी गिनती लगभग शुरू हो चुकी है। नेपाल के काली नदी के प्राचीन पत्थर से रामलला की मूर्ति का निर्माण शुरू हो चुका है और मकर संक्रांति के बाद गर्भ गृह में स्थापना हो जाएगी। जानते हैं विस्तार से राममंदिर से जुड़ी कुछ विशेष बातें

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राममंदिर निर्माण अंतिम चरण में

अयोध्या में राममंदिर के गर्भगृह में स्थापित होने वाले भगवान राम की मूर्ति का निर्माण कार्य शुरू होने के साथ ही गर्भगृह का कार्य भी अंतिम चरण में हैं। जनवरी 2024 में बताया जाता है कि मकर संक्रांति के अवसर पर गर्भगृह में विग्रह की स्थापना कर दी जाएगी। 35 फीट की दूरी से भक्तों को रामलला के दर्शन होंगे।

सबसे बड़ी विशेषता है कि सूर्य घड़ी और ऋतु चक्र के अनुसार सूर्योदय से सूर्यास्त तक का ध्यान रखते हुए गर्भगृह का निर्माण ऐसे किया जा रहा है कि रामनवमी को सूर्यदेव की किरणें रामलला के ललाट को स्पर्श करेंगी। यह दिन विशेष होगा। इसके लिए खगोल विज्ञान और भौतिक विज्ञान के वैज्ञानिकों की एक टीम कार्य कर रही है। मूर्ति को भव्य और आकर्षक बनाने के लिए मूर्तिकारों का दल पहुंच कर निर्माण कार्य आरंभ कर चुका है।

पांच साल के बाल रुप में होंगे रामलला
अयोध्या पहुंचे मूर्तिकारों ने निर्माण का कार्य आरंभ कर दिया है। कलाकार भगवान राम के बाल स्वरुप को बना रहे हैं, गर्भगृह में स्थापित होने वाली मूर्ति भगवान के राम के पांच वर्ष की अवस्था को दिखाएगी। महाराष्ट्र के वासुदेव कामतानाथ ने वाल्मिकी कृत रामायण का अध्ययन करके भगवान राम के बाल रुप का चित्रांकन किया है। रामायण में जैसे बाल रुप का वर्णन किया गया है, ठीक वैसा ही चित्र बनाया गया है जिसे मूर्तिकार यर्थाथ में बनाने के लिए लगे हुए हैं।

यह भी विशेषताएं
- 8 एकड़ में बन रहा है राममंदिर
-57,400 वर्ग फीट में बन रहा है मंदिर का मुख्य भवन
-360 फीट है मंदिर की लंबाई और चौड़ाई 235 फीट
-आसमानी और ग्रे कलर के पत्थरों से तैयार हो रहा है 8 फीट ऊंची रामलला की प्रतिमा