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UP Election 2022: रामपुर का रण – सांसद होते हुए भी विधानसभा का चुनाव क्यों लड़ना चाहते हैं आजम

रामपुर हमेशा से आजम खान के लिए अपराजेय सीट रहा है। वो यहाँ से लगातार नौ बार विधायक रहे हैं। फिलहाल यहाँ उनकी पत्नी तंजीम फातिमा विधायक हैं। आजम खान अभी रामपुर से सांसद हैं लेकिन वह विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं तो इसके पीछे सिर्फ एक वजह है और उस वजह का नाम है आकाश सक्सेना। कौन हे ये आकाश सक्सेना? आजम खान से क्या है इनका कनेक्शन? आइये बताते हैं आपको

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UP Election 2022: सांसद होते हुए भी विधानसभा का चुनाव क्यों लडऩा चाहते हैं आजम

UP Election 2022: सांसद होते हुए भी विधानसभा का चुनाव क्यों लडऩा चाहते हैं आजम

UP Election 2022: आजम खाँ और रामपुर विधानसभा का आपस में गहरा नाता है। और हो भी क्यों न, आखिर आजम खान के लिए यह सीट अपराजेय रही है और वो यहाँ से लगातार नौ बार विधायक रहे हैं। फिलहाल यहाँ उनकी पत्नी तंजीम फातिमा विधायक हैं। आजम खान अभी रामपुर से सांसद हैं लेकिन वह विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं तो इसके पीछे सिर्फ एक वजह है और उस वजह का नाम है आकाश सक्सेना। आखिर क्यों आजम खान जैसी शख्सियत एक आकाश सक्सेना के लिए सांसदी छोड़ विधायकी का चुनाव लड़ना चाहता है। कौन हे ये आकाश सक्सेना? आजम खान से क्या है इनका कनेक्शन? आखिर क्यों योगी सरकार ने आकाश सक्सेना को वाई कैटगरी की सुरक्षा प्रदान कर रखी है? आकाश सक्सेना का बीजेपी और आरएसएस से क्या सबंध है? आइये बताते हैं आपको कि आख़िर क्या है पूरा मामला।

आकाश की वजह से आज़म परिवार को खानी पड़ी जेल की हवा

आकाश सक्सेना वह शख्स हैं जिन्होंने न केवल आजम खान बल्कि उनके बेटे और उनकी पत्नी का कैरियर तबाह कर दिया। आकाश सक्सेना की वजह से ही परिवार को जेल की हवा खानी पड़ी और आजम खान अभी तक सलाखों के पीछे हैं। कहा जाता है कि आकाश ने आजम परिवार के खिलाफ 100 से ज्यादा मामले दर्ज कराये हैं। और यही आकाश अब आकाश पर छा जाने को बेताब हैं और चुनाव मैदान में बीजेपी के उम्मीदवार हैं।

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आकाश की आरएसएस की है पृष्ठभूमि

आरएसएस की पृष्ठभूमि वाले आकाश के क्षितिज को ही कम करने के लिए आजम खान फिर से चुनाव लड़ना चाहते हैं। वह नहीं चाहते कि आकाश की कायनात इतनी विस्तृत हो जाए कि जिसे समेटना आजम खान के लिए भारी पड़ जाये। फिर रामपुर सदर ही क्यों स्वार टाँडा की सीट भी आजम फेमिली के लिए कम महत्वपूर्ण नहीं है। स्वार टाँडा से पहली बार विधायक बने अब्दुल्ला के घेरेबंदी के लिए बीजेपी ने इस बार यहाँ अपने गठबंधन प्रत्याशी अपना दल से यूसुफ अली को टिकट देने का मन बनाया है।

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आजम के लिए जीत ज़रूरी

रामपुर सदर और स्वार टाँडा की सीट अगर उनके हाथ से निकल गयी तो राजनीति की डोर भी उनके हाथ से दूर चली जाएगी। रामपुर का चुनावी रण, आजम परिवार की प्रतिष्ठा से जुड़ा है और आजम को अपनी प्रतिष्ठा कायम रखनी है तो ये दोनों सीटें अपने पास ही रखनी होगी।

सीट बँटवारे पर अखिलेश से नाराज आजम

सूत्रों के मुताबिक जेल में बंद आजम खान ने अपने 12 समर्थकों के लिए टिकट चाहते थे। लेकिन अखिलेश यादव ने तैयार नहीं हुए जिससे आज़म खान नाराज़ हो गये हैं।

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आजम परिवार पर मुसीबत

रामपुर का सियासी गणित

2017 विधानसभा का चुनावी आँकड़ा

जातीय समीकरण