उत्तरप्रदेश के ग्रामीण इलाकों में ज्यादातर महिलाएं मूंज से मौनी, सेनी, डलवा आदि बनाती थीं लेकिन समय के साथ ये कला सिमटती गयी। प्लास्टिक के डिब्बे और बर्तनों ने मूंज को पीछे कर दिया। ऐसे में मूंज का सामान बनाने के लिए महिलाओं को प्रेरित करने में बहुत मुश्किलें आयीं। लेकिन, इलाहाबाद, देवरिया, भदोही और लखीमपुर में महिलाओं के छोटे-छोटे ग्रुप बनाए गए। यहां महिलाएं मूंज के इको फ्रेंडली यूटिलिटी बॉक्स, फ्रूट बाउल, रोटी सर्वर, कोस्टर सेट, टेबल मैट, कटलरी स्टैण्ड, पेन स्टैण्ड, फ्लावर वास, ट्रे, घड़ा, डस्टबिन, वॉल हैंगिंग आदि की खूब मांग है। शुरुआत में वाराणसी व चित्रकूट के लकड़ी के बने 2 खिलौनों की डिमांड आई। आज खिलौनों की कैटेगरी में 50 से ज्यादा प्रोडक्ट शामिल हैं। होम डेकोर कैटेगरी में हैण्डमेड व हैंण्डपेंटेड वुडेन कर्टेन हैंगिंग, विंड चाइम, कार हैंगिंग, की रिंग, पेन्सिल कैप, फोटो फ्रेम, वुडेन पेन,वुड कार्विंग लालटेन, डिब्बे, धार्मिक मूर्तियां, नाव बॉक्स आदि की विदेशों में भी डिमांड है।