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‘दंगामुक्त और गुंडामुक्त उत्तर प्रदेश की पहचान’, सीएम योगी बोले- कानून व्यवस्था ने पेश की मिसाल

सीएम योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को गोरखपुर दौरे के दौरान बड़ी सौगात दी। उन्होंने 26वीं वाहिनी पीएसी परिसर में 11 मंजिला बैरक टॉवर और 30 बेड के हॉस्पिटल का लोकार्पण किया।

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लखनऊ

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Aman Pandey

Jul 25, 2025

सीएम योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को गोरखपुर दौरे के दौरान बड़ी सौगात दी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि जो उत्तर प्रदेश आठ वर्ष पहले तक दंगा प्रदेश के रूप में बदनाम था, गुंडों-माफिया से तबाह था, वही उत्तर प्रदेश आज कानून व्यवस्था का मानक पेश कर रहा है। दंगामुक्त और गुंडामुक्त उत्तर प्रदेश आज अनुशासित और उत्सव प्रदेश की पहचान के साथ आगे बढ़ रहा है।

आज यूपी के नौजवानों को मिलता है सम्मान

मुख्यमंत्री योगी ने आगे कहा कि आज कोई भी बाहरी व्यक्ति कानून व्यवस्था के मामले में यूपी पर हंस नहीं सकता, उंगली नहीं उठा सकता। यूपी का नौजवान आज कहीं भी जाता है तो सम्मान पाता है, जबकि आठ वर्ष पहले यहां के नौजवान को यूपी के नाम पर एक कमरा तक नहीं मिलता था। यूपी के नाम पर बाहरी लोगों के सामने डरावना दृश्य होता था। आज इन सबसे उबरकर नए भारत का नया उत्तर प्रदेश कानून व्यवस्था की नजीर प्रस्तुत करने वाला राज्य बन गया है।

'सिविल पुलिस की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण'

सीएम योगी ने आगे कहा कि सेना देश की बाह्म सुरक्षा का दायित्व संभालती है, तो आंतरिक मामलों और कानून व्यवस्था के लिए सिविल पुलिस की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। देश के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश की पुलिस, लगातार पुलिसकर्मियों की कमी और अवस्थापना सुविधाओं की चुनौतियों से जूझ रही थी। आठ साल पहले यहां शांति की कल्पना तक नहीं की जा सकती थी, यह सपना था। तब पुलिस के लाखों पद खाली थे, लेकिन नीयत सही न होने से तत्कालीन सरकारें पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाती थीं।

आठ साल के दौरान 2 लाख 16 हजार भर्तियां

उन्होंने आगे कहा कि कभी भर्ती में खामी तो कभी बेईमानी और भ्रष्टाचार के चलते कोर्ट से रोक लग जाने के चलते नौजवान भटकने को मजबूर थे। वहीं, हमारी सरकार के आठ साल के दौरान 2 लाख 16 हजार भर्तियां यूपी पुलिस में की गई हैं, इसमें न सिफारिश की गुंजाइश थी और न ही भ्रष्टाचार की। इन भर्तियों में हाल ही में हुई दुनिया की सबसे बड़ी 60,244 पुलिसकर्मियों की भर्ती भी शामिल है। आठ साल पहले उत्तर प्रदेश में पुलिसकर्मियों के प्रशिक्षण की क्षमता सिर्फ तीन हजार की थी, जबकि आज यह कई गुना बढ़ गई है। आज 60 हजार से अधिक प्रशिक्षु प्रदेश के 112 प्रशिक्षण केंद्रों पर एकसाथ प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।