लखनऊ। लखनऊ सीएमओ के पुनर्नियोजन को लेकर स्वास्थ्य विभाग में अंदरखाने विरोध तो हो रहा था कि लेकिन कोई खुलकर इसका विरोध करना नहीं चाह रहा था। लेकिन अब मंडलीय कार्यलय में कार्यरत डॉ. जितेन्द्र माहेश्वरी ने सीएमओ डॉ. एसएनएस यादव के पुनर्नियोजन के खिलाफ कोर्ट में याचिक दायर की है। याचिका में उच्च न्यायालय में लंबित, एसबी 983 -2015 केस को आधार बनाया गया है।
रिट दायरकर्ता डॉ.महेश्वरी ने बताया कि शासन द्वारा सेवानिवृत्ति उपरांत सेवाविस्तार दिये जाने के मामले में उच्च न्यायालय में केस एस बी 983 -2015 लंबित है। उक्त केस के उपरांत ही सेवाविस्तार प्राप्त तत्कालीन अधिकारियों में बलरामपुर अस्पताल निदेशक डॉ.टीपी सिंह, लोहिया अस्पताल के सीएमएस डॉ.आर सी अग्रवाल एवं सिविल अस्पताल के डॉ.एस के हसन का सेवाविस्तार निलंबन किया गया था।
केस में न्यायालय ने निर्णय नहीं सुनाया है, इसके बावजूद शासन ने न्यायालय की प्रक्रिया को नजरअंदाज करते डॉ. यादव को नियमविरूद्ध पुननिर्योजन एवं सीएमओ पदभार दे दिया है। ज्ञातव्य हो कि गत 30 जून को डॉ.एस एन एस यादव सेवानिवृत्त हो गये थे, शासन द्वारा उन्हें अगले छह माह के लिए पुननिर्योजित कर सीएमओ पद पर कार्य करने का अधिकार दिया गया है।
डॉ.महेश्वरी का कहना है कि डॉ.यादव के पुननिर्याेजन की वजह से वरिष्ठता क्रम में सीएमओ पद पर तैनाती का इंतजार कर रहें चिकित्सकों के अधिकारों का हनन हो रहा है। उन्होंने कहा कि शासन द्वारा एक ही अधिकारी को सेवाविस्तार देने से विभागीय चिकित्सकों में कुंठा व्याप्त होती है, वजह सीएमओ पद के लिए वरिष्ठता क्रम एवं अन्य औपचारिकताएं पूर्ण करने वाले चिकित्सकों को इंतजार कुंठा में बदल जाता है। क्योंकि सेवाविस्तार अवधि में ही पद पर नियुक्ति का अधिकार रखने वाले कई चिकित्सक बिना पदलाभ लिये ही सेवानिवृत्त हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि वह स्वयं, डॉ.एसएनएस यादव से वरिष्ठ है, डॉ.यादव की भांति ही अन्य सेवानिवृत्त चिकित्सकों को भी अवसर मिलना चाहिये।