
प्रथम चरण 16 जुलाई, द्वितीय चरण 13 अगस्त एवं तृतीय चरण 10 सितम्बर को बताए गए। प्रत्येक चरण टीकाकरण सत्र 7 कार्यदिवस का होगा..
लखनऊ. डायरिया से हर साल बड़ी संख्या में बच्चों की होने वाली मौतों की संख्या पर रोकथाम के मकसद से उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश में रोटा वायरस वैक्सीन को नियमित टीकाकरण अभियान में शामिल करने जा रही है। जुलाई महीने से प्रदेश में इस वैक्सीन को नियमित टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल कर लिया जाएगा। टीकाकरण को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शुरू कर दिया है।
दस राज्यों में दिया जा रहा है रोटा वायरस वैक्सीन
उत्तर प्रदेश से पहले भारत सरकार ने नियमित टीकाकरण कार्यक्रम में रोटावायरस वैक्सीन को देश में चरणबद्ध तरीके से शामिल किया है और अब तक रोटावायरस वैक्सीन को देश के 10 राज्यों - हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, आंध्रप्रदेश, ओडिशा, असम, राजस्थान, मध्यप्रदेश, तमिलनाडु, त्रिपुरा और झारखंड में लागू किया जा चुका है। अब जल्द ही उत्तर प्रदेश में भी टीकाकरण सत्रों के माध्यम से बच्चों को यह वैक्सीन दी जाने लगेगी।
3 से 7 दिनों तक रहता है असर
रोटावायरस एक अत्यधिक संक्रामक वायरस है। यह बच्चों में दस्त पैदा करने का सबसे बड़ा कारण है जिसके कारण बच्चे को अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ सकता है या बच्चे की मृत्यु भी हो सकती है। रोटावायरस संक्रमण की शुरुआत हल्के दस्त से होती है, जो आगे जाकर गंभीर रूप ले सकता है। पर्याप्त इलाज न मिलने के कारण शरीर में पानी व नमक की कमी हो सकती है तथा कुछ मामलों में बच्चे की मृत्यु भी हो सकती है। रोटावायरस संक्रमण में गंभीर दस्त के साथ-साथ बुखार और उल्टियाँ भी होती हैं और कभी-कभी पेट में दर्द भी होता है। दस्त एवं अन्य लक्षण लगभग 3 से 7 दिनों तक रहते हैं।
बच्चों की सबसे अधिक मौतें डायरिया से
भारत में बच्चों की होने वाली कुल मौतों में से सबसे अधिक मौतें डायरिया के कारण होती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार भारत में 5 वर्ष तक के बच्चों की होने वाली मौतों में 10 प्रतिशत मौतें डायरिया के कारण होती हैं। भारत में लगभग 1 लाख 20 हजार बच्चे प्रतिवर्ष डायरिया से मर रहे हैं। भारत में जो बच्चे दस्त के कारण अस्पताल में भर्ती होते हैं उनमें से 40 प्रतिशत बच्चे रोटावायरस संक्रमण से ग्रसित होते हैं। यही कारण है कि भारत में लगभग 32 लाख 70 हजार बच्चे अस्पताल की ओपीडी में आते हैं जिसमें से लगभग 8 लाख 72 हजार बच्चे अस्पताल में भर्ती किये जाते हैं तथा प्रतिवर्ष 78 हजार बच्चों की मौत हो जाती है जिनमें से 59 हजार मौत ऐसे बच्चों की होती है जिनकी उम्र मात्र दो वर्ष ही होती है। यानि कि 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में रोटावायरस होने का खतरा अधिक रहता है।
जुलाई में शुरू हो जाएगा टीकाकरण
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ एस के रावत ने बताया कि रोटावायरस वैक्सीन को नियमित टीकाकरण कार्यक्रम में लागू किये जाने के सम्बन्ध में राज्य स्तर पर प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जिसमें जिले से तीन लोगों को प्रशिक्षित किया गया है। जल्द ही जिले स्तर पर प्रशिक्षण एवं इसके बाद ब्लाक स्तर पर प्रशिक्षण दिया जायेगा। उन्होंने बताया कि बच्चों को रोटावायरस वैक्सीन की पांच बूंदे जन्म के 6, 10 और 14 हफ्ते की आयु पर पिलाई जायेंगी।
Published on:
17 Jun 2018 01:38 pm
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