12 अप्रैल 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

यूपी में बढ़ते क्राइम को लेकर सरकार-विपक्ष आमने-सामने, बोले अखिलेश – अपराधियों के हाथ का खिलौना बन गई सरकार

अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार अपराधियों के हाथों का खिलौना बन गई है।

2 min read
Google source verification
yogi adityanath

लखनऊ. उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर हमला बोलते हुए पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने कहा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में लगातार आपराधिक घटनाएं हो रही हैं और सरकार फर्जी मुठभेड़ कर लोगों का ध्यान भटकाने में व्यस्त है। अखिलेश यादव ने ट्वीट कर लिखा कि इलाहाबाद में एक वक़ील की सरेआम हत्या, प्रदेश में ध्वस्त क़ानून-व्यवस्था का सबूत है। इस सरकार ने प्रदेश को रक़्तरंजित कर दिया है। प्रदेश की जनता भय के माहौल में घुटन महसूस कर रही है और इस सरकार से मुक्ति के लिए छटपटा रही है। सरकार अपराधियों के हाथ का खिलौना बन गयी है।

एनकाउंटर के सहारे क्राइम कंट्रोल का दावा

सपा के आरोपों से अलग भारतीय जनता पार्टी की सरकार लगातार यह दावा करती रही है कि प्रदेश से अपराधी तत्वों का पलायन हो रहा है। एनकाउंटर में बदमाश मारे जा रहे हैं। सरकार दावा कर रही है कि 1100 से अधिक मुठभेड़ों में 50 से अधिक खूंखार बदमाश मारे जा चुके हैं। सरकार का दावा है कि इन मुठभेड़ों के कारण प्रदेश में आपराधिक घटनाओं में कमी आई है। भारतीय जनता पार्टी भले ही बेहतर कानून-व्यवस्था के दावे करे लेकिन पिछले कुछ दिनों में हुई आपराधिक घटनाओं के कारण विपक्षी दलों को सरकार पर हमला बोलने का मौका मिल गया है।

विपक्ष के निशाने पर सरकार

तुलनात्मक रूप से देखें तो योगी सरकार के अस्तित्व में आने के बाद वर्ष 2017 के शुरुआती 100 दिनों में प्रदेश में कुल 22,298 मुकदमे पंजीकृत हुए। यह आंकड़ा 19 मार्च 2017 से 26 जून 2017 के बीच का है। इसके उलट अखिलेश सरकार के आखिरी 100 दिनों में पूरे प्रदेश में 27,067 मुकदमे पंजीकृत हुए। यह आंकड़ा 9 दिसंबर 2016 से 18 मार्च 2017 के बीच का है। संख्या के लिहाज से भले ही योगी सरकार के कार्यकाल में घटनाओं की संख्या कम दिखाई दे रही हो लेकिन जानकर मानते हैं कि कानून-व्यवस्था की तुलना का यह एकमात्र पैमाना नहीं हो सकता। पिछले कुछ समय से प्रदेश में घटित बड़ी घटनाओं के बाद यूपी सरकार विपक्षी दलों के निशाने पर हैं।