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उत्तर प्रदेश के हर गांव में शुरू होगी ‘संस्कार पाठशाला’, फर्राटेदार अंग्रेजी के साथ बच्चे पढ़ेंगे संस्कृत के श्लोक

बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ अपनी संस्कृति और संस्कार की भी जानकारी मिले, इसके लिए प्रदेश सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है।

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उत्तर प्रदेश के हर गांव में शुरू होगी 'संस्कार पाठशाला', फर्राटेदार अंग्रेजी के साथ बच्चे पढ़ेंगे संस्कृत के श्लोक

उत्तर प्रदेश के हर गांव में शुरू होगी 'संस्कार पाठशाला', फर्राटेदार अंग्रेजी के साथ बच्चे पढ़ेंगे संस्कृत के श्लोक

लखनऊ. बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ अपनी संस्कृति और संस्कार की भी जानकारी मिले, इसके लिए प्रदेश सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। राजधानी लखनऊ समेत उत्तर प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में बच्चों को संस्कार और संस्कृति की जानकारी देने के लिए अलग से पाठशालाएं खोली जाएंगी। इस पाठशाला का नाम होगा 'चुन्नू-मुन्नू संस्कार पाठशालाएं'। यहां फर्राटेदार अंग्रेजी के साथ ही बच्चों को संस्कृत बोलना सिखाया जाएगा। इसके साथ ही बच्चों को संस्कारों का ज्ञान भी दिया जाएगा जिसमें उन्हें माता पिता का चरण स्पर्श, धरती मां को प्रणाम करना सहित कई महत्वपूर्ण बातों का ज्ञान दिया जाएगा। इसकी आवेदन प्रक्रिया अगले महीने से शुरू होगी।

बच्चे पढ़ेंगे संस्कृत के श्लोक

उप्र संस्कृत संस्थानम् की ओर से जिले स्तर पर संस्कृत प्रशिक्षण केंद्र खोलने की तैयारी के बीच अब हर ग्राम पंचायत में बच्चों के लिए संस्कार की पाठशाला खोलने की कवायद शुरू हो गई है। संस्कार पाठशाला में कक्षा पांच के नीचे पढ़ने वाले बच्चों को पढ़ाया जाएगा। उन्हें संस्कृत भाषा में मंत्रोच्चारण के साथ ही नैतिक शिक्षा और संस्कारों के बारे में पढ़ाया जाएगा। संस्कृत में श्लोकों को सिखाने और उनके महत्व के बारे में भी बच्चों को बताया जाएगा।

गांव की छात्राएं होंगी प्रशिक्षित

संस्कार पाठशाला में गांव की इंटर पास छात्राओं को प्रशिक्षित किया जाएगा। ये छात्राएं उसी ग्राम पंचायत में रहकर पंचायत भवन, ग्रामीण सचिवालय या फिर किसी भी सार्वजनिक स्थल पर केंद्र चलाएंगी। करीब दो घंटे तक कक्षाएं चलेंगी। उप्र संस्कृत संस्थान की ओर से प्रदेश के सभी 817 ब्लॉकों और 58,909 ग्राम पंचायतों की इंटर पास छात्राओं का चयन किया जा चुका है।

उप्र संस्कृत संस्थानम् के अध्यक्ष डॉ.वाचस्पति मिश्र के मुताबिक, प्रदेश सरकार की पहल पर उप्र संस्कृत संस्थानम् की ओर से सभी ग्राम पंचायतों में 'चुन्नू-मुन्नू संस्कार पाठशालाएं' खोली लाएगी। यहां बच्चों को संस्कृत के ज्ञान के साथ ही नैतिक संस्कारों के बारे में बताया जाएगा। अंग्रेजी के साथ बच्चों को संस्कृत में बोलना सिखाया जाएगा। पाठशाला में बच्चों को आकर्षित करने के लिए उन्हें टॉफी, बिस्किट व फल सहित अन्य चीजें भी दी जाएंगी।

आंगनबाड़ी स्कूलों की तरह होगा इंफ्रास्ट्रक्चर

वाचस्पति मिश्र ने कहा कि संस्कार पाठशाला का बुनियादी ढांचा शिक्षा केंद्र आंगनवाड़ी स्कूलों की तरह होंगा जिन्हें किसी अलग बुनियादी ढांचे की आवश्यकता नहीं होगी। शिक्षक बच्चों को मंदिर या पंचायत भवन जैसी किसी भी जगह पर पढ़ा सकते हैं। बच्चों को बिलकुल वैसी ही शिक्षा दी जाएगी जैसी कि प्लेस्कूल में दी जाती है।

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