अंधाधुंध विकास के नाम पर पृथ्वी और प्रकृति से होने वाली छेड़छाड़ की परिणिति हमें ग्लोबल वार्मिंग, भूकंप और सुनामी के रूप में देखने को मिलती है। इसलिए जरूरी है कि हम समय रहते चेत जाएं और पृथ्वी को बचाएं। आज पृथ्वी दिवस पर पृथ्वी के प्राकृतिक वातावरण के प्रति संवेदनशील बनने का संकल्प लें। धरती बचाने के लिए आइए जुड़िए पत्रिका की इस मुहिम से
लखनऊ.बढ़ते प्रदूषण की समस्या से प्रदेश सरकार ही नहीं बल्कि पूरा विश्व समुदाय पीड़ित है। इस संकट से मुक्ति के लिए अनेक प्रकार से पहल भी की जा रही है। इनमें पौधरोपण को सर्वमान्य हल के रूप में स्वीकार कर वनों के सघनीकरण तथा अधिकाधिक पौधरोपण किए जाने का कार्यक्रम प्रत्येक वर्ष किया जाता रहा है। इसके इतर वनों की सुरक्षा रामभरोसे होने से वन सघन की जगह विरल होते चले जा रहे हैं। कटाई से जहां एक ओर पेड़ों का सफाया हो रहा है तो दूसरी ओर खाली वन भूमि मैदान साबित हो रहे हैं। लोग कब्जे की होड़ में आपस में मारपीट तक करने से परहेज नहीं कर रहे हैं, जो मजबूत पड़ रहा उसका कब्जा कायम हो रहा है तथा वनभूमि सिमटती जा रही है। अब वह कटाई कर्ताओं की शरणस्थली बन चुका है। कटाई के कारण इस वन क्षेत्र से साखू के पेड़ समाप्ति की ओर हैं।
दूसरी तरफ रिटायर्ड पौधे विज्ञान डॉ. आरएन मिश्रा उत्तर प्रदेश में घटे वन क्षेत्र घटने की सबसे बड़ी वजह शहरों का विस्तार है छोटे शहर बड़े हो रहे है ,कस्बे शहर बन रहे है पहले खेती के लिए पेड़ कट रहे थे लेकिन अब निर्मणों के लिए कटाई की जा रही है।