
बुलडोजर कार्रवाई (फाइल फोटो)
Bulldozer Action: प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अवैध निर्माणों को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद राजधानी में खलबली मच गई है। अलीगंज अग्निकांड के बाद शीर्ष अदालत के निर्देशों पर लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने 51 अवैध भवनों की सूची तैयार की है। इनमें पूर्व राज्यपाल, पूर्व कैबिनेट मंत्री समेत कई वीवीआईपी की संपत्तियां भी शामिल बताई जा रही हैं। अब सवाल उठ रहा है कि क्या इन प्रभावशाली लोगों के भवनों पर भी बुलडोजर चलेगा?
सूत्रों के अनुसार, चिह्नित 51 भवनों में एक पूर्व राज्यपाल और एक पूर्व कैबिनेट मंत्री से जुड़े तीन-तीन भवन जांच के दायरे में हैं। एक राज्य मंत्री से जुड़ा भवन भी अवैध निर्माण की श्रेणी में है। इसके अलावा विधायक, बड़े कारोबारी और वरिष्ठ अधिवक्ताओं से जुड़े भवन भी सूची में शामिल हैं। एलडीए ने प्रत्येक भवन की मंजिलों की संख्या, निर्माण की अवधि, उस समय तैनात अधिकारियों के नाम, की गई कार्रवाई और कार्रवाई न होने के कारणों का विस्तृत रिकॉर्ड तैयार कर लिया है।
सुप्रीम कोर्ट के न्याय मित्र इस महीने लखनऊ पहुंचकर इन अवैध भवनों का निरीक्षण करेंगे। वे अपनी स्वतंत्र रिपोर्ट अदालत को सौंपेंगे। मामले की अगली सुनवाई सितंबर के मध्य प्रस्तावित है। इससे पहले एसआईटी भी अपनी रिपोर्ट दाखिल करेगी, जिसमें लापरवाह अधिकारियों के नाम शामिल किए जा सकते हैं।
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और आर. महादेवन की पीठ ने दिल्ली, पटना और लखनऊ समेत कई शहरों में अवैध निर्माणों व रिहायशी इलाकों में चल रही वाणिज्यिक गतिविधियों पर युद्ध स्तर पर कार्रवाई का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि दिल्ली के होटल और लखनऊ के कोचिंग सेंटर में लगी आग से बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई। पहले से जताई जा रही आशंका गलत नहीं साबित हुई।
एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने अदालत को बताया कि 51 संपत्तियों पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इसे बिना देरी के पूरा किया जाएगा। पूरे अधिकार क्षेत्र में फॉलोअप तीन सप्ताह में समाप्त करने का दावा किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने एलडीए को दिल्ली की तर्ज पर सर्वे का भी आदेश दिया है।
Updated on:
12 Aug 2026 04:35 pm
Published on:
12 Aug 2026 04:34 pm
