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रिश्वत के ट्रैप से आय से अधिक संपत्ति तक पहुंचा मामला, IRCTC के पूर्व अफसर को 3 साल की सजा

Crime News: लखनऊ की CBI कोर्ट ने IRCTC के पूर्व चीफ रीजनल मैनेजर कृष्ण मोहन त्रिपाठी को आय से अधिक संपत्ति के मामले में दोषी ठहराते हुए तीन साल की जेल और 14.75 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
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लखनऊ

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Harshul Mehra

Aug 11, 2026

Haryana Financial Scam Crime

504 करोड़ के घोटाले में CBI का बड़ा एक्शन (Photo: IANS/File)

Crime News: आय से अधिक संपत्ति (DA) के मामले में लखनऊ की CBI अदालत ने IRCTC के एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी को दोषी ठहराते हुए 3 साल की जेल की सजा सुनाई है। कोर्ट ने दोषी पर 14.75 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यह मामला अपनी ज्ञात आय के स्रोतों से अधिक संपत्ति रखने से जुड़ा है।

IRCTC के तत्कालीन चीफ रीजनल मैनेजर को सजा

लखनऊ की CBI अदालत ने सोमवार को IRCTC के लखनऊ रीजनल ऑफिस के तत्कालीन चीफ रीजनल मैनेजर कृष्ण मोहन त्रिपाठी को आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति रखने का दोषी पाया।अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान पेश किए गए सबूतों की जांच के बाद उन्हें दोषी ठहराया और तीन साल की जेल के साथ 14.75 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।

2009 के ट्रैप ऑपरेशन से जुड़ा मामला

यह मामला 31 अक्टूबर 2009 को किए गए एक ट्रैप ऑपरेशन से जुड़ा है। CBI के मुताबिक, इस कार्रवाई के दौरान त्रिपाठी को कथित तौर पर 70,000 रुपये की अवैध रिश्वत मांगते और लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया था। ट्रैप ऑपरेशन के बाद हुई जांच में CBI को ऐसे सबूत मिले, जिनसे कथित तौर पर पता चला कि त्रिपाठी ने अपनी ज्ञात आय के स्रोतों से अधिक संपत्ति जमा की थी।

2010 में दर्ज हुआ था आय से अधिक संपत्ति का केस

CBI ने इस मामले में 24 फरवरी 2010 को आय से अधिक संपत्ति का केस दर्ज किया था। जांच पूरी करने के बाद एजेंसी ने 13 दिसंबर 2011 को कृष्ण मोहन त्रिपाठी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। इसके बाद मामले की सुनवाई अदालत में चली, जहां अभियोजन पक्ष ने आय से अधिक संपत्ति से जुड़े आरोपों को साबित करने के लिए सबूत पेश किए।

1.44 करोड़ रुपये की आय से अधिक संपत्ति का दावा

ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत में साबित किया कि त्रिपाठी के पास करीब 1.44 करोड़ रुपये की आय से अधिक संपत्ति थी। जांच में यह संपत्ति उनकी संबंधित अवधि के दौरान कुल ज्ञात आय से 102.53 प्रतिशत अधिक पाई गई। ट्रायल के दौरान पेश किए गए सबूतों की जांच के बाद अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया और सजा सुनाई।

सरकारी कर्मचारियों पर DA मामलों में कार्रवाई

यह सजा ऐसे समय में आई है जब CBI उन सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही है, जिन पर अपनी वैध या ज्ञात आय के स्रोतों से अधिक संपत्ति जमा करने का आरोप है।

अहमदाबाद में पूर्व ESIC इंस्पेक्टर को भी सजा

पिछले साल जनवरी में अहमदाबाद की एक CBI अदालत ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में एम्प्लॉइज स्टेट इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन (ESIC) के पूर्व इंस्पेक्टर अनिल कुमार सिंह को 3 साल की कठोर कैद और 20 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। एजेंसी ने आरोप लगाया था कि अनिल कुमार सिंह के पास उनकी ज्ञात आय के स्रोतों से 314 प्रतिशत अधिक संपत्ति थी।

2026 में भी दर्ज हुआ आय से अधिक संपत्ति का नया केस

CBI मौजूदा अधिकारियों के खिलाफ भी आय से अधिक संपत्ति के नए मामले दर्ज कर रही है। फरवरी 2026 में एजेंसी ने पांडिचेरी यूनिवर्सिटी के डिप्टी रजिस्ट्रार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया था। उन पर आरोप है कि करीब ढाई साल की अवधि में उन्होंने लगभग 54 लाख रुपये की ऐसी संपत्ति जमा की, जो उनकी ज्ञात आय के स्रोतों से अधिक थी।

IRCTC के पूर्व अधिकारी कृष्ण मोहन त्रिपाठी को मिली सजा इसी तरह के आय से अधिक संपत्ति मामलों में सीबीआई की कार्रवाई और अदालतों के फैसलों की कड़ी में सामने आई है।