
छात्रों और Gen-Z के आंदोलनों को लेकर बयान देतीं बसपा प्रमुख मायावती (फोटो सोर्स : भाषा संवाद WhatsApp News Group)
Mayawati attacks BJP and Congress: बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख एवं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने मंगलवार को छात्रों और Gen-Z से जुड़े आंदोलनों को लेकर विपक्षी राजनीतिक दलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों और नौजवानों की समस्याओं को लेकर शुरू होने वाले आंदोलनों को राजनीतिक दल अपने हित में इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं। मायावती ने युवाओं से अपील की कि वे अपने मुद्दों और अधिकारों के लिए चल रहे आंदोलनों को किसी भी राजनीतिक दल के स्वार्थ का माध्यम न बनने दें। छात्र आंदोलनों के राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप
मायावती ने दिल्ली और रांची में हाल के छात्र एवं युवा आंदोलनों का जिक्र करते हुए कहा कि युवाओं के वास्तविक मुद्दों को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की जा रही है। उनके मुताबिक छात्रों और Gen-Z को अपने भविष्य, रोजगार और शिक्षा से जुड़े सवालों पर लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठानी चाहिए, लेकिन राजनीतिक दलों को उनके आंदोलनों को अपने राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। बसपा प्रमुख ने सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों से युवाओं को सावधान रहने की अपील की। उनका कहना था कि राजनीतिक दल अक्सर युवाओं की नाराजगी और उनके मुद्दों को अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने युवाओं से अपने आंदोलन की दिशा और उद्देश्य को लेकर सजग रहने को कहा।
मायावती ने अपने बयान में दिल्ली और रांची में चल रहे छात्र आंदोलनों का उदाहरण दिया। रांची में जेपीएससी और जेएसएससी समेत विभिन्न भर्ती और परीक्षा संबंधी मुद्दों को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन चल रहा है। वहीं दिल्ली में भी छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन हुए हैं। इन आंदोलनों के बीच राजनीतिक दलों की सक्रियता को लेकर बहस तेज हुई है। मायावती ने इसी संदर्भ में कहा कि छात्रों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता होना चाहिए। उनका कहना है कि युवाओं के आंदोलन का उद्देश्य रोजगार, भर्ती प्रक्रिया और भविष्य से जुड़े सवालों का समाधान हासिल करना होना चाहिए, न कि उसे राजनीतिक संघर्ष का हिस्सा बना देना।
बसपा प्रमुख ने उत्तर प्रदेश में अपनी सरकारों के दौरान रोजगार और सरकारी भर्तियों के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने युवाओं के भविष्य को लेकर सरकारों की जिम्मेदारी पर जोर देते हुए कहा कि रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना और सरकारी भर्ती प्रक्रिया को प्रभावी एवं पारदर्शी बनाना जरूरी है। मायावती ने कहा कि युवा किसी भी प्रदेश की सबसे बड़ी ताकत होते हैं। यदि उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, रोजगार और आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर मिलते हैं तो इसका सीधा लाभ समाज और अर्थव्यवस्था को होता है। वहीं बेरोजगारी और भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी समस्याएं युवाओं में असंतोष पैदा कर सकती हैं।
मायावती का यह बयान ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दल अपनी तैयारियों को गति दे रहे हैं। बसपा भी संगठन को मजबूत करने और युवाओं समेत विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ बढ़ाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में छात्रों, युवाओं, रोजगार और सरकारी भर्ती जैसे मुद्दों पर मायावती का जोर राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बसपा लंबे समय से सामाजिक न्याय और कमजोर वर्गों के अधिकारों के मुद्दे उठाती रही है। अब युवाओं से जुड़े रोजगार और भर्ती के सवालों को लेकर पार्टी नेतृत्व की सक्रियता आने वाले चुनावी माहौल में पार्टी की रणनीति का हिस्सा भी मानी जा रही है।
मायावती ने खासतौर पर Gen-Z और छात्रों से अपील की कि वे अपने अधिकारों और भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर जागरूक रहें। उन्होंने युवाओं को किसी भी राजनीतिक दल के प्रभाव में आकर अपने मूल मुद्दों से भटकने से बचने की सलाह दी। उनका संदेश यह रहा कि छात्र और युवा अपने आंदोलनों को शांतिपूर्ण एवं मुद्दा आधारित रखें और राजनीतिक दलों की भूमिका को लेकर सतर्क रहें। मायावती के इस बयान से साफ है कि बसपा आने वाले समय में युवाओं के मुद्दों को राजनीतिक विमर्श के केंद्र में लाने की कोशिश करेगी।
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन रोजगार, भर्ती, शिक्षा और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दे लगातार राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बन रहे हैं। विभिन्न राज्यों में छात्र आंदोलनों और भर्ती संबंधी प्रदर्शनों ने भी इन मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया है।
ऐसे माहौल में मायावती का बयान बसपा की ओर से युवाओं को साधने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में यदि रोजगार और सरकारी भर्तियां चुनावी मुद्दों में प्रमुखता से शामिल होती हैं, तो राजनीतिक दलों के बीच इसे लेकर बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। फिलहाल मायावती ने छात्रों और Gen-Z से अपने आंदोलनों को राजनीतिक स्वार्थ से दूर रखने की अपील की है। साथ ही उन्होंने रोजगार और सरकारी भर्ती के सवालों को युवाओं के भविष्य से जोड़ते हुए सरकारों से इन क्षेत्रों पर गंभीरता से काम करने की जरूरत बताई है।
Updated on:
11 Aug 2026 03:20 pm
Published on:
11 Aug 2026 03:20 pm
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