
राज्यपाल ने डाॅ राम मनोहर लोहिया की जयंती पर उन्हें आदरांजलि अर्पित करते हुये कहा कि डाॅ0 लोहिया समग्र परिवर्तन के सूत्रधार थे। वे केवल एक राजनेता ही नहीं बल्कि मौलिक चिन्तन करने वाले दार्शनिक थे जिनका पूरा जीवन राष्ट्र को समर्पित था। डाॅ0 लोहिया इतिहास, दर्शन साहित्य, धर्म के गहन पाठक थे। लोहिया जी का मानना था कि देश के नवनिर्माण में महिलाओं को आगे आना चाहिए। महिलाओं को द्रौपदी की तरह विवेकशील बनकर अपमान न सहने का संकल्प लेना चाहिए। गंगा, यमुना और देश की अन्य नदियों को साफ करने का विचार उन्होंने सबसे पहले रखा। उन्होंने कहा कि लोहिया जी जीवन भर कर्मयोगी रहे।

राम नाईक ने कहा कि लोहिया जी में अद्भुत मेधा और आत्मविश्वास था। ‘राम, कृष्ण और शिव लेख’ में लोहिया जी ने भारतीय परम्पराओं की काव्यमय व्याख्या की है। रामचरितमानस के प्रति उनकी अगाध श्रद्धा थी। चित्रकूट में रामायण मेला की कल्पना लोहिया जी की थी। इतिहास, दर्शन, अर्थशास्त्र पर भी उन्होंने अपने विचार रखे। लोहिया जी कहा करते थे कि ‘लोग मेरी बात सुनेंगे, शायद मेरे मरने के बाद लेकिन सुनेंगे जरूर।’ उन्होंने कहा कि देश के महापुरूषों की विचारधारा और दर्शन को समझते हुये युवा पीढ़ी को उसके लिये प्रेरित करना होगा, यही महापुरूषों की प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।