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28 साल बाद पाकिस्तान से कानपुर लौटे शमशुद्दीन, पिता को देखकर बेहोश हो गई बेटी

- कानपुर के शमशुद्दीन वर्ष 1992 में गये थे पाकिस्तान- जासूसी के आरोप में 8 वर्ष तक पाकिस्तान की जेल में रहे बंद- रविवार रात को पहुंचे घर, परिजनों और मोहल्लेवालों ने बरसाये फूल

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लखनऊ

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Hariom Dwivedi

Nov 16, 2020

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मोहल्ले के लोगों और रिश्तेदारों ने शमशुद्दीन पर फूलों की वर्षा करते हुए माल्यार्पण कर स्वागत किया

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
कानपुर. कानपुर के कंघी मोहाल में गोवर्धन पूजा के दिन उस वक्त दिवाली जैसा माहौल बन गया, जब 28 वर्ष बाद शमसुद्दीन (58) पाकिस्तान से अपने घर वापस लौटे। घरवालों की खुशी देखते ही बनती थी। बेटियों की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे, मारे खुशी के बहन गढ़ खाकर गिर गई। लोगों ने गले लगाकर स्वागत किया। वर्ष 1992 में शमसुद्दीन पाकिस्तान घूमने गए थे। इसके बाद वह अपने वतन नहीं लौट सके। हालांकि, इस बीच उनकी घरवालों से कुछ वर्षों तक बातचीत होती रही, लेकिन पिछले 12 साल से उनका संपर्क परिवार से कट गया था। जासूसी के आरोपों में पाकिस्तानी सेना ने उन्हें 8 साल तक जेल में बंद रखा। रविवार को स्थानीय पुलिस व खुफिया टीम शमशुद्दीन को अमृतसर से लेकर कानपुर पहुंची। शमसुद्दीन के छोटे भाई फहीमुद्दीन ने कागजी औपचारिकता पूरी की। इसके बाद पुलिस टीम ने उन्हें उनके घर कंघी मोहाल लेकर आई। फहीमुद्दीन ने बताया कि पाकिस्तान जेल से भाई को रिहा कर अमृतसर में क्वारंटाइन किया गया है, इस बात की उन्हें खबर नहीं थी। इस विषय में उन्हें मीडिया से जानकारी मिली थी।

पुलिस टीम रात में शमसुद्दीन को लेकर थाना बजरिया पहुंची। पुलिस क्षेत्राधिकारी त्रिपुरारी पांडेय समेत अन्य अधिकारियों ने पहुंचकर उनका फूलों से स्वागत किया और मिठाई खिलाकर देश वापसी की बधाई दी। शमसुद्दीन ने बताया कि हमारे लिए तो यह दीपावली यादगार बन गई है। क्योंकि मेरी बेटी का जन्म भी दीपावली वाले दिन ही हुआ था। इस दोहरी खुशी में उनके आंसू छलक आए और बेटी को गले लगाकर शुभकामनाएं दीं। मोहल्ले के लोगों और रिश्तेदारों ने उन पर फूलों की वर्षा करते हुए माल्यार्पण कर स्वागत किया।

जूता कारीगर हैं शमसुद्दीन
चार भाइयों और दो बहनों में सबसे बड़े शमसुद्दीन शमसुद्दीन पेशे से जूता कारीगर है। कानपुर में वह बांसमंडी स्थित फैक्ट्री में काम करते थे। पाकिस्तान में उन्होंने चूड़ी की दुकान पर काम किया। इसके बाद ठेला लगाकर वहां चप्पलें बेचीं। पाकिस्तान से जब वह भारत आना चाहते थे, जासूसी के आरोप में उन्हें जेल में डाल दिया गया।