लखनऊ. अपने ऊट-पटांग बयानों के लिए चर्चित द्वारिका पीठ के जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने एक बार फिर विवादास्पद बयान दिया है। उनका कहना है कि बसपा प्रमुख यदि जय भीम के नाम की माला जपेंगी तो उनकी सरकार उप्र में नहीं बनने वाली। मायावती यदि जय भीम के ही भरोसे बैठी रहीं तो वे अल्पमत में आ जाएंगी। स्वरूपानंद का कहना है कि बसपा सुप्रीमो जब तक जय श्रीराम का नारा जब तक नहीं लगाएंगी तक तक उनका कल्याण नहीं होने वाला। सर्वजन तक पहुंचने के लिए यह जरूरी है।
हरिद्वार में शंकराचार्य मठ में उन्होंने कहा कि यदि मायावती जय भीम करती रहेंगी तो वे अल्पमत में आ जाएंगी। सत्ता पाने के लिए जरूरी है कि वह राम का नाम लें। उन्होंने जोड़ा कि मायावती पहले तिलक तराजू और तलवार वाला नारा दिया था। तब उनकी सरकार नहीं बनी। जब उन्हें गलती का एहसास हुआ तब उन्होंने बहुजन से आगे बढ़कर सर्वजन का नारा दिया। हाथी नहीं गणेश है, ब्रह्मा विष्णु महेश है। इसके बाद उन्हें मुख्यमंत्री बनने का मौका मिला। यदि मायावती वही गलती फिर दोहराएंगी और राम का नाम नहीं लेंगी तो फिर वे वहीं जा पहुंचेंगी जहां से बसपा की शुरूआत हुई थी।
भगवान बुद्ध का अवतार छल के लिए हुआ था
जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने भगवान बुद्ध के बारे में भी उल्टा सीधा बोल गए। उन्होंने कहा कि बुद्ध भगवान विष्णु के अवतार थे। उनका जन्म छल के लिए हुआ था। इसीलिए उन्होंने असुरों को छला। और इसीलिए बुद्ध की पूजा नहीं करनी चाहिए। लेकिन, लोग मानते नहीं और बुद्ध की पूजा करते हैं। उन्होंने कहा कि बौद्ध धर्म अपनाने वाले दलितों के साथ भी धोखा हुआ। और वे बौद्ध होने के बाद अन्य समाज से कट गए।
पहले भी विवादित बयान दे चुके हैं स्वरूपानंद सरस्वती
द्वारका पीठ के जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती इसके पहले भी कई विवादास्पद बयान दे चुके हैं। शनि मंदिर सिंगनापुर, सांई पूजा पर उनके बयानों से काफी बवाल मचा था।
यूपी में उबाल
स्वामी स्वरूपानंद के बयान से उत्तर प्रदेश में बसपा समर्थकों में काफी आक्रोश है। अंबेडकरवादी और भगवान बुद्ध के अनुयायी भी शंकराचार्य के बयान से खफा हैं। लखनऊ के जीपीओ पार्क में स्वामी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी किया गया।