
लखनऊ. इस बार नौ देवियों का पर्व नवरात्रि इस बार 21 सितंबर से शुरू हो रहा है। नवरात्रि 21 सितम्बर से शुरू होकर 29 सितम्बर तक चलेगी। 21 सितम्बर दिन गुरूवार से शारदीय नवरात्रि 2017 का शुभारंभ हो रहा है। नवरात्रि में नौ दिनों तक सभी देवियों की पूजा आराधना की जाती हैं। इस त्यौहार में चाहे सुहागन हो कन्या नौ दिनों का व्रत रखती है। यह त्यौहार बंगाल के साथ पूरे भारत में बड़े ही धूम धाम से मनाया जाता है। इस पूजा में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है।
ये है शुभ मुहूर्त
21 सितम्बर से शुरू होने वाले शारदीय नवरात्रि पर घट-स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 03 मिनट से लेकर 08 बजकर 22 मिनट तक का है। अगर इस समय आप घट स्थापना करेंगे तो आपके लिए शुभ होगा।
ये है घट स्थापना की सामग्री
- जौ बोने के लिए वेदी (मिट्टी का पात्र)
जौ बोने के लिए शुद्ध साफ़ की हुई मिटटी जिसमे कंकर आदि ना हो। पात्र में बोने के लिए जौ ( गेहूं भी ले सकते हैं।
- घट स्थापना के लिए मिट्टी का कलश
इसके लिए सोने, चांदी या तांबे का कलश भी ले सकते है। कलश में भरने के लिए शुद्ध जल-नर्मदा या गंगाजल या फिर अन्य साफ जल लें।
- रोली, मौली, इत्र, दूर्वा
- पूजा में काम आने वाली साबुत सुपारी
- कलश में रखने के लिए सिक्का
सिक्का किसी भी प्रकार का हो सकता है। कुछ लोग चांदी या सोने का सिक्का भी रखते हैं।
-न पंचरत्न ( हीरा , नीलम , पन्ना , माणक और मोती )- पीपल , बरगद , जामुन , अशोक और आम के पत्ते ( सभी ना मिल पायें तो कोई भी दो प्रकार के पत्ते ले सकते है )
- कलश ढकने के लिए ढक्कन ( मिट्टी का या तांबे का )- ढक्कन में रखने के लिए साबुत चावल- नारियल- लाल कपडा- फूल माला- फल तथा मिठाई- दीपक , धूप , अगरबत्ती
घट स्थापना की विधि
- घट स्थापना के लिए सबसे पहले जौ बोने के लिए एक ऐसा पात्र लें जिसमे कलश रखने के बाद भी आस पास जगह रहे।
- इस पात्र में जौ उगाने के लिए मिट्टी की एक परत बिछा दें।
- पात्र के बीच में कलश रखने की जगह छोड़कर बीज डाल दें।
- फिर एक परत मिटटी की बिछा दें। एक बार फिर जौ डालें। फिर से मिट्टी की परत बिछाएं।
- अब इस पर जल का छिड़काव करें।
ऐसे तैयार करें कलश
- कलश तैयार करने के लिए सबसे पहले कलश पर स्वस्तिक बनायें।
- कलश के गले में मौली बांधें।
- कलश को थोड़े गंगा जल और शुद्ध जल से पूरा भर दें।
- कलश में साबुत सुपारी, फूल, दूर्वा, इत्र, पंचरत्न तथा सिक्का डालें व पांचों प्रकार के पत्ते डालें। कुछ पत्ते थोड़े बाहर दिखाई दें इस प्रकार लगाएँ। चारों तरफ पत्ते लगाकर ढ़क्कन लगा दें।
- इस ढक्कन में अक्षत यानि साबुत चावल भर दें।
Published on:
04 Sept 2017 11:51 am
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