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मॉडर्न निकाहनामे में मिलेगा महिलाओं को हक़- शाइस्ता अम्बर

मॉडर्न निकाहनामा महिलाओं के अधिकारों के लिए बना है

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Santoshi Das

Sep 10, 2016

Shaista Ambar

Shaista Ambar

लखनऊ.मॉडर्न निकाहनामा महिलाओं के अधिकारों के लिए बना है। इसमें उनके अधिकारों का पूरा ख्याल रखा गया है। यह महिलाओं के लिए आदर्श निकाहनामा होगा।

तीन तलाक बोलने का हक़ केवल महिलाओं को नहीं बल्कि महिलाओं को भी है। ऑल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने लखनऊ में मॉडर्न निकाहनामा पेश किया। इसमें महिलाओं को पुरुषों के सामान अधिकार दिए गए हैं। इस निकाहनामे में पत्नी को भी तलाक देने का अधिकार मिला है।

नए निकाहनामे में इस बात पर ज़ोर दिया गया है की शादी के लिए भले ही गवाह की ज़रूरत ना हो लेकिन तलाक के लिए गवाह जरुरी हैं। तीन तलाक के मसले पर देश में लंबे समय से बहस छिड़ी हुई थी।

शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता मौलाना यासूब अब्बास ने यूनिटी कॉलेज में मॉडर्न निकाहनामा मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उपाध्यक्ष डॉ कल्बे सादिक सौंपा। डॉ सादिक ने इसको मंजूरी देते हुए बोर्ड के अन्य सदस्यों से बातचीत कर लागू करवाने का भरोसा दिया है। इस निकाहनामे पर अंतिम फैसला बोर्ड की अगली बैठक में लिया जायेगा।

महिलाओं को भी मिले तलाक का हक़

मौलाना यासूब अब्बास के अनुसार मॉडर्न निकाहनामे में शर्त रखी गई है की अगर पत्नी चाहे तो वह भी पति को तलाक दे सकती है। यह शर्त निकाह के समय दोनों पक्षों को बताई जाएगी।


शाइस्ता अम्बर ने कहा अब बनेगी बात

(ऑल इंडिया मुस्लिम वुमेन पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष) का कहना है कि इंस्टैंट तलाक का कंसेप्ट इस्लाम के विरुद्ध है। कई बार पति भटक जाते हैं और बाद में अपने निर्णय पर पछताते हैं। शादी से संबंधित मामलों में धैर्य और काउंसलिंग की जरूरत है। कुछ मामलों में तो पतियों को मौलाना से फतवा मिलता है और पत्नी को पता भी नहीं चल पाता है कि उसका पति उसे तलाक दे चुका है। एक बार में कहकर तलाक देना गैर इस्लामिक है। नए निकाहनामे में यह लिखा गया है की महिला अगर तलाक से सहमत नहीं हैं तो पुरुष उसको तलाक नहीं दे सकता है।

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