24 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Shraddha Paksha Special 2019 : श्राद्ध पक्ष में जिनके कुंडली में हो कालसर्प दोष तो वो करें यह उपाय

कालसर्प दोष के निवारण के लिए अलग-अलग उपाय

3 min read
Google source verification

लखनऊ

image

Ritesh Singh

Sep 14, 2019

Shraddha Paksha Special

Shraddha Paksha Special 2019 : श्राद्ध पक्ष में जिनके कुंडली में हो कालसर्प दोष तो वो करें यह उपाय

लखनऊ , दोष किसी भी प्रकार का हो सकता हैं व्यक्ति के गुण -अवगुण दोनों का प्रभाव उसके जीवन पर जरुरी पड़ते हैं अगर इंसान समय रहते संभल जाए तो वो अपने जीवन की रेखा को बदल सकता हैं। आज हम आपको दोष निवारण के बारे में बताएंगे यह वो दोष हैं जो हमारी जन्म कुंडलियों में होते है। आईये जानते हैं इसके बारे में। श्राद्ध पक्ष में हम कैसे दूर कर सकते है। इन सभी दोषों को।

पंडित पवन शास्त्री ने बतायाकि भाद्रपद मास की पूर्णिमा से आश्विन मास की अमावस्या तक का समय श्राद्ध पक्ष कहलाता है। इस बार श्राद्ध पक्ष का शुरुआत 13 सितंबर दिन शुक्रवार से हो गया है जिसका समापन 28 सितम्बर दिन शनिवार को होगा। हमारे शास्त्र के अनुसार जिन लोगों की जन्म कुंडली में कालसर्प दोष हो, वे अगर श्राद्ध पक्ष में इस दोष के निवारण के लिए उपाय व पूजन करें तो शुभ फलों की प्राप्ति होती है तथा कालसर्प दोष के दुष्प्रभाव में कमी आती है।

पंडित पवन शास्त्री ने कहाकि कालसर्प दोष मुख्य रूप से 12 प्रकार का होता है। इसका निर्धारण जन्म कुंडली देखकर ही किया जा सकता है। उन्होंने बतायाकि प्रत्येक कालसर्प दोष के निवारण के लिए अलग-अलग उपाय हैं। यदि आप जानते हैं कि आपकी कुंडली में कौन सा कालसर्प दोष है तो उसके अनुसार आपको Shradh Paksh में कभी भी यह उपाय कर सकते हैं।

पंडित पवन शास्त्री Kaal Sarp Dosh के प्रकार व उनके निवारण के लिए करें यह उपाय

अनन्त कालसर्प दोष ( Eternal Kaal Sarp Dosh)

> अनन्त कालसर्प दोष होने पर श्राद्ध पक्ष में एकमुखी, आठमुखी या नौमुखी रुद्राक्ष धारण करें।

> यदि इस दोष के कारण स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता है तो श्राद्ध के दौरान रांगे (एक धातु) से बना सिक्का पानी में प्रवाहित करें।

कुलिक कालसर्प दोष (Kulik Kaal Sarp Dosh)

> कुलिक नामक कालसर्प दोष होने पर श्राद्ध पक्ष में दो रंग वाला कंबल अथवा गर्म वस्त्र दान करें।

> चांदी की ठोस गोली बनवाकर उसकी पूजा करें और उसे अपने पास रखें।

वासुकी कालसर्प दोष (Vasuki Kaal Sarp Dosh)

> वासुकी कालसर्प दोष होने पर रात को सोते समय सिरहाने पर थोड़ा बाजरा रखें और सुबह उठकर उसे पक्षियों को खिला दें।

> श्राद्ध के दौरान किसी भी दिन लाल धागे में तीन, आठ या नौमुखी रुद्राक्ष धारण करें।

शंखपाल कालसर्प दोष (Shankhpal Kaal Sarp Dosh)

> शंखपाल कालसर्प दोष के निवारण के लिए श्राद्ध पक्ष के दौरान किसी भी दिन 400 ग्राम साबुत बादाम बहते पानी में प्रवाहित करें।

> शिवलिंग का दूध से अभिषेक करें।

पद्म कालसर्प दोष ( Padma Kaal Sarp Dosh)

> पद्म कालसर्प दोष होने पर श्राद्ध पक्ष के किसी भी दिन से प्रारंभ करते हुए 40 दिनों तक रोज सरस्वती चालीसा का पाठ करें।
> जरूरतमंदों को पीले वस्त्र का दान करें और तुलसी का पौधा लगाएं।

महापद्म कालसर्प दोष (Mahapadam Kaal Sarp Dosh)

> महापद्म कालसर्प दोष के निदान के लिए हनुमान मंदिर में जाकर सुंदरकांड का पाठ करें।

> श्राद्ध के दौरान गरीब, असहायों को भोजन करवाकर दान-दक्षिणा दें।

तक्षक कालसर्प दोष ( Takshak kaal sarp dosh)

> तक्षक कालसर्प योग के निवारण के लिए 11 नारियल बहते हुए जल में प्रवाहित करें।

> सफेद वस्त्र और चावल का दान करें।

कर्कोटक कालसर्प दोष (Karkotak Kaal Sarp Dosh)

> कर्कोटक कालसर्प योग होने पर बटुकभैरव के मंदिर में जाकर दही-गुड़ का भोग लगाएं और पूजा करें।

> शीशे के आठ टुकड़े पानी में प्रवाहित करें।

शंखचूड़ कालसर्प दोष (Shankhchud Kalsarp Dosh)

> शंखचूड़ नामक कालसर्प दोष की शांति के लिए श्राद्ध के किसी भी दिन रात को सोने से पहले सिरहाने के पास जौ रखें और उसे अगले दिन पक्षियों को खिला दें।

> पांचमुखी, आठमुखी या नौमुखी रुद्राक्ष धारण करें।

घातक कालसर्प दोष (ghatak kaal sarp dosh)

> घातक कालसर्प के निवारण के लिए पीतल के बर्तन में गंगाजल भरकर अपने पूजा स्थल पर रखें।

> चारमुखी, आठमुखी और नौमुखी रुद्राक्ष हरे रंग के धागे में धारण करें।

विषधर कालसर्प दोष ( vishdhar kaal sarp dosh)

> विषधर कालसर्प के निदान के लिए परिवार के सदस्यों की संख्या के बराबर नारियल लेकर एक-एक नारियल पर उनका हाथ लगवाकर बहते हुए जल में प्रवाहित करें।

> भगवान शिव के मंदिर में जाकर यथाशक्ति दान-दक्षिणा दें।

शेषनाग कालसर्प दोष ( Sheshnag Kalsarp Dosh)

> शेषनाग कालसर्प दोष होने पर अंतिम श्राद्ध की पूर्व रात्रि को लाल कपड़े में सौंफ बांधकर सिरहाने रखें और उसे अगले दिन सुबह खा लें।

> श्राद्ध पक्ष में किसी भी दिन गरीबों को दूध व अन्य सफेद वस्तुओं का दान करें।