
श्री राम के बिना भारत का अस्तित्व नहीं - मृदुलकान्त शास्त्री
ritesh singh
लखनऊ। श्री श्याम परिवार लखनऊ के सानिध्य व सिंघल परिवार की ओर से बीरबल साहनी मार्ग स्थित श्री खाटू श्याम मन्दिर के पावन परिसर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन शुक्रवार को श्रीधाम वृन्दावन के कथा व्यास मृदुल कान्त शास्त्री महाराज ने कहा कि अच्छा चरित्र ही जीवन का सार है। भागवत ऐसा धर्म ग्रंथ है, जिसके श्रवण से महापापी जीव का भी उद्धार करने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि धर्म ग्रंथों को सुनते समय मन को स्थिर रखना चाहिए क्योंकि मन चंचल होता है और यह सदैव मोह माया की ओर जाता है।
धुंधकारी का प्रसंग सुनाते हुये कहा कि गोकर्ण महाज्ञानी और संत प्रवृति था, जब कि धुंधकारी दुष्ट प्रवृति था। गोकर्ण ठाकुरजी का चरणामृत पीते थे। जब कि धुंधकारी मदिरा पान करता था, जुआ खेलता था। वह प्रेत योनि में जाकर एक बांस में निवास करने लगा। भगवान सूर्य के घर जब गोकर्ण महाराज ने भागवत कथा सुनाई तो हर दिन बांस की एक-एक गांठ खुलती गई। सात दिन में बांस की सातों गांठ खुल गई और धुंधकारी को मुक्ति मिल गई। कथा व्यास ने कहा कि आशय यह है कि श्रीमद् भागवत कथा इंसान को नहीं, प्रेत को भी भवसागर से पार कराती है। उन्होंने कुंती स्तुति, भीष्म स्तुति, शुकदेव का आगमन आदि के प्रसंग सुनाए।
श्रीराम हमारी आस्था का केन्द्र है
देश में इन दिनों चल रहे अयोध्या में राम मन्दिर के मुद्दे पर मृदुल कान्त शास्त्री महाराज ने कहा कि श्रीराम हमारी आस्था का केन्द्र है यह हम सबका दुर्भाग्य ही कहा जायेगा कि श्रीराम जन्म भूमि पर भगवान राम का मन्दिर निर्माण का कार्य अटका हुआ है। राम के बिना भारत के अस्तित्व की कल्पना संभव नहीं है। हमें देश की न्याय पालिका पर पूर्ण भरोसा है कि वह अब जल्द ही मन्दिर निर्माण को लेकर उचित न्याय करेगी। कार्यक्रम संयोजक राम गोपाल अग्रवाल ने कहा कि धार्मिक कार्यक्रमों से समाज में संस्कार और संस्कृति को संबल प्राप्त होता है।
Published on:
04 Jan 2019 08:51 pm
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