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डीएचएफएल घोटाले पर गरमाई सियासत, सपा-कांग्रेस ने बीजेपी को घेरा, ऊर्जा मंत्री का दावा- अखिलेश ने रखी थी घोटाले की नींव

यूपी पॉवर कारपोरेशन में हुए कथित पीएफ घोटाले में राज्य सरकार ने सीबीआइ जांच की सिफारिश के आदेश दिए हैं। वहीं, विपक्षी दलों ने योगी आदित्यनाथ सरकार पर निशाना साधा है

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लखनऊ

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Hariom Dwivedi

Nov 03, 2019

UP Minister Shrikant Sharma

प्रदेश सरकार के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने पूर्ववर्ती सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इस मामले की नींव सपा सरकार के दौरान ही पड़ गई थी

लखनऊ. यूपी पॉवर कारपोरेशन में हुए कथित पीएफ घोटाले में राज्य सरकार ने सीबीआइ जांच की सिफारिश के आदेश दिए हैं। वहीं, विपक्षी दलों ने योगी आदित्यनाथ सरकार पर निशाना साधा है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी और पार्टी प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने भाजपा सरकार पर दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (डीएचएफएल) से करोड़ों रुपए चंदा वसूलने का आरोप लगाया है। वहीं, प्रदेश सरकार के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने पूर्ववर्ती सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इस मामले की नींव सपा सरकार के दौरान ही पड़ गई थी। इस पर फैसला कोई एक दिन में नहीं लिया गया। प्रियंका गांधी पर पलटवार करते हुए ऊर्जा मंत्री ने कहा कि वह राहुल गांधी के नक्शेकदम पर चल रही हैं और बिना तथ्य जाने ट्वविटर पर बयानबाजी कर रही हैं।

श्रीकांत शर्मा ने प्रियंका गांधी को शहजादी करार देते हुए कहा कि संन्यासी (योगी आदित्यनाथ) के नेतृत्व वाली सरकार पर आरोप लगाने से पहले प्रियंका गांधी को आत्मनिरीक्षण करना चाहिए। उन्हें हरियाणा और लंदन में अपने पति रॉबर्ट वाड्रा की संपत्ति के बारे में बोलना चाहिए। हमारी सरकार पारदर्शी है। श्रीकांत शर्मा ने कहा कि इस घोटाले की जांच के लिए सीएम योगी ने सीबीआई जांच की सिफारिश भी की है। सीबीआइ जांच शुरू होने तक इसकी पड़ताल पुलिस महानिदेशक आर्थिक अपराध शाखा आरपी सिंह करेंगे। श्रीकांत शर्मा ने कहा कि भाजपा सरकार ने भ्रष्टाचार पर जीरो टालरेंस की नीति के तहत एक बार फिर इस मामले में बड़ी कार्रवाई की है। ऊर्जी मंत्री श्रीकांत शर्मा ने डीएचएफएल घोटाले पर रविवार को प्रेसवार्ता करते हुए कहा फाइनेंस कंपनियों में निवेश का निर्णय एक दिन में नहीं लिया गया था, बल्कि इसकी नींव साल 2014 में सपा के शासनकाल में ही पड़ गई थी।

सपा ने पूछा सवाल
समाजवादी पार्टी ने कहा कि भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी सत्ता नए-नए पत्रों से जनता का ध्यान भटका रही है। द्वेष की राजनीति के चलते झूठे आरोप लगा रही। डीएचएफएल से 20 करोड़ का चंदा लेने वाले भाजपा के मंत्री शर्मा जी आप बताएं ये रिश्ता क्या कहलाता है? उन्होंने कहा कि ध्यान भटकाने के लिए तरत-तरह के पात्रों की गेम मोड़ने की कोशिश की जा रही है।

असली गुनाहगारों को सामने लाना होगा : प्रियंका गांधी
प्रियंका गांधी ने ट्वीट करते हुए कहा कि प्रदेश में बिजली विभाग के कर्मचारियों की जिंदगी भर की कमाई भाजपा सरकार में डीएचएफल में निवेश करके फंसा दी। चुनाव के दौरान मुझे तमाम सरकारी कर्मचारियों ने मिलकर नई पेंशन स्कीम को लेकर अपनी चिंता बताई थी। आज उनके शक जायज़ साबित हो रहे हैं। मामले में दो की गिरफ्तारी पर प्रियंका गांधी ने कहा कि छोटी मछलियों को पकड़कर ध्यान भटकाने से नहीं, असली गुनाहगारों को सामने लाना होगा।

सरकारी संरक्षण के बिना इतना बड़ा घोटाला संभव नहीं : अजय लल्लू
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने कहा कि उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन के 45 हजार से ज्यादा कर्मचारियों के जीवन भर की कमाई मौजूदा योगी आदित्यनाथ की भाजपा सरकार के कारण डूब गयी है। उन्होंने कहा कि बिना सरकार के संरक्षण के इतना बड़ा घोटाला नहीं हो सकता। कहा कि डीएचएफएल एक डिफाल्टर कम्पनी है। तमाम निवेशकों ने पहले से इस पर एफआईआर दर्ज कराये थे। इसके बावजूद भी योगी सरकार ने इसमें पीएफ का निवेश जारी रखा। सिर्फ पूर्ववर्ती सरकार पर जिम्मेदारी डालने से काम नहीं चलेगा।

सीबाआई जांच की सिफारिश
सीएम योगी ने ऊर्जा विभाग में 45000 कर्मचारियों के 2268 करोड़ रुपये के पीएफ घोटाला मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की सिफारिश की है। सीएम ने सीबीआई जांच कराने का पत्र केंद्र सरकार को भेज दिया है, साथ ही पूरे मामले की जांच डीजी ईओडब्ल्यू करेंगे। इससे पहले शनिवार को यूपीपीसीएल कर्मियों का पीएफ डीएचएफएल में जमा कराने वाले तत्कालीन निदेशक वित्त सुधांशु द्विवेदी और महानिदेशक पीके गुप्ता के खिलाफ एफआइआर दर्ज करते हुए दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

क्या है पूरा मामला
राज्य सरकार के उत्तर प्रदेश विद्युत निगम लिमिटेड (यूपीपीसीएल) ने अपने कर्मियों के 2600 करोड़ रुपए का प्रोविडेंट फंड (पीएफ) को निजी कंपनी डीएचएफएल में निवेश किया है। निवेश करने का निर्णय साल 2014 में सपा सरकार में उत्तरप्रदेश स्टेट पावर सेक्टर इंपलाइज ट्रस्ट के बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज की बैठक में लिया गया था। इसके चलते मार्च 2017 से दिसंबर 2018 तक कर्मियों का 2631.20 करोड़ रुपए डीएचएफएल कंपनी में जमा किया गया। इस दौरान एक हजार करोड़ रुपए तो वापस मिल चुका है। लेकिन इसी बीच मुंबई हाईकोर्ट ने डीएचएफएल द्वारा किए जाने वाले सभी भुगतान पर रोक लगा दी है।

कर्मचारियों का पैसा पूरी तरह सुरक्षित : प्रमुख सचिव ऊर्जा
यूपी स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड इंजीनियर्स एसोसिएशन के महासचिव राजीव कुमार के अनुसार, अभी भी 1600 करोड़ रुपए से अधिक धनराशि डीएचएफएल कंपनी में फंसी हुई है। सरकार यह पैसा वापस लाए और सुनिश्चित करे कि इस तरह की कंपनियों में अब कर्मियों का पैसा निवेश नहीं किया जाएगा। उधर, प्रमुख सचिव ऊर्जा आलोक कुमार ने कर्मचारियों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि उनका पैसा पूरी तरह से सुरक्षित है। डीएचएफसीएल में जमा धनराशि निकालने के लिए हर तरीके से प्रयास किये जा रहे हैं। अगर किसी तरह का जोखिम हुआ तो पावर कारपोरेशन कर्मचारियों का पूरा पैसा वापस करेगा।