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अखिलेश यादव ने साधा निशाना, कहा – प्रदेश की हो गई दुर्गति, सीएम की नहीं सुन रहे अफसर

अखिलेश ने लिखा है कि भाजपा विधायक जब खुद भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं तो अब किसी तरह के सबूत की जरूरत नहीं रह गई है।

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Akhilesh Yadav

Akhilesh Yadav

लखनऊ. कैराना लोकसभा और नूरपुर विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी की हार के बाद सूबे के विपक्षी दलों ने हमलावर रुख अपनाते हुए सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश सरकार पर हमला बोलते हुए कहा है कि सरकार का अधिकारियों पर कोई नियंत्रण नहीं रह गया है और प्रदेश की दुर्गति हो रही है। अखिलेश ने ट्वीट में लिखा है कि भाजपा के विधायक जब खुद भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं तो अब किसी तरह के सबूत की जरूरत नहीं रह गई है।

ट्वीट कर सरकार पर निशाना

सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शनिवार को ट्वीट कर लिखा - ' लीजिए अब सत्ताधारी दल के अपने ही विधायक कह रहे हैं कि प्रदेश में भ्रष्टाचार बढ़ा है, उनके कार्यकर्ता कोई काम न होने से हताश हैं, सरकार का अधिकारियों पर कोई काबू नहीं है। अब और क्या सबूत चाहिए प्रदेश की दुर्गति का। ये कैराना-नूरपुर व भविष्य में चुनावी हार के डर से कहा गया सच है। '

विधायक ने लगाया था भ्रष्टाचार का आरोप

दरअसल अखिलेश यादव ने ट्वीट में भाजपा के हरदोई के गोपामऊ से विधायक श्याम प्रकाश की उस फेसबुक पोस्ट को आधार बनाया है जिसमें विधायक ने अपनी ही सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। कैराना और नूरपुर की हार पर विधायक ने अपनी पोस्ट में संगठन और सरकार पर निशाना साधा था। पोस्ट में उन्होंने लिखा था कि मुख्यमंत्री असहाय हैं और पार्टी अध्यक्ष व अधिकारी भ्रष्ट हो चुके हैं। विधायक ने यहाँ तक कहा था कि जब अधिकारी मुख्यमंत्री की बात नहीं सुन रहे तो विधायकों की क्या सुनेंगे। विधायक ने यहाँ तक कहा था कि इस सरकार में भ्रष्टाचार बढ़ा है।

कार्यकर्ताओं में भी दिख रही है नाराजगी

कैराना और नूरपुर की हार के बाद भारतीय जनता पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ता सोशल मीडिया पर मुखर होकर अपनी बात कह रहे हैं। फेसबुक से लेकर ट्वीटर तक पर भाजपा कार्यकर्ता इस जीत को कार्यकर्ताओं की उपेक्षा से जोड़कर देख रहे हैं। कई पदाधिकारियों ने सोशल मीडिया पर अपनी भड़ास निकालते हुए यहाँ तक लिखा है कि कार्यकर्ता को जरूरत पड़ने पर पदाधिकारी फोन तक नहीं उठाते। अफसर भाजपा कार्यकर्ताओं की समस्याएं तक नहीं सुन रहे। उपचुनाव नतीजों के बाद से लगातार पार्टी कार्यकर्ताओं का मुखर रूप भाजपा संगठन के लिए भी चिंता का विषय बना हुआ है और समस्या को साधने की जुगत भी चल रही है।