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अधिग्रहित जमीन श्रीराम मंदिर ट्रस्ट को देने की कवायद तेज, श्रीराम जन्मभूमि न्यास सबसे आगे

अयोध्या में राम मंदिर के लिए ट्रस्ट की घोषणा के बाद अब अधिग्रहित जमीन भी ट्रस्ट को देने की कवायद तेज हो गई.

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लखनऊ

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Abhishek Gupta

Feb 07, 2020

Ram mandir

Ram mandir

अयोध्या. अयोध्या में राम मंदिर के लिए ट्रस्ट की घोषणा के बाद अब अधिग्रहित जमीन भी ट्रस्ट को देने की कवायद तेज हो गई। श्रीराम जन्मभूमि न्यास ने अधिग्रहीत परिसर स्थित अपनी भूमि देने का ऐलान किया है। इस भूमि का जो भी मुआवजा होगा वह अपर आयुक्त न्यायिक अब रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंपेगी। इसके साथ ही विराजमान रामलला की अपनी ही भूमि का मुआवजा भी ब्याज सहित ट्रस्ट को दिया जाएगा।
बीते बुधवार को पीएम मोदी ने ट्रस्ट के गठन के ऐलान के साथ अयोध्या में 1993 में अधिग्रहित पूरी 67.7 एकड़ जमीन को नवगठित ट्रस्ट को देने का ऐलान किया था। इस जमीन में कोट रामचंद्र, जलवनपुर और अवध खास की जमीन भी शामिल थी। इसमें से 2.5 एकड़ जमीन श्रीराम जन्मभूमि न्यास की है जिसे रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को दो जाएगी। वहीं अब श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में पद हासिल करने को लेकर बवाल मचा हुआ है। यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के बाद अब मप्र की पूर्व मुख्यमंत्री उमाभारती ने ओबीसी समुदाय से किसी को भी ट्रस्ट में स्थान न देने पर सवाल खड़े किए हैं। इस बवाल के बीच रामनवमी से श्री राम मंदिर के निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।

श्रीराम जन्मभूमि न्यास की 2.5 एकड़ जमीन ट्रस्ट को-
हालांकि श्रीराम जन्मभूमि न्यास अध्यक्ष नृत्यगोपाल दास की ओर से फिलहाल कोई बयान नहीं आया है, लेकिन विराजमान रामलला के अभिन्न मित्र त्रिलोकी नाथ पाण्डेय ने अधिग्रहित 2.5 एकड़ जमीन ट्रस्ट को देने का ऐलान किया है। उन्होंने बताया कि अधिग्रहीत परिसर में न्यास की ओर से करीब ढ़ाई एकड़ भूमि अलग-अलग काश्तकारों से खरीदी गई थी। इसका मुआवजा ब्याज सहित नवगठित ट्रस्ट को सौंपने का शपथ पत्र अपर आयुक्त न्यायिक (क्लेम कमिश्नर), फैजाबाद की अदालत में दे दिया है। पाण्डेय ने बताया कि साल 1993 में केन्द्र सरकार की ओर से रामजन्मभूमि परिसर के ईद-गिर्द करीब 70 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया गया था। इस अधिग्रहीत भूमि के मुआवजे का मुकदमा अभी भी चल रहा है। उन्होंने बताया कि विराजमान रामलला की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटार्यड न्यायाधीश एवं रामलला के सखा देवकी नंदन अग्रवाल ने क्लेम दाखिल किया था।

उन्होंने अपने दावे में यह याचना की थी कि रामलला की अधिग्रहीत भूमि की मालियत निर्धारित कर ब्याज सहित भुगतान सुरक्षित किया जाए। इसी तरह से अधिग्रहीत परिसर में श्रीरामजन्मभूमि न्यास की ओर से भी क्लेम केस संख्या 42/1993 दायर किया था। बताया गया कि अपर आयुक्त न्यायिक (क्लेम कमिश्नर) की अदालत में चल रहे इस मुकदमे में न्यास की ओर से विहिप के अन्तरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय ने क्लेम की धनराशि रामलला को समर्पित करते हुए ट्रस्ट को प्रदान करने का आग्रह किया है।