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एक थी फूलन: 22 क्षत्रियों की मौत का बदला लेने की खातिर मारी गई यह ‘दलित नेता’

'एक थी फूलन' सीरीज के तहत अब तक आपने पढ़ा कि कैसे एक सीधी-सादी दलित महिला फूलन से डाकू फूलन देवी बनती है अब आगे...

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Kaushlendra Singh

Jul 25, 2016

Phoolan Devi Murder Case

Phoolan Devi Murder Case

लखनऊ। 'एक थी फूलन' सीरीज के तहत अब तक आपने पढ़ा कि कैसे एक सीधी-सादी दलित महिला फूलन से डाकू फूलन देवी बनती है और अपनी इज्जत का बदला लेने के लिए एक ही गांव के 22 ठाकुरों को मार देती है। अब पढ़िए उसके मौत यानि फूलन देवी हत्याकांड की कहानी...

तारीख-25 जुलाई 2001... दिन- बुधवार... नागपंचमी का त्योहार। जिस दिन हिन्दू धर्म के रीति-रिवाज वाले लोग सांप को दूध पिलाते हैं। उसी दिन सुबह फूलन के घर एक ऐसा शख्स आया जिसे उन्होंने खाने को प्रसाद की खीर दी लेकिन उसने बदले में उन्हें गोली।

जी हां, आज हम आपको उस दिन की कहानी बता रहे हैं जिस दिन डाकू से सांसद बनी फूलन देवी को बदले की आग में जल रहे एक युवक ने अपनी गोली का शिकार बना दिया था।

जिस व्यक्ति ने दलितों की नेता बनकर उभर रही फूलन देवी को हमेशा के लिए मौत की नींद सुला दिया उसका नाम था शेर सिंह राणा। शेर सिंह राणा ने फूलन देवी को उनके दिल्ली के वीआईपी इलाके में शुमार अशोक रोड स्थित सरकारी बंगले पर ही गोली मारी थी।

Phoolan Devi Umed Singh

फूलन के मौत की कहानी पति उम्मेद सिंह की जुबानी

25 जुलाई 2001 की सुबह शेर सिंह राणा खुद फूलन देवी से मिलने गया था। उनके अपना पहचान छिपाने के उद्देश्य से अपना फर्जी नाम बताया था। मुलाकात के वक्त शेर सिंह राणा ने अपना नाम शेखर बताया था। राणा ने फूलन के सामने उनकी एकलव्य सेना से जुड़ने की मंशा जाहिर की थी। फूलन से राणा की मुलाकात एकलव्य सेना की उत्तराखंड शाखा से जुड़ी सदस्य उमा कश्यप ने करवाई थी।

इसी मुलाकात के दौरान राणा को फूलन ने खीर खाने को दी थी। उसी दिन तकरीबन 11 बजे फूलन देवी सरकारी बंगले से संसद भवन के लिए रवाना हो गईं लेकिन राणा उनके घर से गया नहीं क्योंकि उसके दिमाग में तो कुछ और ही चल रहा था। वह फूलन के आवास के बाहर बनी लॉबी में ही बैठा रहा। वहां और लोग भी मौजूद थे लेकिन शेर सिंह के दिमाग में क्या चल रहा है कोई समझ नहीं पाया जब तक फूलन संसद भवन से वापस नहीं आ गईं।

दोपहर करीब डेढ़ बजे फूलन देवी संसद भवन से वापस अपने आवास पहुंची ही थीं कि राणा ने फुर्ती से गोलियां चला दीं जिससे उनकी मौत हो गई।

Phoolan Devi

शेर सिंह राणा ने देहरादून में रखी थी अपनी बात

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25 साल के हो चुके शेर सिंह राणा ने घटना के तुरंत बाद अपने को कानून के हवाले कर दिया था और डालनवाला थाने में हुई प्रेस कांफ्रेंस में यह स्वीकार किया था कि उन्होंने बेहमई में फूलन के हाथों मारे गए 22 क्षत्रियों की हत्या का बदला लिया था। और उनकी मंशा अफगानिस्तान जा कर सम्राट पृथ्वीराज चौहान की समाधि भारत लाना था। इस बात की तस्दीक संयुक्त पुलिस आयुक्त के के पॉल ने भी दिल्ली में की थी। उन्होंने कहा था, "वह खुद चलकर पुलिस थाने आया और आत्मसमर्पण कर दिया।"

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Sher Singh Rana

पुलिस को किसी और की थी तलाश

टेलीग्राफ में छपी एक खबर के मुताबिक 'बैंडिट क्वीन' फूलन के हत्यारे एक मारुति कार से आए थे जिसे शेर सिंह राणा खुद चला रहा था। जिसे उन्होंने करीब एक किलोमीटर आगे जाकर खाली छोड़ दिया था और ऑटो रिक्शा कर के भाग गए थे।

बाद में ऑटो रिक्शा ड्राइवर की पहचान करने में पुलिस को सहायता मिली जिसने पुलिस को बताया कि तीन लोगों में से एक मर्डर की जगर से आधा किमी. दूर और बाकी दो कुछ दूर उतर गए थे।

पुलिस के मुताबिक फूलन को 6 गोलियां मारी गई थीं जो कि शेर सिंह और उसके एक साथी ने चलाई थीं। लेकिन यहां यह भी बताना जरूरी होगा कि पुलिस शुरुआती जांच में इस बात पर भरोसा नहीं करती थी कि शेर सिंह राणा ने ही फूलन देवी की हत्या की है क्योंकि उनके पास कोई ठोस सबूत नहीं था फिर भी उसने आत्मसमर्पण कर दिया।

गार्जियन की एक रिपोर्ट भी यही कहती है, उनके मुताबिक...

- राणा ने अपराध में सम्मिलित होने का अपना कोई सबूत नहीं दिया।
- जब तीन नकाबपोशों ने फूलन की हत्या की थी तो राणा ने एक ही नाम क्यों बताया, वह तीसरा शख्स कौन था?

पुलिस ने पति और परिवार वालों से भी की पूछताछ

पुलिस ने फूलन की हत्या के बाद उनके पति उम्मेद सिंह और फूलन की दो बहनों (मुन्नी देवी और रूक्मणी), भाई शिव नारायण के अलावा कई अन्य पारिवारिक सदस्यों से भी बातचीत की थी। गार्जियन की खबर के मुताबिक एक पुलिस अधिकारी का कहना था, "परिवार के लोगों से हुई बातों में कई लूपहोल हैं, ऐसा लग रहा है कि वे कुछ जानकारी छुपाना चाह रहे हैं।"

इससे आगे की कहानी और किस पर लगे साजिश के आरोप पढ़िए अगले अंक में...

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