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Ghosi By Election: बसपा की गैरमौजूदगी सपा और भाजपा के लिए मौका है या चुनौती?

घोसी विधानसभा सीट पर बसपा का कोई उम्मीदवार न होने की वजह से भाजपा और सपा के बीच मुकाबला और कड़ा हो गया है।

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कांग्रेस और बसपा के चुनाव मैदान में नहीं होने से, मुस्लिम वोट सपा को मिलने की संभावना है।

Ghosi By Election: भाजपा छोड़ सपा और फिर सपा छोड़ भाजपा का दामन थामने वाले पूर्व विधायक दारा सिंह चौहान के इस्तीफे ने घोसी विधानसभा सीट पर एक उपचुनाव थोप दिया है। जैसे-जैसे उपचुनाव में मतदान की तिथि 5 सितंबर नजदीक आ रही है घोसी विधानसभा सीट पर मुकाबला भाजपा के नेतृत्व वाले नेशनल डेमोक्रेटिक एलायंस (एनडीए) और विपक्ष के ‘इंडिया’ गठबंधन की जोर आजमाइश के बीच सिमट गया है।

भाजपा को एनडीए के अन्य सहयोगी दलों अपना दल (एस), सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी, निषाद पार्टी का समर्थन हासिल है तो दूसरी ओर ‘इंडिया’ गठबंधन में शामिल दलों कांग्रेस, राष्ट्रीय लोकदल (रालोद), अपना दल (कमेरावादी) समेत सीपीआई (एम) और सीपीआई (एमएल) ने सपा उम्मीदवार सुधाकर सिंह को अपना समर्थन दिया है।

हालांकि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की दूरी ने दलित मतदाताओं को इस चुनावी जंग में महत्वपूर्ण बना दिया है। घोसी विधानसभा सीट पर 90 हजार दलित मतदाता हैं जिनमें जाटव, खटीक, पासी मुख्य हैं. मुस्ल‍िम मतदाता करीब 95 हजार हैं। पिछड़े वर्ग में 50 हजार राजभर, 45 हजार लोनिया चौहान, 40 हजार यादव, 20 हजार निषाद, 20 हजार भूमिहार, 8 हजार ब्राह्मण और 20 हजार वैश्य मतदाता हैं।

भाजपा ने दलित बहुल गांवों में जमीनी स्तर पर अभियान चलाने के लिए एससी/एसटी मोर्चा के अपने कार्यकर्ताओं को तैनात किया है। भाजपा ने दलितों की उपजाति जाटव, खटीक, पासी के हिसाब से नेताओं की टोलियां बनाई है। ये टोलियां अपनी बिरादरी के दलित मतादाताओं के बीच जाकर पिछली सपा सरकार में दलितों के विरोध में किए गए कामों को गिना रही हैं कांग्रेस और बसपा के चुनाव मैदान में नहीं होने से, मुस्लिम वोट सपा को मिलने की संभावना है।

हालांकि सपा यह भी उम्मीद कर रही है कि राजपूत उम्मीदवार खड़ा करने से उसे भाजपा के सवर्ण वोट बैंक में सेंध लगाने में मदद मिलेगी। उधर, भाजपा अगड़ी और गैर यादव मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा अपनी ओर खींचकर बाजी मारने की फिराक में है।

बसपा का घोसी विधानसभा उपचुनाव से दूर रहना सपा को फायदा पहुंचा सकता है। घोसी में पिछले तीन विधानसभा चुनाव में बसपा ने मुस्ल‍िम उम्मीदवार को टिकट दिया और तीनों बार 50 हजार से अधिक वोट हासिल किए। बसपा के मैदान में न रहने से मुस्ल‍िम उम्मीदवार तो सपा को एकतरफा वोट करेगा। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा को अच्छी संख्या में दलित मतदाताओं ने वोट किया था। इसकी एक बड़ी वजह बसपा के पूर्व नेताओं की सपा में मौजूदगी है।