लखनऊ. एक लड़की का सपना होता है कि उसकी शादी हो दुल्हन बनकर पति के साथ ससुराल जाए। पति, सास ससुर को अपने प्यार से एक डोरी में बांध ले अौर अपने ससुराल को मायके की तरह चहका दें। पर ये सपना तब चूर चूर हो जाता है जब तीन तलाक जैसी कुप्रथा सामने दीवार बनकर खड़ी हो जाती है। आज मुस्लिमों की आधी अबादी इस कुप्रथा को झेल रही है। एेसी ही अपनी एक कहानी लेकर आई है लखऩऊ की सुफीया।
सुफीया खान का निकाह 2004 में मोहम्मद इस्माइल खान से हुई। सुफीया बताती हैं कि कुछ दिन ही बीते थे कि ससुराल वालों ने चार पहिए गाड़ी की मांग कर ली। चार पहिए की गाड़ी न मिलने पर शौहर ने स्पीड पोस्ट द्वारा तीन तलाक दे दिया। दर-दर भटकी पर न्यान नहीं मिला। पुलिस ने जब तक कार्रवाई की तबतक ससुराल वाले घर पर ताला डालकर भाग चुके थे। सब कुछ हारने के बाद मैंने फैमली कोर्ट की मदद ली। अौर तब से लेकर अब तक मेरा मुकदमा कोर्ट में चल रहा है। शौहर से बात करने पर उसने शरीयत की बात कहकर मुझसे कहा गया कि एक बार तलाक देने के बाद उसे कबूल कर लेना होता है। अब तुम्हे नहीं रख सकता। कई सालों तक मैं लड़ती रही। रोड में आकर धरना प्रर्दशन करती रही। फिर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष शाइस्ता अंबर से मेरी मुलाकात हुई उन्होंने मेरी मदद की। आज भी वे मुझ जैसे हजारों बहिनों की मदद कर रही हैं। उनकी हिम्मत से हम सुप्रीम कोर्ट तक गए अौर तीन तलाक का मुद्दा उठाया। आज कानून पास हो गया है। ये कानून हम सब बहिनों को नई हिम्मत दे रहा है। आज सफलता मिली है।