
बेटी के भविष्य की चिंता हुई खत्म, सरकार की सुकन्या समृद्धि योजना से करें बेटी का भविष्य सुरक्षित, जानिये इसके लाभ
लखनऊ. अब माता पिता अपनी बेटी के भविष्य की चिंता करना छोड़ दें क्योंकि उनकी चिंता अब सरकार करेगी। भाजपा सरकार यूपी सहित देश भर की बेटियों के लिये सुकन्या समृद्धि योजना की शुरुआत की है। इसकी शुरुआत सबसे पहले 22 जनवरी 2015 को बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत की थी। इस योजना के तहत भारतीय डाक या किसी अधिकृत कमर्शिल बैंक की शाखा में खाता खोला जा सकता है। आप अपनी बेटी के जन्म और 10 वर्ष की आयु के बीच कभी भी खाता खुलवा सकते हैं। आपको अपनी हर बेटी के लिए अधिकतम दो खाते खोल सकते हैं। इस योजना के और भी बहुत सारे फायदें हैं। जानते हैं सुकन्या समृद्धि योजना के खास फायदों के बारे में।
मिलेगी इनकम टैक्स से छूट
यह एक छोटी बचत योजना है, जिस पर ऊँची ब्याज दर मिलती है। बल्कि यह छोटी बचत योजनाओं में सबसे अधिक ब्याज वाली योजना है। वर्तमान में इस योजना में 8.4% की शानदार ब्याज दर है। हालाँकि वित्त वर्ष 2015-16 में यह दर 9.2% थी, मगर सरकार ने इसे कई बार बदला है। मौजूदा नियमों के मुताबिक आप इस योजना में न्यूनतम 250 रुपये के निवेश से खाता खुलवा सकते हैं, जबकि इसमें वार्षिक अधिकतम निवेश सीमा 1.5 लाख रुपये है। एक खास बात जो इस योजना को विशेष बनाती है वो है इनकम टैक्स से छूट। इस योजना में मिलने वाला रिटर्न पूरी तरह से कर मुक्त है।
मैच्योरिटी के बाद भी जमा रकम पर ब्याज
इस योजना में निवेश की मैच्योरिटी अवधि आपकी बेटी की 21 वर्ष की आयु होती है। मगर इस योजना में एक बड़ा लाभ है कि मैच्योर होने के बाद भी इस खाते में जमा राशि पर ब्याज मिलता रहता है, जो बाकी बचत योजनाओं में नहीं मिलता। आप यह ब्याज तब तक हासिल कर सकते हैं, जब तक इस खाते को बंद न किया जाये। सुकन्या समृद्धि योजना खाते से बेटी की 18 साल की उम्र के बाद उसकी उच्च शिक्षा के लिए आप खाते में से 50 फीसदी तक राशि निकाल सकते हैं। इस योजना के तहत खुलवाये गये खाते को पूरे देश में आसानी से ट्रांसफर करवाया जा सकता है।
इन बातों का रखें ध्यान
किसी अनियमित खाते, जिसमें न्यूनतम राशि जमा नहीं की गई है, प्रति वर्ष 50 रुपये के जुर्माने के भुगतान पर चालू करवाया जा सकता है। इस खाते में आप नकद, चेक, डिमांड ड्राफ्ट आदि से पैसे जमा करवा सकते हैं। ध्यान रहे कि खाते में चेक या ड्राफ्ट से डाली गयी राशि खाते में क्लियर होने के बाद से उस पर ब्याज दिया जायेगा, जबकि ई-ट्रांसफर में डिपॉजिट के दिन से यह गणना शुरू कर दी जायेगी। खाताधारक की मृत्यु की स्थिति में डेथ सर्टिफिकेट दिखाकर खाता बंद करवाया जा सकता है और खाते में जमा रकम का भुगतान बच्ची के अभिभावक को ब्याज सहित किया जाता है।
Published on:
29 Nov 2019 11:37 am
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