लखनऊ

..जब पुलिसवालों ने यूपी डीजीपी सुलखान सिंह की एक नहीं सुनी-वीडियो

नीली बत्ती को लेकर डीजीपी का निर्देश नहीं मान रहें वरिष्ठ अधिकारी।

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Oct 26, 2017
Dgp Sulkhan Singh Blue Beacon

लखनऊ. उत्तर प्रदेश पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) सुलखान सिंह लखनऊ स्थित मुख्यालय में अपने ही अधिकारियों के सामने लाचार से नज़र आ रहे हैं। आलम यह हो गया है कि प्रदेश में अपराधियों के बीच खौफ पैदा करने वाले डीजीपी सुलखान सिंह की मुख्यालय में मौजूद अधिकारी ही सुनने को तैयार नहीं है। डीजीपी सुलखान सिंह ने बुधवार को नीली बत्ती पर रोक लगाने से जुड़ा आदेश जारी किया था। लेकिन यूपी के 75 जिलों के पुलिस अधिकारियों की छोड़िए, डीजीपी मुख्यालय में बैठने वाले पुलिस अधिकारी ही उस आदेश की धज्जियां उड़ा रहे हैं। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में भी वीआईपी कल्चर खत्म करने के लिए लाल-नीली बत्तियों के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी। लेकिन पुलिस को इससे दूर रखा गया था।

डीजीपी मुख्यालय में नीली बत्ती की शान
डीजीपी सुलखान सिंह ने बुधवार को अपर पुलिस महानिदेशक यातायात को लाला व नीली बत्ती के दुरूपयोग पर लगाम लगाने के लिए निर्देश दिए थे। डीजीपी सुलखान सिंह द्वारा निर्देशित किया गया था कि पुलिस अधिकारी व पुलिस की अापात स्थिति में इस्तेमाल होने वाली गाड़ियों पर नीली बत्ती का प्रयोग नहीं किया जाए। लेकिन डीजीपी सुलखान सिंह के इस आदेश की अवहेलना डीजीपी मुख्यालय से ही शुरु हो चुकी है। गुरुवार को तमाम अधिकारी डीजीपी मुख्यालय में पूर्व की तरह ही अपनी नीली बत्ती लगी सरकारी गाड़ियों में पहुंचे। नए निर्देश के मुताबिक अधिकारियों को बहुरंगी बत्तियां (फ्लेसर लाइट) का प्रयोग करना है। लेकिन अधिकारियों ने फ्लेसर लाइट का इस्तेमाल तो दूर पुरानी नीली बत्तियों को अपनी गाड़ी से उतारना जरुरी नहीं समझा।

सीनियर-जूनियर सबके सिर पर नीला ताज
डीजीपी के आदेश का असर मुख्यालय में ही होता नहीं दिखा। क्या सीनियर और क्या जूनियर ऑफिसर सबकी गाड़ी पर नीली बत्ती का ताज दिखा। डीजीपी मुख्यालय में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के लिए रिर्जव पार्किंग में भी कई आईपीएस की गाड़ी पर नीली बत्ती अब तक लगी हुई नज़र आ रही है। वहीं डिप्टी एसपी रैंक के अधिकारियों की गाड़ी पर पर नीली बत्ती लगी हुई दिखाई दी।

आईपीएस बोले "आदेश का उल्लघंन"
यूपी पुलिस महकमें में एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी ने पत्रिका से बातचीत में बताया कि डीजीपी सुलखान सिंह ने बुधवार को लाल व नीली बत्ती से जुड़ा आदेश जारी किया था, यदि इसके बाद भी कोई अधिकारी नीली बत्ती का प्रयोग कर रहा है तो यह डीजीपी के निर्देश का खुले तौर पर उल्लघंन है।

नीली बत्ती बैन के लिए डीजीपी का तर्क
डीजीपी सुलखान सिंह ने पुलिस विभाग के राजपत्रित और अराजपत्रित अधिकारियों समेत पुलिस वाहन पर नीली बत्ती के प्रयोग को ट्रैफिक नियमों के विरुद्ध बताया था। बुधवार को जारी निर्देश में कहा गया था कि केंद्रीय मोटरयान अधिनियम में हुए नए संशोधन के अनुसार किसी भी वाहन के अगले हिस्से पर लाल या नीली बत्ती का प्रयोग नहीं किया जा सकता है। इसके जगह बहुरंगी बत्तियां यानी फ्लेसर लाइट लगाने के निर्देश जारी किए गए।

फ्लेसर लाइट का होगा इस्तेमाल

डीजीपी के निर्देश के अनुसार पुलिस अधिकारियों के वाहन पर नीली बत्ती का प्रयोग नहीं होगा। इन नीली बत्तियों की जगह बहुरंगी बत्तियां यानी फ्लेसर लाइट का इस्तेमाल करने के निर्देश बुधावर को जारी कर दिए गए हैं। निर्देश मुताबकि राजपत्रित पुलिस अधिकारियों के वाहन पर 300 मिली मीटर और अराजपत्रित पुलिस अधिकारियों, यूपी डायल 100, आपात सेवा में शामिल वाहनों पर 1200 मिली मीटर लंबी बहुरंगी बत्तियां मानक के अनुसार लगाई जानी हैं।

पूरे देश में खत्म हुआ था ये कल्चर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने 1 मई 2017 पूरे देश में लाल और नीली बत्ती के अनावश्य इस्तेमाल पर रोक लागू कर दी थी। मोटर व्हीकल नियमों में हाल में हुए बदलाव के बाद केंद्र व राज्य सरकार के मंत्रियों द्वारा भी लाल बत्ती के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई थी। यहां तक की रोक के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लालबत्ती का इस्तेमाल अपने सरकारी वाहन पर बंद कर दिया था।

नीली बत्ती भी चुनिंदा के लिए
मोटर व्हीकल नियमों में नीली बत्ती के प्रयोग को भी सीमित किया गया। नियम के तहत नीली बत्ती का प्रयोग केवल फायर ब्रिगेड, एम्बुलेंस, पुलिस व आपात सेवा में इस्तेमाल होने वाले वाहन पर ही किया जा सकता है। लेकिन डीजीपी सुलखान सिंह ने पुलिस द्वारा नीली बत्ती के प्रयोग के संबंध में नए संशोधन का हवाला देते हुए इसके जगह बहुरंगी बत्तियों (लाल, नीली, सफेद) का इस्तेमाल करने के निर्देश दिए।

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Updated on:
26 Oct 2017 06:37 pm
Published on:
26 Oct 2017 06:21 pm
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