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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यूपी में बैंड बाजा पर रोक

शादियों के सीजन में अब नहीं सुनाई देगी डीजे का का धमाल, शादी में अगर डांस ना हो डीजे ना बजे तो मजा ही नहीं आता लेकिन अब नहीं होगा वो धमाल इसके लिए आज भी दोस्तों की टोली इन्तजार करती हैं

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लखनऊ

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Ritesh Singh

Dec 11, 2022

रोजी-रोटी का संकट

रोजी-रोटी का संकट

'बैंड-बाजा' के बिना बारात क्या है और ना जाने शादियां कैसी होगी। सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के बाद, योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार ने लाउडस्पीकरों और उच्च डेसिबल ध्वनियों पर सख्ती से प्रतिबंध यानी (बंद करने का आदेश) लगा दिया है।

शादियों या अन्य समारोहों में हाई डेसिबल संगीत यानी (120 डेसिबल से ऊपर का तेज शोर) या डीजे बजाने के लिए, मजिस्ट्रेट से अनुमति लेनी होगी, फिर स्थानीय पुलिस स्टेशन और वहां से ट्रैफिक पुलिस के पास फॉर्म ले जाना होगा।फिर भरे हुए लेटर फार्म को वापस मजिस्ट्रेट के पास ले जाना होगा, जो आप को आदेश देगा की आप नियम से है और अंतिम मुहर लगाएगा।

शादी से एक दिन पहले किसी तरह अनुमति ( परमिशन ) प्राप्त करने वाले विकास श्रीवास्तव ने कहा, "मुझे एक सप्ताह तक अनुमति लेने के लिए इधर-उधर भागना पड़ा। ज्यादातर समय, मजिस्ट्रेट मौजूद नहीं थे, फिर स्थानीय पुलिस अधिकारियों से मिलने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ी। उन्होंने कहा कि अगर आप ने सवाल उठाए तो जवाब तुरंत मिल जाता है की हमारे पास और भी काम है। जो इससे पहले होना जरुरी हैं।

नहीं मिली थी परमिशन

प्रयागराज के सुधांशु मिश्रा इतने भाग्यशाली नहीं थे और उन्हें 4 दिसंबर को अपनी बारात के लिए इजाजत नहीं मिली। उन्होंने कहा, "मेरे दोस्तों ने मेरी मदद करने का फैसला किया और शादी में मेरे लिए गिटार बजाया। बेशक हमें जश्न से डांस को हटाना पड़ा।"

बैंड बाजा वालो पर फिर से संकट

इजाज़त के अलावा बारात के लिए बैंड होना भी एक बड़ी समस्या है। कोविड-19 महामारी के दौरान, बैंड व्यवसाय पर बहुत ही गलत असर पड़ा है और अधिकांश बैंड सदस्यों ने अन्य पेशों की ओर रुख कर लिया। दीपक ब्रास बैंड के मालिक दीपराज ने कहा, "हमारे बैंड की लगभग आधी ताकत बची है। हमारे ड्रमर्स ने हमें छोड़ दिया और इसी तरह हमारे पास केवल एक सैक्सोफोन बजाने वाला ही बचा है। हम कम से कम लोगों के साथ काम कर रहे है क्योंकि नए लोग इस व्यवसाय में शामिल नहीं होना चाहते क्योंकि उन्हें यह जोखिम भरा लगता है।"

दीपराज ने कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार, महामारी के दौरान कम से कम नौ बैंडों का कारोबार ठप हो गया है। नेचुरल रूप से, इस सीजन में मांग बहुत ज्यादा है, जहां असामान्य रूप से बड़ी संख्या में शादियां हो रही हैं। एक अनुमान के मुताबिक अकेले लखनऊ में हर दिन 1,000 से 1,500 शादियां हो रही हैं।


बैंड बाजा बारात पर बोले पंडित


पंडित संदीप पांडेय ने कहा, "ऐसा इसलिए है क्योंकि कई शादियों को महामारी के दौरान स्थगित कर दिया गया था और इसलिए यह बहुत बड़ा बैकलॉग है। लोगों को वेन्यू नहीं मिल रहे हैं और शहर से लगभग 20 किलोमीटर दूर फार्म हाउस में शादियां हो रही हैं।"


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