7 फ़रवरी 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

यूपी के एक लाख शिक्षकों को बड़ी राहत, सुप्रीम कोर्ट ने टीईटी को बताया महज क्वालीफाइंग

टीईटी अंक को वेटेड देना जरूरी नहीं है। सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला यूपी के लगभग उन एक लाख शिक्षकों के लिए राहत भरी खबर है जिनकी नियुक्ति TET (Teacher Eligibility Test) और एकेडमिक क्वालिटी प्वाइंट के आधार पर हुई थी।

2 min read
Google source verification

image

Nitin Srivastva

Jul 26, 2017

lko

lko

लखनऊ. अच्छी शिक्षा के लिए योग्य शिक्षकों की जरूरत बताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यूपी में शिक्षा मित्रों के सहायक अध्यापक पद पर समायोजन को निरस्त करने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया है। वहीं दूसरी तरफ यूपी के लगभग एक लाख शिक्षकों को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत भी दी है। ये राहत उन शिक्षकों को मिली है जिनकी नियुक्ति टीईटी और एकेडमिक क्वालिटी प्वाइंट (शैक्षणिक योग्यताओं के अंक) के आधार पर हुई थी।


देखें वीडियो:




टीईटी केवल क्वालीफाइंग

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शिक्षकों की नियुक्ति के लिए TET (Teacher Eligibility Test) महज क्वालिफाइंग है। टीईटी अंक को वेटेड देना जरूरी नहीं है। सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला यूपी के लगभग उन एक लाख शिक्षकों के लिए राहत भरी खबर है जिनकी नियुक्ति टीईटी और एकेडमिक क्वालिटी प्वाइंट (शैक्षणिक योग्यताओं के अंक) के आधार पर हुई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार के संशोधित प्रावधान और केंद्र सरकार की अधिसूचना में कोई अंतर्विरोध नहीं है क्योंकि 11 फरवरी 2011 में राष्टीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) की अधिसूचना में टीईटी अंक को वेटेज देना महज दिशा-निर्देश है।


टीईटी पास बने रहेंगे शिक्षक

शीर्ष अदालत ने कहा कि कोर्ट के निर्देश के मुताबिक टीईटी पास नियुक्त हुए 72,825 शिक्षक अपने पद पर बने रहेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने इन नियुक्तियों में किसी तरह का कोई भी दखल देने से साफ इनकार कर दिया है। आपको बता दें कि इन सभी शिक्षकों की नियुक्ति टीईटी अंक के आधार पर हुई थी। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि बाकी रिक्त पदों पर नियुक्तियों के लिए राज्य सरकार कानून के तहत विज्ञापन निकाल सकती है।


ये था पूरा मामला

शिवकुमार पाठक केस में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने प्रदेश सरकार द्वारा बेसिक शिक्षक अध्यापक सेवा नियमावली में किए गए 15वें संशोधन को रद्द कर दिया था। 15वें संशोधन में सरकार ने सहायक अध्यापकों की नियुक्ति के लिए क्वालिटी प्वाइंट मार्क्स (शिक्षिक गुणांक) को आधार बनाया था। जबकि हाईकोर्ट ने टीईटी प्राप्तांक को एनसीटीई की 11 फरवरी 2011 की अधिसूचना के क्लाज 9 (बी) के अनुसार अनिवार्य मानते हुए 15वां संशोधन रद्द कर दिया था। शिवकुमार पाठक केस के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में एनसीटीई की अधिसूचना के क्लाज 9 (बी) को बाध्यकारी नहीं माना है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि टीईटी प्राप्तांक को वरीयता देने संबंधी एनसीटीई की गाइडलाइन एक प्रकार का सुझाव है। यह सरकार पर बाध्यकारी नहीं है। सरकार चाहे तभी टीईटी प्राप्तांक को वरीयता दे सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने 15वें संशोधन को सही करार दिया है। इसका साफ मतलब यह है कि टीईटी मेरिट पर की गई 72,825 सहायक अध्यापकों की नियुक्तियां भी गलत नहीं हैं और न ही 15वें संशोधन पर क्वालिटी प्वाइंट मार्क्स पर नियुक्तियां करने का फैसला ही गलत है। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से दोनों पक्षों को बड़ी राहत मिली है।


इन नियुक्तियों पर था संकट

15वें संशोधन के आधार पर की गई जिन नियुक्तियों पर खतरा था उनमें 10000 सहायक अध्यापक भर्ती, 10000 उर्दू सहायक अध्यापक भर्ती, 15000 सहायक अध्यापक भर्ती, 20000 उर्दू सहायक अध्यापक भर्ती, 16448 सहायक अध्यापक भर्ती, 12000 सहायक अध्यापक भर्ती, 29334 जूनियर हाईस्कूलों में सहायक अध्यापक भर्ती शामिल हैं। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद नियुक्तियों पर से संकट हट गया है और इन सभी शिक्षकों को बहुत बड़ी राहत मिली है।