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यूपी में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग वाली याचिका खारिज, CJI बोले- ज्यादा बहस की तो जुर्माना लगा देंगे

Highlights: -तमिलनाडु के रहने वाले वकील ने सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की थी -हाथरस मामले का हवाला देते हुए कहा गया कि यूपी में मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है -चीफ जस्टिस ने कहा कि याचिकाकर्ता ने इस संबध में किसी तरह की रिसर्च नहीं की है

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लखनऊ

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Rahul Chauhan

Feb 09, 2021

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पत्रिका न्यूज नेटवर्क

लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग को लेकर दायर की गई याचिका को खारिज कर दिया है। इतना ही नहीं, कोर्ट ने इस पर नाराजगी जाहिर करते हुए याचिकाकर्ता को फटकार लगाई और कहा कि अगर इस पर ज्यादा बहस करेंगे तो भारी जुर्माना लगा देंगे। दरअसल, तमिलनाडु के रहने वाले वकील सीआर जयासुकिन ने सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की थी। जिसमें हाथरस मामले का हवाला देते हुए कहा गया कि उत्तर प्रदेश में मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है, लिहाजा प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाया जाए। जिसे खारिज करते हुए चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने कहा कि याचिकाकर्ता ने इस संबध में किसी तरह की रिसर्च नहीं की है।

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बता दें कि याचिकाकर्ता सीआर जयासुकिन ने कहा था कि 14 सितंबर 2020 को हाथरस में युवती के साथ कथित दुष्कर्म और हत्या के मामले को लेकर पूरे देश में आक्रोश है और इस मामले को लेकर देश में कई जगह प्रदर्शन हुए हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वत: इस मामले में संज्ञान लिया था और कहा था कि अपराधियों ने पीड़िता के साथ क्रूरता दिखाई और इसके बाद जो कुछ भी हुआ, अगर वह सच है तो उसके परिवार के दुखों को दूर करने की बजाए उनके जख्मों पर नमक छिड़कने के समान है। मृतका के शव को उनके घर ले जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।

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याचिकाकर्ता ने कहा कि हाईकोर्ट ने कहा था कि ये केस सार्वजनिक महत्व और सार्वजनिक हित का है क्योंकि इसमें राज्य के उच्च अधिकारियों पर भी आरोप लगे हैं। जिसके परिणामस्वरूप न केवल मृतक पीड़िता बल्कि उसके परिवार के लोगों की भी मूल मानवीय और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है। उधर, याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस ने इसे खारिज कर दिया और याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुए कहा कि अगर वह ज्यादा बहस करेंगे तो उन पर भारी जुर्माना लगा दिया जाएगा।