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स्वामी प्रसाद मौर्य ने लॉन्च किया अपना नया राजनीतिक दल ‘राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी’,अखिलेश के ‘पीडीए’ का जवाब RSSP

Swami Prasad Maurya New Party RSSP: स्वामी प्रसाद मौर्य गुरुवार को दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में अपनी नई पार्टी का एलान किया, जिसका नाम 'राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी' है।

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लखनऊ

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Anand Shukla

Feb 22, 2024

Swami Prasad Maurya launches new political party Rashtriya Shoshit Samaj Party answer to Akhilesh PDA

Swami Prasad Maurya launches new political party Rashtriya Shoshit Samaj Party

Swami Prasad Maurya New Party RSSP: लोकसभा चुनाव से पहले स्वामी प्रसाद मौर्य ने गुरुवार को अपने नए राजनीतिक दल 'राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी' लॉन्च कर दी। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में एक कार्यक्रम के दौरान पार्टी की घोषणा की गई। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में स्वामी प्रसाद मौर्य के समर्थक मौजूद रहे। दरअसल, उन्होंने सपा (Samajwadi Party) का साथ छोड़ने के साथ ही साफ कर दिया था कि वो नए राजनीतिक दल का गठन करेंगे।

बीते दिनों स्वामी प्रसाद मौर्य ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) की राजनीतिक विचारधारा पर आपत्ति जताते हुए सपा से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद से यह चर्चा शुरू हो गई थी कि अब उनका अगला राजनीतिक कदम क्या होगा? लेकिन, उन्होंने यह कहकर इन सभी चर्चाओं पर ब्रेक लगा दिया था कि वह किसी के साथ नहीं जा रहे हैं, बल्कि अपनी अलग पार्टी का गठन करेंगे।

उधर, अखिलेश यादव से जब स्वामी प्रसाद मौर्य के सपा से इस्तीफा देने के बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि लोग अपने फायदे के लिए हमारे पास आते हैं और जब उनका काम निकल जाता है, तो वो चले जाते हैं।

यह भी पढ़ें: सपा के राज्यसभा उम्मीदवारों ने पार्टी के अंदर खड़ा किया बवंडर, दो राष्ट्रीय महासचिव ने छोड़ी साइकिल की सवारी, पल्लवी पटेल भी खफा


वहीं, स्वामी प्रसाद ने अपने इस्तीफे के पीछे की वजह के बारे में बताते हुए कहा था कि अखिलेश यादव अब पिछड़ों की बात नहीं करते हैं, जिसे लेकर मेरा उनसे मतभेद है न की मनभेद। स्वामी ने कहा कि जिस दिन अखिलेश को अपनी गलती का एहसास होगा, उस दिन मैं दोबारा सपा में जाऊंगा।

बता दें कि अखिलेश ने स्वामी को पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी थी, लेकिन स्वामी पहले महासचिव के पद से इस्तीफा दिया, फिर एमएलसी और इसके बाद उनका सपा से भी मोहभंग हो गया। खैर, अब उन्होंने अपने लिए नई राजनीतिक स्क्रिप्ट तैयार कर ली है, जिसे वो आज मूर्त रूप देने जा रहे हैं।


बता दें कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में स्वामी प्रसाद मौर्य एक पुराना नाम है। 80 के दशक में स्वामी ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी पारी शुरू की था। लोकदल से उन्होंने अपने सियासी सफर का आगाज किया था, लेकिन उनके राजनीतिक राह को नया मोड़ तब मिला, जब उन्होंने बसपा का दामन थामा। बसपा ने उन्हें मंत्री बनाया। वो मायावती (Mayawati) के करीबी माने जाते थे। इसके बाद मायावती ने उन्हें विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तक की जिम्मेदारी सौंपी।

इसके बाद मौर्य बीजेपी (BJP) में शामिल हो गए, कुछ दिनों तक रहे। यहां भी उन्हें कई बड़ी जिम्मेदारी मिली। इसके बाद वो सपा के बैनर तले आए, जहां उन्हें कई बड़ी जिम्मेदारी मिली, लेकिन उनका यहां से भी मोहभंग हो चुका है।

बता दें कि स्वामी प्रसाद मौर्य ऐसे वक्त में अपनी पार्टी बनाने जा रहे हैं, जब लोकसभा चुनाव सिर पर है। ऐसे में बहुत मुमकिन है कि वो मौर्य, कुशवाहा और ओबीसी समुदाय के लोगों के पक्ष में अपनी बात रखते हुए दिखेंगे। ध्यान दें, स्वामी ओबीसी समुदाय के हितों पर खुलकर अपनी बात रखते हैं और खुद को ओबीसी समुदाय का पैरोकार बताते हैं।