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क्या सवणों की नेता बन पाएंगी स्वाति सिंह ?

उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव को देखते हुए स्वाति को बड़ी जिम्मेदारी दिया जाना भाजपा का बड़ा चुनावी दांव माना जा रहा है। खुद दयाशंकर सिंह ने भी जेल से रिहा होने के बाद मायावती को अपनी पत्नी स्वाति सिंह के खिलाफ लडऩे की खुली चुनौती दी थी।

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Mahendra Pratap Singh

Oct 08, 2016

SWATI SINGH

SWATI SINGH

लखनऊ - बसपा सुप्रीमों मायावती की लखनऊ में ९ अक्टूबर को बड़ी रैली है। बसपा संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि में हजारों बसपाई जुट रहे हैं। इस रैली के पहले भाजपा ने बड़ा दांव खेला है। मायावती को चुनौती देकर चर्चा में आईं स्वाति सिंह को उत्तर प्रदेश में भाजपा महिला मोर्चा अध्यक्ष बनाया गया है। आज से छह माह पहले स्वाति सिंह को कोई नहीं जानता था। लेकिन अपने पति और भाजपा नेता दयाशंकर सिंह के मायावती से जुड़े विवाद के बाद यह एकाएक सुर्खियों में आईं। दयाशंकर सिंह को बसपा सुप्रीमो मायावती के खिलाफ अपशब्द कहने के बाद भाजपा ने छह साल के लिए बाहर का रास्ता दिखा दिया था।

इस दौरान बसपा कार्यकर्ताओं ने लखनऊ में दयाशंकर सिंह के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया था और सिंह के परिवार के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं। इसके बाद स्वाति सिंह ने बसपा के खिलाफ मोर्चा संभाला था और अपने तीखे तेवर दिखाए थे।

भाजपा का क्षत्रिय कार्ड
अब भाजपा स्वाति सिंह को तुरूप के पत्ते की तरह इस्तेमाल करना चाहता है। उप्र में सत्ता के लिए छटपटा रही भाजपा को स्वाति सिंह में सवर्ण महिलाओं को मायावती के खिलाफ भडक़ाने की चिंगारी दिखती है। इसलिए वही स्वाति का इस्तेमाल क्षत्रिय कार्ड के रूप में करना चाहती है। स्वाति ने खुद पर और उनकी बेटी के खिलाफ दिए गए कथित बयान का खुलकर विरोध करते हुए हल्ला बोला था, जिसके बाद बीजेपी के लिए एक तरीके से पूरी बाजी पलट गई थी। भाजपा को लगता है कि मायावती के खिलाफ क्षत्रिय चेहरे के रूप में स्वाति का इस्तेमाल किया जा सकता है। क्योंकि जिस समय दयाशंकर का मामला गरमाया था स्वाति सिंह के मामले में बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने करीबी माने जाने वाले पार्टी महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीकी को भी अनर्गल टिप्पणी करने पर फटकार लगाई थी।

उच्च शिक्षित हैं स्वाति
मायावती को रक्षात्मक कर देने वाली स्वाति सिंह हैं एमबीए, एलएलबी और एलएलएम हैं। मूल रूप से स्वाति सिंह का परिवार पूर्वी उत्तर प्रदेश के बलिया जिले का रहने वाला है। उनका गांव रामनगर दोआबा है। हालांकि स्वाति के जीवन के शुरुआती दिन बलिया के बजाए बिहार में बीते। बोकारो जिले (वर्तमान में झारखंड) में एक अगस्त 1978 को उनका जन्म हुआ। स्वाति की मां का नाम आशा सिंह है। झारखंड की औद्योगिक नगरी स्टील सिटी बोकारो की गलियों में स्वाति का बचपन गुजरा। यहीं से उन्होंने शुरुआती पढ़ाई की। दरअसल, स्वाति के पिता वीरेंद्र रघुवंशी स्टील सिटी बोकारो में नौकरी करते थे। वह भारत सरकार के उपक्रम हिंदुस्तान स्टील प्लांट (एचएससीएल) में कार्यरत थे।

यूं हुई थी दयाशंकर से मुलाकात
उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए स्वाति ने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का रुख किया। लखनऊ यूनिवर्सिटी से स्वाति ने पहले स्नातक और फिर एमबीए, एलएलबी और एलएलएम किया। लखनऊ विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान दयाशंकर सिंह से उनकी मुलाकात हुई। धीरे-धीरे यूनिवर्सिटी के गलियारों में दोनों के बीच मुलाकातों का दौर बढ़ा और ये लव अफेयर में तब्दील हो गया। छात्र राजनीति में सक्रिय रहे दयाशंकर सिंह ने 1999 में लखनऊ विश्वविद्यालय छात्रसंघ महामंत्री का चुनाव जीता था। पारिवारिक सहमति के बाद स्वाति सिंह और दयाशंकर सिंह की 18 मई 2001 को शादी हो गई। स्वाति के भाई पुनीत कुमार सिंह लखनऊ में ही रहते हैं और वो निजी कारोबार से जुड़े हुए हैं।

राजनीति में नहीं थी कोई रुचि
स्वाति के भाई पुनीत बताते हैं स्वाति की राजनीति में कभी भी कोई दिलचस्पी नहीं थी। कई बार वो पढ़ाई-लिखाई में गरीब बच्चों की मदद के लिए जरूर सहयोग करती रही हैं। स्वाति ने शिक्षा क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए कुछ अरसे के लिए अध्यापन का कार्य भी किया। स्वाति के भाई पुनीत के मुताबिक उन्होंने लखनऊ यूनिवर्सिटी के मैनेजमेंट विभाग में अतिथि व्याख्याता (गेस्ट फैकल्टी) के तौर पर अपनी सेवाएं दीं। स्वाति सिंह दो बच्चों (एक बेटा-बेटी) की मां हैं। स्वाति ने आरोप लगाया था कि बसपा नेताओं की अभद्र भाषा से उनकी 12 साल की बेटी डरी हुई है। ट्विटर पर हैशटैग बेटी के सम्मान में ट्रेंड करता दिखा था। स्वाति की बेटी ने कहा था, नसीम अंकल, मुझे बताइए कहां आना है आपके पास पेश होने के लिए।

बहरहाल, उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव को देखते हुए स्वाति को बड़ी जिम्मेदारी दिया जाना भाजपा का बड़ा चुनावी दांव माना जा रहा है। खुद दयाशंकर सिंह ने भी जेल से रिहा होने के बाद मायावती को अपनी पत्नी स्वाति सिंह के खिलाफ लडऩे की खुली चुनौती दी थी। दयाशंकर सिंह ने कहा था कि मायावती चुनाव लडऩे के लिए उत्तर प्रदेश में कोई भी सामान्य सीट चुन लें मैं अपनी पत्नी को वहीं से चुनाव लड़ाऊंगा। इसके अलावा विवाद गरमाने के बाद से स्वाति सिंह और दयाशंकर सिंह ने क्षत्रिय महासभा के साथ यूपी में कई जगहों पर सभा भी की है। अब देखना होगा स्वाति सिंह भाजपा के पक्ष में कितने क्षत्रिय वोटों को तब्दील करा सकती हैं।

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