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बोले शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष, अय्याश थे मुगल

उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल बोर्ड के अध्यक्ष सैयद वसीम रिजवी ने कहा है कि ताजमहल प्यार का प्रतीक हो सकता है, पूजा का नहीं।

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लखनऊ

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Laxmi Narayan

Oct 18, 2017

syed waseem rizvi

लखनऊ. ताजमहल को लेकर चल रहे सियासी घमासान के बीच अब ताजा बयान आया है उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन सैयद वसीम रिजवी का। उन्होंने कहा है कि एक-दो मुगलों को छोड़कर सभी अय्याश थे, उन्हें मुसलमान अपना आदर्श ना मानें। सैयद रिजवी ने अपने बयान में कहा है - ' ताजमहल प्यार का प्रतीक हो सकता है, लेकिन पूजा का नहीं। एक-दो को छोड़कर बाकी सभी मुगल अय्याश थे। मुसलमान उन्हें अपना आदर्श ना मानें।’ दरअसल ताजा विवाद उत्तर प्रदेश के सरधना से भाजपा विधायक संगीत सोम के बयान के बाद खड़ा हुआ है।

संगीत सोम ने ताज को बताया था धब्बा

विधायक संगीत सोम ने सोमवार को एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि ताजमहल भारतीय संस्कृति पर धब्बा है। सोम ने यह भी कहा था कि यह गद्दारों ने बनाया था, इसे इतिहास में दर्ज नहीं होना चाहिए। संगीत सोम के इस बयान के बाद विवाद खड़ा हो गया था। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले पर विधायक से सफाई मांगी तो भारतीय जनता पार्टी ने संगीत सोम के बयान से किनारा कर लिया था। ताज महल को लेकर संगीत सोम के बयान से पूर्व पिछले दिनों पर्यटन विभाग के बुकलेट से ताजमहल की तस्वीर गायब होने पर भी खूब बवाल मचा था। तब सरकार ने सफाई दी थी कि ताज महल के सुंदरीकरण के लिए सरकार एक बड़े प्रोजेक्ट की तैयारी में हैं।

रिजवी ने की राम मूर्ति निर्माण के प्रस्ताव की सराहना

इन सबके बीच जैसे ही विवाद थम रहा था कि संगीत सोम के बयान ने इस विवाद को नए सिरे से तूल दे दिया। अब इस विवाद में कूदते हुए उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल बोर्ड के अध्यक्ष सैयद वसीम रिजवी ने कहा है कि ताजमहल प्यार का प्रतीक हो सकता है, पूजा का नहीं। उन्होंने आगे कहा कि राम की मूर्ति का विरोध होना बहुत ही दुखदायी है। अयोध्या में राम मंदिर के प्रस्ताव को उन्होंने अच्छा कदम बताया है। साथ ही अयोध्या को हिंदू विरासत का केंद्र बताया है। रिजवी आगे कहते हैं कि जब मायावती ने खुद की मूर्ति बनाई थी, तब किसी ने विरोध नहीं किया था। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि समझ में नहीं आ रहा कि राम की मूर्ति को लेकर इतना विवाद क्यों है?’

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