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कोर्ट में दाखिल हुई याचिका, विवाहित मुस्लिम धोखा करे तो महिला कहां जाए ?

मुस्लिम व्यक्ति पर आईपीसी की धारा 494 लागू नहीं होती तो वह पुरष कह सकता है कि उसने कोई अपराध ही नहीं किया और धोखे का परिणाम सिर्फ औरत को ही भुगतना पड़ता है।

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Dikshant Sharma

Oct 01, 2016

High Court relief those People suffering from wall

High Court relief those People suffering from wall..


लखनऊ।
मुस्लिम पुरुष अगर पहले से शादी शुदा होने की जानकारी छुपा कर शादी करता है तो धोखा खाई महिला उसके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं कर सकती। इस मुद्दे को उठाते हुए अधिवक्ता डॉ. सैयद रिजवान अहमद ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में याचिका दायर की है। डॉ सैयद ने अपनी याचिका में लिखा है कि देश का कोई गैर मुस्लिम नागरिक अगर पहले से शादीशुदा हो और वो ये बात छुपा कर दूसरी शादी करले तो दूसरी पत्नी उस पुरुष को 10 साल तक की सजा दिलवा सकती है। लेकिन मुस्लिम पुरुष यही करे तो महिला कोई कानूनी कार्रवाई नहीं कर सकती। ऐसे में वो क्या करे ?

डॉ सैयद ने हाल ही में अपनी पीएचडी पूरी की है। डॉ. सैयद ने याचिका में कहा है कि 1955 में हिंदू मैरिज एक्ट बनने से हिंदू महिलाओं को इस तरह के अन्याय से बचाया जा सकता है लेकिन मुस्लिम महिलाओं के पास ऐसा अधिकार नहीं है।

-आईपीसी की धारा 494 कहती है कि अगर कोई व्यक्ति एक से अधिक विवाह करता है तो दूसरा विवाह शून्य होता है।

-अगर उस आदमी की पहली पत्नी उसके साथ है, तो जिस महिला से दूसरी शादी की गई, वह आदमी पर केस कर उसे सात साल की जेल की सजा दिलवा सकती है।

-धारा 495 कहती है कि अगर कोई व्यक्ति आईपीसी 494 में दिया हुआ अपराध करता है और अपने होने वाली पत्नी से पिछली शादी छिपाता है तो ऐसी स्थिति में होने वाली या नई पत्नी चाहे तो एफआईआर कर आदमी को 10 साल की जेल करवा सकती है।

-ये अधिकार हिन्दू, सिख और बौद्ध समुदाय की महिलाओं को राहत देता है।

वहीं दूसरी ओर मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड का कानून अलग है और मुस्लिम व्यक्ति को दूसरा, तीसरा विवाह करना जायज है। डॉ सैयद ने कहा कि चूंकि मुस्लिम व्यक्ति पर आईपीसी की धारा 494 लागू नहीं होती तो वह पुरष कह सकता है कि उसने कोई अपराध ही नहीं किया और इस धोखे का परिणाम सिर्फ औरत को ही भुगतना पड़ता है। तो ऐसे में क्या तलाक देने भर से इस धोखे की भरपाई हो जाती है।