लखनऊ.एक समय खूबसूरत बगीचों से घिरा आलमबाग गेटवे रानी के महल का मुख्य द्वार हुआ करता था।इसे चन्दर नगर गेट भी कहते हैं। हालांकि, इसकी मौजूदा स्थिति बेहद दुखद है। चन्दर नगर गेट मौजूदा समय में खंडर बनता जा रहा है। आलमबाग स्तिथ चन्दर नगर गेट का आलम कुछ यूं है कि वहां नवाबी संस्कृति होते हुए भी नहीं दिखती है। लोग उसे पान की पीक के रंग से रंग रहे हैं। इसके अलावा यह संरक्षित स्मारक कई दुकानों औरसब्जीस्टालोंके अतिक्रमण के भेंट भी चढ़ चुका है।
जाने चन्दरनगर गेट का इतिहास
आलमबाग का इतिहासभीखास महलके रूप मेंजाना जाता था। नवाबवाजिदअली ने वर्ष1847-1856के दौरानअपनी पत्नीआलमआरा के लिए यह शाहीद्वारा बनवाया था। वहां स्थित आलमबाग महलका निर्माण भी इसी केसाथ शुरू हुआ था।उस दौरान इसके चारों ओर सुंदरबगीचे हुआ करते थे। यह गेट आर्किटेक छोटेखानद्वारा डिजाइनकिया गया था। उस टाइम इसे एकविशालप्रवेश द्वारके रूप मेंजाना जाता था।
महलऔरगेटदोनों इमारतें लखौरी ईंटोंसे बनीहैं।दो मंजिलामहल में विशालहॉल औरकमरे शामिल हैं।महलकी आंतरिक दीवारों कोएक बारफूलों की डिजाइनके साथ सजाया गया था लेकिन आज स्थिति खस्ताहालहै। साथ ही आजादी के बाद पाकिस्तान से पलायन करने वाले शरणार्थियों के परिवारों के निवास के रूप में भी यह प्रयोग किया गया था।
स्मार्ट सिटी में होगा इसका संरक्षण स्मार्ट सिटी के अंतर्गत आलमबाग स्थित चन्दर नगर गेट को भी अब विरासतस्मारक के रूप में देखा जायेगा। इसका नवीनीकरण कर इसको अन्य ऐतिहासिक स्मारकों की श्रेणी में शामिल किया जाएगा। जल्द ही इस पर नगर निगम की कंसलटेंट फर्म द्वारा विचार कर प्रस्ताव पेश किया जाएगा।
उम्मीद लगाई जा रही है कि इस नवाबी संस्कृति में एक बार फिर जान देखी जा सकेगी। रात में रंगीन लाइटों के बीच इस गेट का नज़ारा अलग ही होगा।