
एनएसएसओ के राष्ट्रीय सर्वेक्षण की 1 जुलाई से होगी शुरुआत, 31 दिसंबर तक जुटाए जायेंगे आंकड़े
लखनऊ. भारत सरकार के सांख्यिकीय एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय (क्षेत्र संकार्य प्रभाग) के 11 से 14 जून तक के प्रशिक्षण कार्यक्रम की लखनऊ में शुरुआत हुई। सांख्यिकीय एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन 1 जुलाई 2018 से 31 दिसंबर 2018 के मध्य राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण के माध्यम से पेयजल, स्वच्छता, आरोग्यता एवं आवासीय स्थिति तथा दिव्यांगजन का सर्वेक्षण कर संबन्धित विषयों पर आंकड़ों का संग्रहण किया जायेगा। इस सम्बन्ध में क्षेत्र कर्मियों को प्रशिक्षण देने के लिए क्षेत्रीय कार्यालय स्तर पर शुरू हुए चार दिवसीय प्रशिक्ष कार्यक्रम में मध्यांचल तथा क्षेत्रीय कार्यालय लखनऊ के साथ उपक्षेत्रीय कार्यालय कानपुर, गोण्डा, फतेहपुर तथा झांसी से आये हुए अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
प्रशिक्षण में शामिल रहे अफसर
प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय ( एनएसएसओ) मध्यांचल लखनऊ के उप महानिदेशक एके मिश्र ने किया। प्रशिक्षण शिविर में मध्यांचल क्षेत्र के निदेशक प्रवीण शुक्ला, उत्तर प्रदेश के अर्थ और संख्या निदेशालय के निदेशक के निदेशक जीएस कटियार, नई दिल्ली के क्षेत्र संकार्य प्रभाग मुख्यालय के उप निदेशक रोहित मौर्य उपस्थित रहे। अपने उद्घाटन भाषण में एके मिश्र द्वारा सर्वेक्षण की संकल्पनाओं, परिभाषाओं एवं प्रक्रियाओं पर विस्तार से चर्चा की गयी।
हर साल आंकड़े जुटाता है एनएसएसओ
एनएसएसओ की स्थापना 1950 में हुई थी। हर साल यह कार्यालय राज्य सरकारों के साथ मिलकर विभिन्न सामाजिक व आर्थिक पहलुओं जैसे कि पारिवारिक उपभोक्ता व्यय, रोजगार एवं बेरोजगारी, स्वास्थय, शिक्षा, विकलांगता, किसानों की स्थिति, भूजोत, ग्रामीण ऋणग्रस्तता, अनिगमित गैर कृषि उद्यम इत्यादि पर आँकड़े एकत्रित करता है। सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षणों के अतिरिक्त यह कार्यालय कृषि, उद्योग, मूल्यों (उपभोगता मूल्य सूचकाँक, थोक मूल्य सूचकाँक, ग्रामीण मूल्य सूचकाँक), नगरीय ढांचा सर्वेक्षण इत्यादि पर भी आँकडे एकत्र करता है।
विभिन्न विषयों पर जुटाए जायेंगे आंकड़े
आगामी 76वें दौर में प्रतिदर्श सर्वेक्षण का कार्य दिनांक 01 जुलाई 2018 से प्रारम्भ होगा, जिसमें दो प्रकार के प्रश्नावली प्रारूपों का प्रयोग किया जायेगा। एक प्रश्नावली पेयजल, स्वच्छता एवं आवासीय स्थिति से सम्बन्धित होगी तथा अन्य प्रारूप दिव्यांगजनों की शैक्षणिक तथा सामाजिक स्थिति से सम्बन्धित होगी। पेयजल स्वच्छता तथा आवासीय स्थिति सर्वेक्षण का उद्द्येश्य विभिन्न ग्रामीण व नगरीय क्षेत्रोें में आवास की स्थिति जैसे आवास का आकार, प्रकार, कमरों की संख्या तथा आवास में पेयजल, शौचालय, स्नानगृह की व्यवस्था इत्यादि के विषय में जानकारी एकत्र करना है। साथ ही आवासीय ईकाई के सूक्ष्म पर्यावरण जैसे जल निकास, कचरे का निस्तारण, मच्छरों-मवेशियों तथा वर्ष भर में होने वाली संक्रमण बीमारियों की जानकारी भी सर्वेक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा रहेंगे।
विभिन्न विभाग और संस्थाएं करेंगी आंकड़ों का उपयोग
दिव्यांगजनों का सर्वेक्षण उनकी दिव्यांगता का कारण, दिव्यांगता की आयु, मिलने वाली सुविधायें, उनकी देखरेख की व्यवस्था तथा दिव्यांगता के कारण होने वाले खर्च की जानकारी के उद्द्येश्य से किया जायेगा। केन्द्र सरकार द्वारा कुल 9000 प्रतिदर्शों का सर्वेक्षण किया जायेगा जिनमें 5384 गा्रमीण तथा 3616 नगरीय प्रतिदर्श होगें। इसी क्रम में राज्य सरकारें सम्मलित रूप से कुल 10222 प्रतिदर्शों का सर्वेक्षण करेंगे जिनमें 5898 ग्रामीण तथा 4324 नगरीय प्रतिदर्श होंगे। इन आँकडों एवं उसके निष्कर्षों का उपयोग शहरी विकास मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, वॉटर एड इण्डिया, नीति आयोग, राज्य सरकारें एवं शोधार्थियों के अतिरिक्त संयुक्त राष्ट्र की संस्थाओं जैसे यूनीसेफ, विश्व स्वास्थ्य संगठन आदि द्वारा किये जायेंगे।
Published on:
11 Jun 2018 07:54 pm
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