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लखनऊ को मिलेंगे दो नए स्मार्ट टाउनशिप, नैमिष नगर और उद्योग नगर, इतने एकड़ जमीन का होगा अधिग्रहण

एलडीए की योजना है कि नैमिष नगर और उद्योग नगर में कुल मिलाकर तीन लाख से अधिक लोगों को घर मुहैया कराए। उद्योग नगर का निर्माण आगरा एक्सप्रेसवे के किनारे 5610 एकड़ भूमि पर किया जाएगा। नैमिष नगर बीकेटी क्षेत्र में सीतापुर और रैथा रोड के आसपास 2504 एकड़ क्षेत्रफल में विकसित होगा।

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AI द्वारा जेनरेटेड इमेज।

लखनऊ : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को स्मार्ट सिटी की ओर एक और मजबूत कदम मिलने जा रहा है। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने बीकेटी क्षेत्र में 'नैमिष नगर' और आगरा एक्सप्रेसवे के किनारे 'उद्योग नगर' नामक दो नई टाउनशिप बसाने की घोषणा की है। यह पहल न केवल शहर के भौगोलिक विस्तार का संकेत है, बल्कि आर्थिक, शैक्षणिक और सामाजिक रूप से भी राजधानी को सशक्त बनाएगी।

इन दोनों योजनाओं में आवास के साथ-साथ उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य और लॉजिस्टिक सुविधाओं का विकास किया जाएगा। इससे न केवल शहरी आबादी को बेहतर जीवनशैली मिलेगी, बल्कि क्षेत्रीय विकास को भी रफ्तार मिलेगी।

तीन लाख से अधिक लोगों के लिए आवास

एलडीए की योजना है कि नैमिष नगर और उद्योग नगर में कुल मिलाकर तीन लाख से अधिक लोगों के लिए आधुनिक और समावेशी आवास विकसित किए जाएंगे। इस पहल से राजधानी में न केवल आवासीय संकट में कमी आएगी, बल्कि निवेश और रोजगार के नए द्वार भी खुलेंगे।

कहां बसेंगे ये टाउनशिप?

उद्योग नगर का निर्माण आगरा एक्सप्रेसवे के किनारे 5610 एकड़ भूमि पर किया जाएगा, जो भलिया, आदमपुर इंदवारा, बहरू, जलियामऊ, मदारपुर, इब्राहिमगंज, नकटौरा, गहलवारा, तेजकृष्ण खेड़ा, रेवरी, सकरा और दोना गांवों को समेटेगा।

वहीं नैमिष नगर बीकेटी क्षेत्र में सीतापुर और रैथा रोड के आसपास 2504 एकड़ क्षेत्रफल में विकसित होगा। इसमें बीकेटी तहसील के 14 गांव शामिल होंगे, जिनके नाम जल्द ही घोषित किए जाएंगे।

टाउनशिप में होगा समग्र विकास

यह दोनों टाउनशिप केवल आवासीय नहीं होंगी, बल्कि इनमें उद्योगों, शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों और लॉजिस्टिक हब की भी योजना है। इससे इन क्षेत्रों में बहुआयामी विकास सुनिश्चित किया जा सकेगा और स्थानीय जनसंख्या को आवश्यक बुनियादी सुविधाएं सुलभ होंगी।

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रोजगार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा

सरकार की मंशा है कि इन योजनाओं को मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण योजना से जोड़ा जाए, जिससे उन्हें वित्तीय सहायता भी मिल सके। इससे न केवल परियोजनाओं की रफ्तार तेज होगी, बल्कि युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार भी उपलब्ध होगा। निवेशकों के लिए यह क्षेत्र एक नया आकर्षण केंद्र बनकर उभरेगा।

एलडीए एक सप्ताह के भीतर इन योजनाओं की पुनः समीक्षा करेगा और विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर मुख्यमंत्री को सौंपेगा। साथ ही, आईटी सिटी और वेलनेस सिटी जैसी परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई है, जिनके लिए 500 बीघा से अधिक जमीन लैंड पूलिंग के माध्यम से जुटाई जा चुकी है।