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Atal Bihari Vajpayee Political Journey : अटल बिहारी वाजपेयी का शानदार राजनीतिक सफर, जानिये पूर्व प्रधानमंत्री के कुछ अनसुने राज

Atal Bihari Vajpayee Journey : मनमोहक मुस्कान, अलग अंदाज का भाषण, व्यवहार कुशलता की वजह से सबके प्रिय नेता अटल बिहारी बाजपेई का नवाबों के शहर लखनऊ से गहरा नाता है।

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लखनऊ

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Akansha Singh

Aug 16, 2018

lucknow

अटल बिहारी वाजपेयी का शानदार राजनीतिक सफर, जानिये पूर्व प्रधानमंत्री के कुछ अनसुने राज

लखनऊ. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई की तबियत बीते 24 घंटे से काफी नाजुक चल रही है। वह अभी लाइफ सपॉर्ट सिस्टम पर हैं। वे 2 महीने से ज्यादा समय से दिल्ली के एम्स में भर्ती हैं। पूर्व प्रधानमंत्री का हालचाल लेने कल बुधवार को पीएम नरेंद्र मोदी अस्पताल पहुंचे थे। वहीं आज सुबह उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू बुधवार पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को देखने एम्स अस्पताल पहुंचे। बता दें कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई वे 93 वर्ष के हैं। उन्हें इसी वर्ष जून में किडनी में संक्रमण और कुछ अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की वजह से एम्स में भर्ती कराया गया था।

हालचाल लेने पहुंचे दिग्गज

बाद में पूर्व प्रधानमंत्री को देखने के लिए केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, स्मृति ईरानी, हर्षवर्धन, सुरेश प्रभु, जितेंद्र सिंह, अश्विनी कुमार चौबे और भाजपा नेता शाहनवाज हुसैन भी एम्‍स पहुंचे।

लखनऊ से है पुराना नाता

मनमोहक मुस्कान, अलग अंदाज का भाषण, व्यवहार कुशलता की वजह से सबके प्रिय नेता अटल बिहारी वाजपेई का नवाबों के शहर लखनऊ से गहरा नाता है। लखनऊ के चुनाव में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का भाषण भाजपा के लिए जीत की हवा बहाने का काम करता था। अटल जी का यूपी की राजधानी से खास लगाव रहा है। वह यहां से चुनाव लड़ा करते थे। अटल बिहारी वाजपेयी पहली बार 1991 में लखनऊ से लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए थे। हालांकि वे 1957 में ही बलरामपुर से निर्वाचित होकर लोकसभा के सदस्य बन चुके थे। लखनऊ से चुनाव जीतने का महत्व इसलिए है क्योंकि वे 1954 में लोकसभा के लिए एक उपचुनाव में जनसंघ उम्मीदवार के रूप में पहली बार लखनऊ से ही मैदान में उतरे थे। इसके बाद वे प्राय: सभी लोकसभा चुनाव में (1980 को छोड़कर जब भाजपा ने यह सीट जनता पार्टी के लिए समझौते में छोड़ दी थी) वे अन्य स्थानों के अलावा लखनऊ से भी उम्मीद्वार हुआ करते थे। अटल बिहारी वाजपेयी को लखनऊवासी सिर्फ अटलजी कहकर संबोधित करते हैं। लखनऊ में चाहे जिस जगह की बात कर लीजिये चाहे वो आलमबाग में चंदरनगर की सभा हो या फिर अलीगंज में कपूरथला में अटल का भाषण सभी लखनऊ की हवाओं में घूमता है। लखनऊ अटल बिहारी की कर्मभूमि है। अटल बिहारी के चाहने वाले इतने थे की भाजपा से नाराज चलने वाले मुस्लिम समुदाय के लोग भी अटल को दिल से चाहते थे। 2007 में उनकी अंतिम सभा 25 अप्रैल को कपूरथला चौराहे पर भाजपा उम्मीदवारों के समर्थन में हुई थी। इसके बाद खराब स्वास्थ्य के चलते उनका लखनऊ से उनका सम्बन्ध धीरे धीरे खत्म हो गया। वर्ष 1991, 1996, 1998, 1999, 2004 में अटल बिहारी वाजपेयी लखनऊ से सांसद रहे।उसके बाद वर्ष 2009 का लोकसभा चुनाव उन्होंने नहीं लड़ा।

पहली बार बने भाजपा सरकार के प्रधानमंत्री

अटल बिहारी वाजपेयी देश के पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री हैं। इन्होंने भाजपा की तरफ से चुनाव लड़ा और जीते और बतौर प्रधानमंत्री पांच साल सरकार चलाई। इससे पहले ऐसा कोई भी बड़ा नेता नहीं कर पाया था। वहीँ अटल बिहारी वाजपेयी पहले ऐसे सांसद थे जो चार राज्यों से चुने गए थे। वह पहले ऐसे सांसद बने जिन्हें चार राज्यों यूपी, एमपी, गुजरात और दिल्ली से चुना गया।

पहली बार बनाई गठबंधन की सरकार

अटल बिहारी वाजपेयी देश के पहले ऐसे राजनेता थे जिन्होंने पहली बार गठबंधन की सरकार बनाई। न सिर्फ उन्होंने सरकार बनाई बल्कि सभी को साथ लेकर भी चले। उनके इस सफल प्रयास ने भारतीय राजनीति को हमेशा हमेशा के लिए बदलकर रख दिया।