
गांधी परिवार की इस बहू ने राजनीति से पहले की थी मॉडलिंग, एक विज्ञापन ने बदल दी थी जिंदगी, पढ़िए रोचक किस्से
लखनऊ. सुलतानपुर (Sultanpur) की सांसद मेनका गांधी (Maneka Gandhi) की पहचान एक तेजतर्रार राजनीतिक नेताओं के तौर पर देखी जाती है। आजकल वे अपने बयानों को लेकर चर्चा में बनी है। अधिकारियों को उनके काम में कमी को लेकर सख्त निर्देश दे रही है। मेनका गांधी को कड़े फैसलों के लिए भी जाना जाता है। 26 अगस्त 1956 को देश की राजधानी दिल्ली में उनका जन्म हुआ। बहुत कम लोग जानते हैं कि मेनका गांधी ने कॉलेज के दिनों में कई सौंदर्य प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था। साथ ही उन्होंने मॉडलिंग भी की। संजय गांधी से मुलाकात से पहले उन्होंने बॉम्बे डाइंग के लिए एक विज्ञापन भी किया था। आइए जानते हैं मेनका गांधी से जुड़ी खास बातें।
पशु प्रेम के लिए भी जानी जाती हैं मेनका
मेनका गांधी अपने पर्यावरण और पशु प्रेम के लिए भी जानी जाती हैं। एक समय था, जब पति संजय गांधी व कांग्रेस पार्टी को मजबूती देने के लिए मेनका ने एक मासिक पत्रिका 'सूर्या' का प्रकाशन भी शुरू किया था।
विज्ञापन देखते ही मेनका को दिल दे बैठे थे संजय
मॉडल रहीं मेनका, संजय गांधी को पहली नजर में ही पसंद आ गई थीं। महज 17 साल की उम्र में मेनका को पहला मॉडलिंग ब्रेक मिला। बॉम्बे डाइंग के एक विज्ञापन के लिए उन्होंने शूटिंग की थी। इसी विज्ञापन में मेनका को देखते ही संजय गांधी उन्हें दिल दे बैठे थे। लोगों के बीच उस समय ये चर्चा थी कि संजय गांधी और मेनका के कजिन वीनू कपूर दोस्त हैं। वीनू की शादी की पार्टी में ही संजय और मेनका की पहली मुलाकात 1973 में हुई थी।
मेनका की मां को नहीं पंसद था रिश्ता
इसके बाद संजय ने मेनका से शादी की इच्छा जाहिर की। मेनका की मां को ये रिश्ता पसंद नहीं था, इसलिए उन्होंने मेनका को उनकी दादी के घर भेज दिया गया। जुलाई, 1974 में मेनका वापस घर लौटीं और एक महीने बाद संजय से उनकी सगाई हो गई। सिर्फ एक साल में ही संजय और मेनका की लव स्टोरी शादी में बदल गई। संजय गांधी ने 23 सितंबर, 1974 में 18 साल की मेनका से शादी कर ली। शादी के बाद मेनका अक्सर संजय के साथ दौरों पर जाती थीं। संजय और कांग्रेस पार्टी को मजबूती देने के लिए मेनका ने एक मासिक पत्रिका सूर्या का प्रकाशन भी शुरू किया था। शादी के वक्त संजय, मेनका से उम्र में 10 साल बड़े थे। खबरों के अनुसार, संजय से शादी के बाद मेनका के बॉम्बे डाइंग के विज्ञापन के अंश मिटा दिए गए।
संजय की मौत के बाद सास बहू में शुरू हुई अनबन
1980 में एक हवाई दुर्घटना में संजय की मृत्यु हो गई। इसके बाद इंदिरा गांधी को यह आशंका हुई कि मेनका की मां उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में संजय की जगह लेने के लिए कहेंगी। संजय इंदिरा के बहुत करीब थे। कहा जाता है कि आपातकाल के दौरान संजय ने ही उसका जिम्मा संभाला था। संजय की मृत्यु के बाद इंदिरा चाहती थीं कि उनका बड़ा बेटा राजीव गांधी संजय की जगह ले। वहीं मेनका के मन में भी राजनीतिक महत्वकांक्षाओं ने जन्म लेना शुरू कर दिया था। अब कहानी रोचक मोड़ पर आ गई थी।
इंदिरा के आदेश के विपरीत गई थी मेनका
सास और बहू के बीच अनबन लगातार बढ़ती ही जा रही थी। इसी बीच संजय गांधी के ऊपर एक किताब प्रकाशित की जानी थी। मेनका ने इंदिरा गांधी से इस पुस्तक का परिचय लिखने का आग्रह किया, लेकिन उन्होंने साफ़ मना कर दिया। इसके बाद 1982 में लखनऊ में अकबर अहमद ने एक सभा का आयोजन किया था। अकबर अहमद संजय गांधी के पुराने साथी थे। इंदिरा ने इस सभा को पार्टी विरोधी बताया था। अकबर ने इस सभा में मेनका को आमंत्रित किया। इंदिरा गांधी ने मेनका को हिदायत दी थी कि वे इस सभा में कोई भाषण न दे, लेकिन मेनका ने इंदिरा के आदेश के विपरीत जाते हुए भाषण दिया।
घर छोड़ चली गई थी मेनका
अगले दिन इंदिरा उनके ऊपर खूब गुस्सा हुईं। इंदिरा ने मेनका को घर छोड़ देने का आदेश दिया। मेनका ने बिना किसी प्रतिवाद के घर छोड़ दिया। जिस घर में उनका स्वागत कई उपहारों के साथ किया गया था, उसी घर से उन्हें अपना सामान बाँध कर निकलना पड़ा।
Updated on:
27 Aug 2019 06:06 pm
Published on:
27 Aug 2019 06:00 pm
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