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भूखंडों पर उद्योग लगाने में देरी पर UP सरकार सख्त, मुख्य सचिव बोले- लापरवाही करने वालों पर कार्रवाई करें

उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने सोमवार को राज्य स्तरीय उद्योग बंधु समिति की बैठक की है। मुख्य सचिव ने इस बैठक में औद्योगिक विकास को रफ्तार देने के लिए जरूरी दिशा निर्देश दिए हैं।
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लखनऊ

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Vinay Shakya

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Updated: 18 May 2026, 9:56 PM IST

Uttar Pradesh Chief Secretary S.P. Goyal

मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने उद्योग समिति से बैठक की (Image: IANS)

उत्तर प्रदेश में निवेश और औद्योगिक विकास को रफ्तार देने के लिए सरकार ने अब औद्योगिक भूखंडों पर समयबद्ध उद्योग स्थापना को लेकर सख्त रुख अपनाया है। प्रदेश के मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने सोमवार को राज्य स्तरीय उद्योग बंधु समिति की बैठक की है। इस बैठक में मुख्य सचिव ने कई जरूरी दिशा निर्देश दिए हैं।

आवंटित भूखंडों पर समय से उद्योग स्थापित किए जाएं

मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने राज्य स्तरीय उद्योग बंधु समिति की बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा समेत प्रदेशभर में आवंटित औद्योगिक भूखंडों पर निर्धारित समय सीमा के भीतर उद्योग स्थापित कराए जाएं। इसके साथ ही मुख्य सचिव ने देरी करने वाले निवेशकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि औद्योगिक भूखंड आवंटन का उद्देश्य केवल भूमि उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उस पर शीघ्र उत्पादन शुरू कराना है, ताकि प्रदेश में निवेश बढ़े, रोजगार के नए अवसर पैदा हों और औद्योगिक विकास को मजबूती मिले। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी आवंटित भूखंडों पर प्रगति की नियमित समीक्षा की जाए और जिन परियोजनाओं पर काम शुरू नहीं हुआ है, उनसे जवाब तलब किया जाए।

सरकार का आदेश- निवेशकों को समय पर जरूरी सुवधाएं मिलें

बैठक में निवेशकों को उद्योग स्थापना से जुड़ी सभी अनुमतियां, आधारभूत सुविधाएं और प्रशासनिक सहयोग समय पर उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया। मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने कहा कि उद्योग स्थापना की प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनावश्यक बाधा नहीं आनी चाहिए और सभी विभाग आपसी समन्वय मजबूत करते हुए लंबित मामलों का तय समय में निस्तारण करें। उन्होंने अधिकारियों से प्रदेश के निवेशक-अनुकूल माहौल को और अधिक मजबूत बनाने के लिए प्रभावी कदम उठाने को कहा।

बैठक में भारत सरकार की ‘विनियमन चरण-1’ पहल के तहत सात विभागों और 23 प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में अनुपालन सरलीकरण सुधारों की प्रगति की भी समीक्षा की गई। इन्वेस्ट यूपी की ओर से राज्य और जिला स्तर पर बीआरएपी, डीबीआरएपी तथा विनियमन चरण-2 के रोडमैप से जुड़ी अद्यतन जानकारी प्रस्तुत की गई। इसके अलावा जल आवंटन, भूमि मानचित्रण में अतिक्रमण, मास्टर प्लान की विसंगतियों और पीएसपी परियोजनाओं से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।