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लखनऊ. उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने आज से लगभग 101 वर्ष पूर्व लखनऊ में ‘स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा’ का नारा देकर देश में एक नई ऊर्जा भरते हुए स्वतंत्रता के आन्दोलन को एक नई दिशा दी थी। यह वाक्य ‘सिंह की गर्जना’ के समान था। इस विचार ने पूरे देश को अपनी स्वतंत्रता के लिए अंग्रेजों के खिलाफ एकजुट किया। सन् 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में मिली असफलता के कारण देश में निराशा छा गई थी। उस निराशा से उबारने में लोकमान्य तिलक के इस उद्घोष ने महत्वपूर्ण काम किया।
राज्यपाल ने यह विचार आज यहां लोक भवन में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के अमर उद्घोष के 101 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित ‘स्मृति समारोह’ को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि लोकमान्य तिलक ने समाज को एकजुट करने के लिए ‘गणपति उत्सव’ और ‘शिवाजी उत्सव’ को सार्वजनिक समारोह बनाया। इन प्रयासों ने समाज में जागरूकता लाने का काम किया। तिलक जी के प्रयासों के चलते आज देश स्वतंत्र है।
इस अवसर पर उन्होंने उत्तर प्रदेश तथा महाराष्ट्र के बीच हुए सांस्कृतिक सम्बन्धों हेतु हुए एमओयू का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच बहुत पुराने सम्बन्ध हैं। भगवान राम ने अपने वनवास के दौरान महाराष्ट्र के पंचवटी में निवास किया था। इसी प्रकार छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक काशी के ब्राह्ममणों ने किया था। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की प्रगति उत्तर प्रदेश के लोगों का महत्वपूर्ण योगदान है।
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि लोकमान्य तिलक का यह उद्घोष ‘स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा’ भारत की आजादी के परिपे्रक्ष्य में अत्यन्त महत्वपूर्ण है और हम सबके लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि जो कौम अपने इतिहास की रक्षा नहीं कर सकती है वह अपने भूगोल की भी रक्षा नहीं कर सकती है। तिलक ने भारत की आजादी के लिए प्रखरता से काम किया।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आजादी ने हमें बहुत कुछ दिया है। आज हम विश्व के सबसे बड़े स्वतंत्र और लोकतांत्रिक देश हैं। स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि महापुरुषों ने स्वतंत्र भारत का जो सपना देखा था, उसमें जातिवाद, क्षेत्रवाद, अशिक्षा इत्यादि का कोई स्थान नहीं था। उन्होेंने कहा कि स्वराज्य का तात्पर्य ऐसे राज्य से है जहां पर निर्णय लेने का अधिकार हो। परन्तु निर्णय संविधान के दायरे में ही रहकर लिए जाने चाहिए।
लोकमान्य तिलक द्वारा रचित ‘गीता रहस्य’ नामक टीका का उल्लेख करते हुए योगी ने कहा कि इसके माध्यम से उन्होंने स्वतंत्रता आन्दोलन को आध्यात्मिक आधार देने का प्रयास किया। तिलक जी ने इस पुस्तक की रचना म्यांमार के मांडले जेल में कैद के दौरान की थी। लोकमान्य तिलक द्वारा गीता पर लिखी गई यह टीका पथ-प्रदर्शक का कार्य करती है। उन्होंने कहा कि पर्व और त्योहार समाज को जोड़ने के लिए बने हैं। बाल गंगाधर तिलक द्वारा गणेश उत्सव एवं शिवाजी उत्सव मनाने की परम्परा की शुरुआत इसी दिशा में किया गया प्रयास था। वे स्वदेशी एवं स्वसंस्कृति की पुनस्र्थापना के लिए आजीवन संघर्ष करते रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का यह समारोह अत्यन्त महत्वपूर्ण है, क्योंकि प्रधानमंत्री के ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प के तहत उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र राज्यों के बीच सांस्कृतिक सम्बन्धों के लिए यह एमओयू हुआ है। उन्होंने कहा कि आगामी 24 जनवरी 2018 को आयोजित किए जा रहे ‘उत्तर प्रदेश दिवस’ में दोनों राज्यों के सांस्कृतिक दल भाग लेंगे। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस MOU से दोनों राज्यों के सम्बन्ध और प्रगाढ़ होंगे।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में भाग लेने आये महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस , लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की प्रपौत्र वधू और पुणे की मेयर श्रीमती मुक्ता तिलक, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, उनके परिजनों का हार्दिक अभिनन्दन करते हुए कहा कि आज का यह कार्यक्रम स्वतंत्रता आन्दोलन को प्रखर नेतृत्व प्रदान करने वाले लोकमान्य तिलक के उद्घोष के 101 वर्ष पूर्ण होेने पर आयोजित किया गया है, जिससे इसे एक नया आयाम मिला है। उन्हांेने कहा कि स्वतंत्रता आन्दोलन में योगदान देने वाले सभी सेनानियों को सदैव याद किया जाना चाहिए और उनके प्रति श्रद्धा का भाव रखना चाहिए, क्योंकि उनके प्रयासों से ही आज हम एक स्वतंत्र राष्ट्र हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के लिए एक नई योजना लागू करेगी। उन्होंने विभिन्न राज्यांे से आये स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का भी स्वागत किया।
कार्यक्रम के दौरान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों मंगल पाण्डे, तात्या टोपे, बहादुर शाह जफर, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक, स्वातंत्रवीर सावरकर, भगत सिंह, अशफाक उल्ला खान, चन्द्रशेखर आजाद, ठाकुर रोशन सिंह, रामकृष्ण खत्री, शचीन्द्र नाथ बख्शी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय, उधमसिंह, महावीर सिंह (भगत सिंह के साथी), राजगुरु, चापेकर बन्धु, विष्णु पिंगले, एस0आर0 राणा, ठाकुर दुर्गा सिंह, राघव तथा सरयूशरण के परिजनों को सम्मानित किया गया।
इनके अलावा, उत्तर प्रदेश के जिन स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को सम्मानित किया गया, उनमें मोती लाल, वीरेन्द्र प्रसाद वाजपेई, दाऊ जी गुप्ता, बैजनाथ, मो. शाबिर, बच्चन शुक्ला, महादेव प्रसाद, भगवती सिंह विशारद, शिव नारायण लाल शर्मा, हनुमान प्रसाद अवस्थी तथा पूरन सिंह शामिल हैं।
इस अवसर पर लोकमान्य तिलक पर केन्द्रित स्मारिका ‘लोकमान्य’ तथा प्रो. अरुण तिवारी की पुस्तक ‘अ माॅडर्न इण्टरप्रिटेशन आॅफ लोकमान्य तिलक्स गीता रहस्य’ का विमोचन भी किया गया। इसके अलावा, राज्यपाल , मुख्यमंत्री महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री तथा मंत्रिमण्डल के सदस्यों द्वारा इस मौके पर आयोजित एक प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया गया।
Published on:
30 Dec 2017 08:15 pm
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