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यूपी में ‘ट्रिपल पी’ पार लगाएंगे कांग्रेस की डूबती नैया

जानिए कौन हैं कांग्रेस के ट्रिपल पी, जिनके दम से कांग्रेस जीतना चाहती है महामुकाबला...

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Hariom Dwivedi

Mar 25, 2016

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हरिओम द्विवेदी
लखनऊ.
यूपी में Election 2017 की धमक सुनाई देने लगी है। छोटे-बड़े सभी राजनीतिक दल अपनी गोटियां सेट करने में जुटे हुए हैं। ऐसे में कांग्रेस ने भी विधानसभा फतेह के लिए अपनी 'ट्रिपल पी' चाल चलने की तैयारी शुरू कर दी है। दिग्गज काग्रेसी नेताओं का मानना है कि इस बार कांग्रेस यूपी में अपनी पुरानी स्थिति में आ सकती है।


ट्रिपल पी यानी, प्रशांत-पंडित और प्रियंका। कांग्रेस ने इस बार जहां प्रशांत किशोर को यूपी में कैंपेन की बागडोर दी हुई है, वहीं प्रियंका गांधी वाड्रा को सीएम कैंडिडेट के तौर पर प्रमोट करने की तैयारी है। साथ ही कांग्रेस अपने पुराने वोट बैंक यानी पंडित वोटों को अपने पाले में भी लाने की जुगत में जुट गई है। तो आइए विस्तार से जानते हैं क्या कांग्रेस का ट्रिपल पी फॉर्मूला-



प्रशांत किशोर

यूपी में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने प्रशांत किशोर को अपने कैंपेन से जोड़कर मास्टर स्ट्रोक खेला है। बता दें कि ये वही प्रशांत किशोर हैं, जिन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी और बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश के सिर पर जीत का सेहरा बांधा था। अपने हाइटेक इलेक्शन मैनेजमेंट और सोशल मीडिया कैंपेन की वजह से उनकी डिमांड लगभग हर पार्टी में रहती है।


राजनीतिक जानकारों की मानें तो प्रशांत किशोर को यह बात अच्छे से पता है कि वह कोई जादूगर नहीं हैं और न ही यूपी कोई बिहार है। और न ही भाजपा-जदयू जैसे राजनीतिक समीकरण हैं। उन्होंने प्रियंका का सीएम के तौर पर सामने लाकर अपनी चुनावी तैयारियों की दिशा में एक ठोस कदम चला है। साथ उनकी नजर यूपी में कांग्रेस के पुराने वोट बैंक को लाने पर है।


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चुनौतियां

क्या प्रियंका गांधी यूपी में कांग्रेस की डूबती नैया बचा पाएंगी? ऐसे कई सवाल हैं, जिनके जवाब प्रशांत कुमार को ढूंढने होंगे। क्योंकि यूपी में अरसा हो गया कांग्रेस को बेहतर प्रदर्शन किये हुए, चाहे वह लोकसभा चुनाव हों या फिर विधानसभा चुनाव। गौरतलब है कि कांग्रेस 27 साल से यूपी में सत्‍ता से दूर है।



प्रियंका गांधी वाड्रा

खबरों के मुताबिक, प्रशांत किशोर ने आगामी विधानसभा चुनाव में प्रियंका को यूपी के सीएम के तौर पर पेश करने की राय दी है। जिसके बाद से कार्यकर्ताओं में एक बार फिर प्रियंका को लाने की मांग जोर पकड़ने लगी है।


देश में राहुल, प्रदेश में प्रियंका'

नौ मार्च को यूपी कांग्रेस के नेताओं ने एक यज्ञ किया ताकि सोनिया गांधी प्रियंका को सक्रिय राजनीति में आने दें। इस यज्ञ में 'प्रियंका लाओ देश बचाओ. 'देश में राहुल, प्रदेश में प्रियंका' के मंत्र पढ़े गए।


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वहीं, 13 मार्च को लखनऊ पहुंचे कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि अगर प्रियंका गांधी सक्रिय राजनीति में आती हैं तो इससे पार्टी को बड़ा लाभ होगा। उन्होंने ये भी कहा कि कांग्रेस के हर ज़मीनी कार्यकर्ता की यही इच्छा है। यहां तक की यूपी कांग्रेस के नेता भी लगभग हाथ जोड़े इसकी मांग कर रहे हैं।


प्रियंका बढ़ाएंगी कांग्रेस का वोट बैंक?

प्रदेश के कांग्रेसी नेताओं को भरोसा है कि प्रियंका के आने से कांग्रेस के चुनावी कार्यक्रमों में लोगों की भीड़ जुटाने में मदद मिलेगी। लेकिन ये भीड़ वोट में तब्दील होगी या नहीं, इन नेताओं में अनिश्चितता की स्थिति है।



नजर ब्राह्मण वोट बैंक पर

चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने राहुल गांधी समेत अन्य नेताओं की मौजूदगी में सुझाव दिया है कि 2017 में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी को ब्राह्मणों में पैठ बनानी होगी। उनका मानना है कि बाबरी मामले से पहले ब्राह्मण कांग्रेस का कोर वोट बैंक था, इस पर फिर से ध्यान दिया जाये। बता दें कि यूपी में 20 प्रतिशत मत ब्राह्मणों के हैं। सूत्रों का कहना है कि किशोर ने बताया कि कांग्रेस के अपर कास्‍ट आधार के चलते ही सपा और बसपा का जन्‍म हुआ है।


आसान नहीं होगा वोट ब्राह्मणों को पाले में लाना

एक बार फिर से ब्राह्मणों को अपने खेमे में लाना कांग्रेस के लिए आसान नहीं होगा। क्योंकि ब्राह्मण वोट बैंक को लेकर प्रशांत किशोर का आइडिया नया नहीं है। सपा, बसपा और भाजपा पूर्वी उत्‍तर प्रदेश में ब्राह्मण सम्‍मेलन कराते रहे हैं। प्रदेश की सत्तारूढ़ पार्टी जहां ब्राह्मण हितैषी होने का दावा करती है, वहीं सोशल इंजीनियरिंग के सहारे ही बसपा ने सूबे में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी।


कांग्रेस के पास यूपी में नहीं है कोई बड़ा ब्राह्मण चेहरा

प्रशांत किशोर यूपी में फिर से ब्राह्मणों को जोड़ना तो चाहते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि उनके पास यूपी में कोई प्रभावी बाह्मण चेहरा नहीं है। पहले कांग्रेस के लिए यूपी में पूर्व मुख्यमंत्री हेमवतीनंदन बहुगुणा, पूर्व मुख्यमंत्री कमलापति त्रिपाठी और पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी जैसे नेता फ्रंट पर रहे थे। तब ब्राह्मण वोट बैंक के साथ अन्य जातियों के वोट बैंक भी उनके साथ थे।

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