
UP Politics: उत्तर प्रदेश के चुनाव में इस बार कुछ दिलचस्प मुकाबले देखने को मिल सकते हैं। भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेताओं की इच्छा है कि उनके बच्चों को उनकी सियासत विरासत आगे बढ़ाने का मौका मिले। इस फेहरिस्त में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के दूसरे बेटे नीरज सिंह, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के बेटे अभिनव सिन्हा, उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के बेटे करण, झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार की बेटी श्रुति, पूर्व विधायक बृज भूषण शरण सिंह की बेटी शालिनी सिंह, उत्तर प्रदेश की पूर्व मंत्री रीता बहुगुणा जोशी के बेटे मयंक जोशी और पूर्व सांसद संजय सिंह की बेटी आकांक्षा सिंह शामिल हैं।
मजे की बात यह है कि अभी टिकट को लेकर कोई निर्णय नहीं हुआ है, लेकिन नेताओं के इन बच्चों ने चुनावी तैयारी जरूर शुरू कर दी है। जनता से मेल-मिलाप के साथ-साथ सार्वजनिक कार्यक्रमों में उनकी उपस्थिति एकदम से बढ़ गई है।
राजनाथ सिंह के बड़े बेटे पंकज सिंह पहले से विधायक हैं और अब उनके छोटे बेटे नीरज भी इन दिनों राजनीतिक गलियारों में सुर्खियां बटोर रहे हैं। वैसे, नीरज पिछले कई वर्षों से लखनऊ में सक्रिय हैं और अपने पिता की अनुपस्थिति में अक्सर सार्वजनिक कार्यक्रमों एवं पार्टी के आयोजनों में उनका प्रतिनिधित्व करते रहे हैं, लेकिन अब चर्चा इस बात पर हो रही है कि भाजपा उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी सौंप सकती है। सूत्रों का कहना है कि नीरज को लखनऊ पूर्व विधानसभा सीट से मैदान में उतारा जा सकता है। लेकिन अगर ऐसा नहीं होता, तो फिर उन्हें संगठन में कोई पद मिल सकता है।
नीरज युवाओं के बीच लोकप्रिय हैं, यूके की लीड्स यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट हैं। सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं और जमीनी स्तर पर भी उनका अच्छा नेटवर्क है।
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के बेटे अभिनव सिन्हा को भाजपा गाजीपुर से मैदान में उतार सकती है। 2024 के लोकसभा चुनाव के समय भी उन्हें टिकट मिलने की अटकलें थीं, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। हालांकि, इस बार उन्हें टिकट मिलने की संभावना काफी ज्यादा नजर आ रही है। कुछ बीजेपी नेताओं का कहना है कि अभिनव को गाजीपुर सदर से मौका दिया जा सकता है।
अभिनव सिन्हा टेक्निकल एक्सपर्ट हैं और सामाजिक एवं संगठनात्मक गतिविधियों के ज़रिए जनता के बीच अपनी एक अलग पहचान बनाई है। उन्हें अक्सर जिले में होने वाले प्रशिक्षण कार्यक्रमों, स्वच्छता अभियान और पार्टी के कार्यक्रमों में हिस्सा लेते देखा जा सकता है। भाजपा को गाजीपुर सदर के लिए एक नए चेहरे की तलाश है, क्योंकि 2022 में इस सीट से पार्टी की टिकट पर चुनाव लड़ने वालीं संगीता बलवंत अब राज्य सभा पहुंच चुकी हैं। ऐसे में अभिनव को मौका मिलने की उम्मीद काफी ज्यादा है। फिलहाल यह सीट समाजवादी पार्टी विधायक जय किशन साहू के पास है।
यूपी विधानसभा के स्पीकर सतीश महाना के बेटे करण महाना का नाम भी चर्चा में है। करण बिजनेसमैन और भाजपा युवा मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य हैं। पिछले कुछ दिनों से उन्होंने अपने पिता के निर्वाचन क्षेत्र महाराजपुर में सक्रियता बढ़ा दी है।
वहीं, झारखंड के राज्यपाल और BJP के वरिष्ठ नेता संतोष गंगवार की बेटी श्रुति को भी अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में मौका मिल सकता है। श्रुति को 2024 के लोकसभा चुनावों में एक संभावित उम्मीदवार माना जा रहा था, मगर टिकट नहीं मिली। इस बार समीकरण श्रुति गंगवार के पक्ष में दिखाई दे रहे हैं। बरेली जिले की बहेड़ी सीट, जहां से छत्रपाल गंगवार ने 2022 का विधानसभा चुनाव लड़ा था, वहां भाजपा को नए चेहरे की तलाश है। क्योंकि छत्रपाल लोकसभा पहुंच चुके हैं। यह मुस्लिम और कुर्मी बहुल क्षेत्र है, ऐसे में श्रुति गंगवार की दावेदारी मजबूत हो जाती है।
विवादों में रहने वाले पूर्व बीजेपी विधायक बृज भूषण शरण सिंह की बेटी शालिनी सिंह भी टिकट की इच्छा रखने वालों की दौड़ में शामिल हैं। शालिनी नोएडा में एक प्रमुख राजनीतिक चेहरा बनकर उभरी हैं। सूर्या चौहान हत्याकांड के बाद वह पीड़ित परिवार से भी मिलने पहुंची थीं। शालिनी ने केवल पीड़ित परिवार का हौसला ही नहीं बढ़ाया, बल्कि सूर्या के बड़े भाई को नौकरी का ऑफर देने की बात भी कही। शालिनी सिंह वकील के साथ-साथ लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। नोएडा सिटिज़न फ़ोरम (NCF) की कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर, वह अक्सर जनता से जुड़े मुद्दों को उठाती हैं। हालांकि, उनकी राह में कुछ चुनौतियां भी हैं। नोएडा का प्रतिनिधित्व फिलहाल राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह करते हैं, ऐसे में क्या पार्टी नेतृत्व उनकी जगह शालिनी को मौका देगा?
कांग्रेस छोड़कर बीजेपी का दामन थामने वालीं रीता बहुगुणा जोशी के बेटे मयंक जोशी भी इन दिनों सामाजिक कार्यक्रमों में ज्यादा नजर या रहे हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में मयंक के लखनऊ कैंटोनमेंट सीट से चुनाव लड़ने की अटकलें थीं, लेकिन पार्टी ने टिकट नहीं दिया। इसके बाद वह समाजवादी पार्टी की ‘साइकिल’ पर सवार हो गए। हालांकि, उनकी मां रीता बहुगुणा जोशी बीजेपी में ही बनी रहीं। सूत्रों का कहना है कि रीता अपने बेटे के लिए बीजेपी का टिकट दिलाने की कोशिशें कर रही हैं। वैसे, मयंक ने अभी तक औपचारिक रूप से समाजवादी पार्टी नहीं छोड़ी है, लेकिन रीता चाहती हैं कि वह भाजपा का दामन थामें। हालांकि, ये बात अलग है कि रीता को खुद 2024 में लोकसभा का टिकट नहीं मिला था।
पूर्व सांसद संजय सिंह की बेटी आकांक्षा सिंह की नजर भी बीजेपी से टिकट पर है। पेशे से सुप्रीम कोर्ट की वकील आकांक्षा ने अपनी मां अमीता सिंह के साथ अमेठी के मतदाताओं से मेल-मिलाप शुरू कर दिया है। अमीता सिंह खुद भी विधायक रही हैं। संजय सिंह की बात करें, तो उन्होंने 2022 का विधानसभा चुनाव अमेठी से लड़ा था, लेकिन सफलता नहीं मिलीं। अब संजय और अमीता चाहते हैं कि आकांक्षा उनकी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाएं।
Published on:
04 Jun 2026 05:59 pm
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