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यूपी की जनता को 65 घंटे तकलीफ देने के बाद भी बिजलकर्मियों को कुछ हासिल नहीं हुआ, अब क्या है रणनीति?

बिजली कर्मियों ने 16 मार्च की रात 10 बजे से 72 घंटे की हड़ताल शुरू की। 19 मार्च को दोपहर लगभग 3 बजे हड़ताल खत्म हो गई। आखिर हड़ताल पर गए बिजली कर्मियों को क्या हासिल हुआ? क्यों हड़ताल वापस लिया?

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लखनऊ

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Upendra Singh

Mar 20, 2023

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हड़ताल वापसी के बाद जो बयान विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति और सरकार की तरफ से आए हैं। वह बता रहे हैं कि हड़ताल से पहले बिजली कर्मचारी जहां खड़े थे। खत्म होने के बाद भी वहीं पर खड़े हैं। समझौते को लागू कराने के लिए बातचीत होगी।

हड़ताल से उत्तर प्रदेश की बिजली 65 घंटे गुल रही। जिससे लोगों को परेशानी हुई। बिजली कर्मचारी मसाल जुलूस निकालकर विरोध कर रहे थे। बिजली कर्मियों ने 16 मार्च की रात 10 बजे से 72 घंटे की हड़ताल शुरू कर दी।

यूपी के ऊर्जा मंत्री एके शर्मा और पावर कॉरपोरेशन के चेयरमैन एम. देवराज हड़ताल पर नहीं जाने की अपील करते रहे, लेकिन बात नहीं बन पा रही थी।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद स्थितियां बदलनी शुरू हुई
शुक्रवार 17 मार्च को इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश आया। हाईकोर्ट ने हड़ताल को गलत बताया। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के नेताओं को जमानती वारंट जारी किया। उन्हें सोमवार 20 मार्च को पेश होने का आदेश दिया। कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया कि बिजली जैसी आवश्यक सेवा के मामले में न्यायालय के 6 दिसंबर के आदेश को ध्यान में रखते हुए इसके लिए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। हाईकोर्ट के आदेश और सरकार की सख्ती के बाद हड़ताल कमजोर पड़ने लगा।

रोज 150 करोड़ के नुकसान का अनुमान
पावर कॉरपोरेशन रोज 8 से 10 करोड़ रुपए के घाटे में है। 15 मार्च से कार्य बहिष्कार और हड़ताल से नियमित घाटा बना है। नए कनेक्शन का काम बंद होने, राजस्व वसूली नहीं होने से आमदनी ठप हो गई। इसी से करीब 100 करोड़ रुपये का नुकसान अनुमानित है।

हड़ताल के दौरान उत्पादन निगम की तापीय बिजली इकाइयों के बंद हो जाने से भी कॉरपोरेशन को 50 करोड़ रुपये से अधिक के घाटे का अनुमान है। पॉवर कॉरपोरेशन के विकास से जुड़ी परियोजनाओं का काम नहीं होने से ये परियोजनाएं भी पिछड़ीं।

कब-क्या हुआ

हड़ताल के दौरान लिए गए एक्शन

तीसरे राउंड की बैठक में बिजली कर्मचारियों की बनी बात
ऊर्जा मंत्री एके शर्मा और बिजली कर्मचारी नेताओं के बीच तीसरे राउंड की बैठक में बात बनी। इसके बाद बिजली कर्मचारियों ने हड़ताल वापस लिया। सरकार की ओर से भरोसा मिला है कि जिन 3000 लोगों को निकाला गया था, 22 लोगों पर एस्मा लगाया था, 29 लोगों पर मुकदमा दर्ज कराया गया था, उन सबको सरकार वापस लेगी।

मांगों पर क्या हुआ समझौता इसकी बात सामने नहीं आई
जिन मांगों को लेकर हड़ताल शुरू हुई उस पर समझौते को लेकर कोई बात सामने नहीं आई। जब मांगों पर बात नहीं हुई तो बिजली कर्मचारी हड़ताल क्यों खत्म किया? क्या कर्मचारियों ने कार्रवाई के डर से हड़ताल वापस लिया।

समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने कहा कि मुख्यमंत्री के आह्वान, ऊर्जा मंत्री के आश्वासन और हाईकोर्ट के सम्मान में हड़ताल वापस हुई है। हालांकि, एक बार फिर से हड़ताल में शामिल कर्मचारियों को कोई लिखित आश्वासन नहीं मिला है। लेकिन, ऊर्जा मंत्री ने समझौते का आश्वासन दिया है।