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UP Employee Salary News: 47,816 कर्मचारियों पर शासन की सख्ती, मानव सम्पदा पोर्टल पर संपत्ति विवरण न देने पर वेतन-पदोन्नति अटकी

UP Policy Update: मानव सम्पदा पोर्टल पर संपत्ति विवरण अपलोड न करने वाले 47,816 कर्मचारियों पर उत्तर प्रदेश सरकार सख्त हुई। 10 मार्च तक अंतिम मौका, इसके बाद वेतन, पदोन्नति और एसीपी लाभ पर रोक लगेगी।

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लखनऊ

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Ritesh Singh

Feb 26, 2026

मानव सम्पदा पोर्टल पर विवरण न देने वाले कर्मचारियों पर सख्ती, 10 मार्च अंतिम मौका (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

मानव सम्पदा पोर्टल पर विवरण न देने वाले कर्मचारियों पर सख्ती, 10 मार्च अंतिम मौका (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

UP Government Cracks Down: उत्तर प्रदेश शासन ने राज्य कर्मचारियों द्वारा अपनी चल-अचल संपत्ति का विवरण मानव सम्पदा पोर्टल पर अनिवार्य रूप से दर्ज कराने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। निर्धारित समय सीमा 31 जनवरी 2026 तक विवरण अपलोड न करने वाले 47,816 कर्मचारियों को अब 10 मार्च 2026 तक का अंतिम अवसर दिया गया है। इसके बाद भी अनुपालन न होने पर वेतन रोकने, पदोन्नति पर विचार न करने, एसीपी लाभ स्थगित करने और विजिलेंस क्लियरेंस न देने जैसी कठोर कार्रवाई की जाएगी।

मुख्य सचिव का सख्त निर्देश

मुख्य सचिव एस.पी. गोयल द्वारा जारी शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली, 1956 के नियम-24 के तहत सभी कर्मचारियों के लिए अपनी चल एवं अचल संपत्ति का विवरण देना अनिवार्य है। 24 नवंबर 2025 और 6 जनवरी 2026 को जारी पूर्व आदेशों में भी यह चेतावनी दी गई थी कि यदि 31 जनवरी 2026 तक विवरण अपलोड नहीं किया गया तो जनवरी 2026 का वेतन फरवरी में नहीं दिया जाएगा। इसके बावजूद एनआईसी से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार 47,816 कर्मचारियों ने निर्धारित समयसीमा तक अपनी संपत्ति का विवरण पोर्टल पर दर्ज नहीं कराया।

क्या है मानव सम्पदा पोर्टल

मानव सम्पदा पोर्टल राज्य सरकार की डिजिटल मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली है, जिसके माध्यम से कर्मचारियों की सेवा पुस्तिका, अवकाश, स्थानांतरण, पदोन्नति, वेतन और अन्य प्रशासनिक विवरण ऑनलाइन संचालित किए जाते हैं। सरकार ने पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से संपत्ति विवरण भी इसी पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य किया है।

अब क्या होगी कार्रवाई

शासनादेश में साफ कहा गया है कि 10 मार्च 2026 तक भी विवरण अपलोड न करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इसके तहत,चयन वर्ष 2026-27 में पदोन्नति पर विचार नहीं। एसीपी (Assured Career Progression) का लाभ रोका जाएगा। विदेश यात्रा या प्रतिनियुक्ति हेतु विजिलेंस क्लियरेंस नहीं। विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई। सरकार का मानना है कि संपत्ति विवरण पारदर्शिता और भ्रष्टाचार नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण है।

वेतन पर भी असर

आदेश में स्पष्ट किया गया है कि जिन कर्मचारियों ने विवरण अपलोड नहीं किया है, उनका जनवरी 2026 का वेतन रोका जाएगा। हालांकि, यदि कोई कर्मचारी 10 मार्च तक अपना विवरण अपलोड कर देता है, तो उसके जनवरी और फरवरी 2026 का वेतन बाद में जारी कर दिया जाएगा। साथ ही यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि किसी कर्मचारी ने विवरण अपलोड नहीं किया, फिर भी उसका वेतन आहरित कर लिया गया है, तो संबंधित आहरण एवं वितरण अधिकारी (DDO) के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई होगी।

जिम्मेदारी तय

मुख्य सचिव ने सभी,अपर मुख्य सचिव,प्रमुख सचिव,सचिव,विभागाध्यक्ष,मंडलायुक्त,जिलाधिकारी को निर्देशित किया है कि आदेशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। निगरानी की जिम्मेदारी संबंधित विभागाध्यक्ष और विभागीय प्रभारी अधिकारियों को सौंपी गई है।

आंकड़े क्या कहते हैं

एनआईसी की रिपोर्ट के अनुसार 31 जनवरी 2026 तक हजारों कर्मचारियों ने संपत्ति विवरण दर्ज नहीं कराया। यह संख्या कुल राज्य कर्मचारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिससे शासन की सख्ती और बढ़ गई है। इतने बड़े स्तर पर अनुपालन न होना प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है।

पारदर्शिता की दिशा में कदम

सरकार का तर्क है कि संपत्ति विवरण से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा,अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ेगी। वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। भविष्य में जांच या विजिलेंस मामलों में स्पष्टता रहेगी। डिजिटल पोर्टल के माध्यम से यह प्रक्रिया पारदर्शी और निगरानी योग्य बनाई गई है।

कर्मचारियों में हलचल

शासनादेश जारी होने के बाद विभिन्न विभागों में हलचल तेज हो गई है। कई विभागों ने अपने स्तर पर विशेष अभियान शुरू कर कर्मचारियों को समय रहते विवरण अपलोड करने की अपील की है। कुछ कर्मचारी संगठनों ने तकनीकी समस्याओं का हवाला देते हुए समय सीमा बढ़ाने की मांग भी की है, हालांकि शासन ने फिलहाल 10 मार्च को अंतिम तिथि घोषित किया है।

इलेक्ट्रॉनिक शासनादेश

यह शासनादेश इलेक्ट्रॉनिक रूप से जारी किया गया है और इसकी प्रमाणिकता शासन की आधिकारिक वेबसाइट पर सत्यापित की जा सकती है।डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में यह कदम प्रशासनिक प्रक्रियाओं को तेज और पारदर्शी बनाने का हिस्सा माना जा रहा है।

अंतिम अवसर

शासन ने साफ संदेश दिया है कि 10 मार्च 2026 अंतिम अवसर है। इसके बाद किसी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। कर्मचारियों से अपेक्षा की गई है कि वे समय रहते अपनी चल-अचल संपत्ति का विवरण मानव सम्पदा पोर्टल पर दर्ज कर प्रशासनिक कार्रवाई से बचें।